गुरुजी के आगे एलयू प्रशासन नतमस्तक

2019-04-15T06:00:43+05:30

- शिक्षकों की मनमानी पर एलयू प्रशासन नहीं कर पाता कार्रवाई

LUCKNOW :

केस 1- बीएड एंट्रेंस एग्जाम

एलयू ने चार बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षाएं आयोजित कराई हैं। यहां के दो प्रोफेसरों ने इसकी जिम्मेदारी निभाई। यूनिवर्सिटी की ओर से इसके लिए काफी पैसा भी उपलब्ध कराया गया लेकिन शिक्षकों ने पहले तो इसका ब्यौरा यूनिवर्सिटी को नहीं दिया। जब बार-बार इसकी डिटेल मांगी गई तो कामचलाऊ ब्यौरा ही पेश किया गया। इसमें बिल भी शामिल नहीं थे। मामला जोर-शोर से उठा लेकिन उतनी ही तेजी से दब गया।

केस 2- रूसा से मिला कोष

एलयू के विभागों को सुसज्जित और अपडेट करने के लिए शासन की ओर से रूसा के तहत पैसा उपलब्ध कराया गया। प्रस्तावों के अनुसार कोष आवंटित कर शिक्षकों को इसकी जिम्मेदारी दी गई। यूनिवर्सिटी की ओर से जब खर्च का ब्यौरा मांगा गया तो इसे भी बस फौरी तौर पर उपलब्ध कराया गया। यूनिवर्सिटी प्रशासन इससे संतुष्ट नहीं था लेकिन यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला गया।

केस 3- नहीं बना अटेंडेंस रजिस्टर

एलयू के समाज शास्त्र विभाग के प्रो। सुकांत चौधरी वीसी से छुट्टी स्वीकृत कराए बिना सेमिनार के लिए विदेश गए। तीन माह से वे यूनिवर्सिटी से गायब रहे फिर भी उनकी सेलरी दी जाती रही। यूनिवर्सिटी में कर्मचारियों के लिए अटेंडेंस रजिस्टर है लेकिन शिक्षकों के लिए ऐसा कोई रजिस्टर नहीं बना है।

कई बार झुकना पड़ा

यह तीन केस तो केवल नजीर मात्र हैं। एलयू प्रशासन हमेशा शिक्षकों के आगे नतमस्तक रहता है। यूनिवर्सिटी की ओर से शिक्षकों पर कोई कार्रवाई की बात नहीं होती है। यही कारण है कि शिक्षक संघ यूनिवर्सिटी प्रशासन पर हावी होने का प्रयास करता है। हाल ही में समाज शास्त्र विभाग के एक शिक्षक बिना छुट्टी मंजूर कराए ही विदेश चले गए। वीसी जब सख्त हुए तो लूटा उनके बचाव में उतर आया और आंदोलन की चेतावनी भी दे दी। पीएचडी सीटों को लेकर भी कुछ ऐसा ही हुआ था जब लूटा के आगे यूनिवर्सिटी प्रशासन बैकफुट पर आ गया था।

बाक्स

लूटा ने दी एलयू को चुनौती

गुरुवार को लूटा की आपात बैठक में प्रो। सुकांत चौधरी का निलंबन वापस लेने की मांग की गई। साथ ही नैक की बैठक में जो एचओडी नहीं आए, जिन्हें यूनिवर्सिटी की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, उसे भी वापस लेने की मांग की है। शिक्षकों की अटेंडेंस का रिकार्ड मांगने पर एलयू प्रशासन को लूटा ने चुनौती दी है।

कोट

यूनिवर्सिटी प्रशासन शिक्षकों का उत्पीड़न करता आ रहा है। पीएचडी की सीटें, प्रो। चौधरी का निलंबन, मीटिंग में न पहुंचने पर नोटिस यह सब वीसी का अडि़यल रवैया है। जो बताने के लिए काफी है कि शिक्षकों का शोषण कैसे हो रहा है।

प्रो। विनित वर्मा, महामंत्री, लूटा

inextlive from Lucknow News Desk


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