सरकार किसी की भी हो प्रशासन पर रहा है गिरिजा का ही राज

2018-08-07T11:20:30+05:30

GORAKHPUR देवरिया के बाल गृह की संचालिका गिरिजा त्रिपाठी का गोरखपुर प्रशासन पर भी सालों से दबदबा रहा है सरकार आती जाती रही है लेकिन उसका दबदबा कम नहीं हुआ है उसके एक इशारे पर अधिकारी हर वो काम करते रहे हैं जिसकी उसे जरूरत है वो हमेशा अधिकारियों के करीब रही है यही वजह है कि छोटे अधिकारी उसकी हर गलत गतिविधि को नजरअंदाज करते रहे और उसके गिरेबां पर हाथ डालने कतराते रहे दो दशक पूर्व तक आम महिला की तरह ङ्क्षजदगी गुजारने वाली गिरिजा त्रिपाठी सफेदपोशों की सोहबत के कारण धीरेधीरे सामाजिक कार्यों में आई और फिर आगे बढ़ती गई इस संस्था को संचालित कर वह प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों के काफी करीब आ गई इतना करीब आई कि कोई भी बड़ा कार्यक्रम उसके बिना नहीं हो सका देवरिया से लेकर गोरखपुर में जब भी कोई बड़ा आयोजन हुआ तो अधिकारी उसे जरूर पूछते रहे खास बात यह है कि इस संस्था पर कई बार अधिकारी जांच करने जाते रहे लेकिन जांच में इसका पर्दाफाश नहीं हुआ गिरिजा त्रिपाठी कई बार आला अधिकारियों व शासन स्तर से सम्मानित भी हो चुकी है

23 जून 2017 को हुआ था पहला पत्र व्यवहार
बताया जाता है कि संस्था द्वारा संचालित बाल गृह बालिका, बाल गृह शिशु, विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण अभिकरण व स्वाधार गृह देवरिया की मान्यता 2017 में सीबीआइ की जांच में संदिग्ध मिलने के बाद स्थगित कर दी गई. शासन के निर्देश पर जिला प्रोबेशन अधिकारी प्रभात कुमार ने 23 जून 2017 को ही पत्र व्यवहार किया और बच्चों को बलिया व गोरखपुर में शिफ्ट करने की बात कही, लेकिन बच्चों व महिलाओं को संस्था द्वारा दूसरे जगह शिफ्ट नहीं किया गया. संस्था द्वारा बच्चों को जबरन अपने पास रखा गया और उनसे अवैध कार्य कराए गए. कहा जा रहा है कि सीबीआई की जांच में ही इस संस्था में बच्चे कम पाए गए तो उसने रिपोर्ट लगाते हुए पहले मान्यता रोकी और फिर इसकी जांच कराने का निर्देश दिया, लेकिन जिले के आला अधिकारी हाथ पर हाथ रखे बैठे रहे.
गोरखपुर में भी है मां विंध्यवासिनी शेल्टर होम
मुजफ्फरपुर के बाद देवरिया में हुए बच्चियों से दुष्कर्म के बाद गोरखपुर में भी हड़कंप मच गया है. जिले में चल रही आठ संस्थानों की जांच के लिए दिनभर अधिकारी इधर से उधर करते दिखे. वैसे माना जाता है कि देवरिया कांड की आरोपी गिरिजा त्रिपाठी का प्रभाव गोरखपुर में भी खूब रहा है. गोरखपुर के रानीडिहा में वे मां विंध्यवासिनी शेल्टर होम नाम से बुजुर्गों के लिए वृद्धाश्रम चलाती हैं. संस्थान की देखभाल उसकी बेटी करती है. वो गोरखपुर जिला प्रोबेशन कार्यालय में संविदा पर कार्यरत है. इसके खिलाफ भी जांच हो सकती है.
गोरखपुर जिला प्रोबेशन कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, जिले भर में संचालित शेल्टर होम की जांच आठ बिंदुओं पर की जाएगी. शेल्टर होम की जांच के लिए एसडीएम सदर, एसडीएम गोला और एसडीएम कैंपियरगंज को लगाया गया है. इन्हें 12 घंटे के भीतर शासन को रिपोर्ट देना है.
इन संस्थाओं की होगी जांच
संस्था का नाम                      संस्था अधीक्षक
खुला आश्रय गृह, पादरी बाजार -   फादर जोबी
एशिएशन सहयोगी संस्था, गीता वाटिका- रवि साईमन
स्नेहालय शिशु गृह, पादरी बाजार -  फादर जेशन
प्रतीक्षा आश्रय गृह, खोराबार -  सिरिन
प्रोविडेंस होम, गुलहरिया बाजार (0-10) - जोशी
प्रोविडेंस होम, गलुहरिया बाजार-(10-18)- जोशी
सरस्वती शिशु गृह, गगहा- मंशा यादव
आसरा, विशेष स्कूल, कैंपियरगंज - फादर बिजू
नोट - जनपद में राजकीय-स्वैच्छिक संस्थाओं के माध्यम से संचालित गृह.
इन बिंदुओं की होगी पड़ताल
सन्वासिनी, शिक्षा, शौचालय, स्वास्थ्य, सुरक्षा, भोजन, चिकित्सा, कौशल विकास व अन्य चीजों की होगी जांच.
शासन के आदेश पर जिले के सभी शेल्टर होम की जांच शुरू करा दी गई है. जहां भी अनियमितताएं पाई जाएगी. वहां कार्रवाई की जाएगी.
के विजयेंद्र पांडियन, डीएम, गोरखपुर


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