मच्छर के डंक का आतंक

2018-04-27T07:00:04+05:30

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-गर्मी आते ही बढ़ी मच्छरों की संख्या, डॉक्टरों के यहां लगी भीड़

-शहर के राजापुर इलाके में हर साल बड़ी संख्या में सामने आते हैं मलेरिया के मरीज

ALLAHABAD: गर्मी आते ही एक बार फिर मच्छरों ने नींद खराब करनी शुारू कर दी है। स्वास्थ्य विभाग भी चिंतित है कि एंटी लार्वा दवाएं बेअसर साबित हो रही हैं और मच्छर साल दर साल घातक होते जा रहे हैं।

लास्ट ईयर 3200, अब तक 400

पिछले साल मलेरिया विभाग के आंकड़ों में जनवरी से दिसंबर के बीच कुल 3200 मरीज रजिस्टर्ड हुए। इस साल जनवरी से अप्रैल के बीच इनकी संख्या 400 हो चुकी है, जबकि सीजन अब शुरू हुआ है। वहीं, सोर्सेज कहते हैं कि यह तो केवल विभागीय आंकड़े हैं। असल में देखा जाए तो मलेरिया के मरीजों की संख्या शहर में इससे कई गुना अधिक होगी।

साल दर साल जहरीला हो रहा डंक

एक्सप‌र्ट्स की मानें तो मच्छर की प्रतिरोधक क्षमता साल-दर-साल बढ़ती जा रही है। इसके मुकाबले बजट में बढ़ोतरी नहीं हो रही है। इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। पिछले पांच साल में सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही एंटी लार्वा दवाओं से मच्छर कम प्रभावित हुए हैं। उनकी प्रजनन क्षमता पर अधिक असर नहीं पड़ा है। जबकि, इन दवाओं का बजट इलाहाबाद में पांच साल से 25 से 30 लाख के बीच ही अटका हुआ है।

मलेरिया के लक्षण

-तेज बुखार, ठंड लगना, बेचैनी, कमजोरी और चक्कर आने के साथ उल्टी लगना।

बचाव

-घर के आसपास जलभराव नहीं होने दें।

-रात में सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें।

-शाम ढलने के बाद पूरे बदन के कपड़े पहनें।

-लक्षण दिखने पर डॉक्टर से तत्काल संपर्क करें।

यहां हर साल फैलता है मलेरिया

शहर के कछारी इलाकों में हर साल सर्वाधिक मलेरिया और डेंगू का आतंक होता है। इनमें राजापुर के मां झमसा मंदिर कुर्मियाना का इलाका भी शामिल है। इस एरिया में हर साल गर्मी शुरू होते ही कूड़े और गंदगी के चलते मच्छर पनपने लगते हैं। जरा सी बारिश होने के बाद जलभराव होता है और हालात बेकाबू होने लगते हैं। स्थानीय निवासियों की मानें तो बड़ी संख्या में लोगों को मलेरिया का सामना करना पड़ता है।

कॉलिंग

हमारे इलाके में न तो दवा का छिड़काव होता है और न ही फॉगिंग की जाती है। ऐसे में चारों ओर गंदगी होने पर मच्छरों का प्रकोप प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।

-तारिक

गंदगी दूर हो जाए और जलभराव पर लगाम लगाई जाए तो निश्चित तौर पर मच्छरों का पनपना कम हो जाएगा। प्रशासन को इस तरफ देना चाहिए।

-अफसर-उल-हक

जब बहुत हल्ला होता है तो एक या दो दिन फॉगिंग कराई जाती है। वह भी राजापुर के बाहरी एरिया में। हम लोग की गलियों में तो शायद ही नजर आ जाएं।

-नासिर

हर साल गर्मी आते मलेरिया का प्रकोप बढ़ने लगता है। जून और जुलाई के महीनों में बहुत ज्यादा मरीज सामने आते हैं। इसका कारण मच्छरों की अधिकता है।

-मोइन

शहर के बड़े इलाकों में ही फॉगिंग कराई जाती है। मलिन और छोटी बस्तियों की ओर अधिकारी ध्यान नहीं देते हैं। यहां दवा का छिड़काव कायदे से हो तो मच्छर दूर होने लगेंगे।

-तस्लीम

तीन दिन पहले फॉगिंग मशीन आई थी। वह भी सभी जगह नहीं गई। राजापुर के अंदरूनी एरिया में तो शायद ही फॉगिंग की जाती हो। यही कारण है कि अभी से मच्छर लगने लगे हैं। मई के बाद तो रात में सोना मुश्किल हो जाएगा। मलेरिया का खतरा रहेगा सो अलग।

-अहमद अली, पूर्व पार्षद, राजापुर

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