50 रुपए में क्लासरूम तक पहुंच रही नकल

2019-02-14T06:01:03+05:30

aditya.jha@inext.co.in

PATNA(13 Feb): एक तरफ बिहार विद्यालय परीक्षा समिति नकल पर नकेल कसने के लिए नए- नए पैंतरे अपना रही है। वहीं दूसरी तरफ नकलची बच्चे भी नए रास्ते खोज ले रहे हैं। पटना में बच्चों का एक गिरोह एक्टिव हो गया है। इस गिरोह ने नकल का रेट कार्ड बना रखा है। एक बार स्कूल के अंदर नकल पहुंचाने के लिए 50 रुपए और अगर दूसरी बार जाना है तो फिर 50 रुपए देने होंगे। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने इस गिरोह को रंगे हाथों पकड़ा। चौंकाने वाली बात यह है कि नकल के इस खेल में पैरेंट्स खुद इन्वॉल्व है। गिरोह को पैसे भी पैरेंट्स ही दे रहे हैं।

खूब पकड़े जा रहे हैं नकलची स्टूडेंट्स

6 फरवरी को 60 स्टूडेंट्स निष्कासित

7 फरवरी को 29 स्टूडेंट्स निष्कासित

8 फरवरी को 74 स्टूडेंट्स निष्कासित

9 फरवरी को 28 स्टूडेंट्स निष्कासित

11 फरवरी को 119 स्टूडेंट्स निष्कासित

12 फरवरी को 23 स्टूडेंट्स निष्कासित

13 फरवरी को 64 स्टूडेंट्स निष्कासित

पटना में निष्कासित स्टूडेंट्स

11 फरवरी को 7 स्टूडेंट्स निष्कासित

12 - फरवरी को 3 स्टूडेंट्स निष्कासित

13 फरवरी को 1 स्टूडेंट्स निष्कासित

बिहार बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में पैसा फेको और तमाशा देखो

कड़ी सुरक्षा के बीच आयोजित होने वाले इंटरमीडिएट परीक्षा में महज 50 रुपए में नकल सामग्री स्टूडेंट्स तक पहुंच जाती है। ये काम करते हैं परीक्षा सेंटरों के पास रहने वाले छोटे- छोटे बच्चे। नकल का यह खेल चल रहा पटना के रघुनाथ प्रसाद उच्च माध्यमिक स्कूल में। स्कूल की छोटी बाउंड्री का फायदा उठाकर ये बच्चे परीक्षार्थियों को नकल सामग्री पहुंचाते हैं। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की टीम ने चल रही इंटरमीडिएट परीक्षा की तहकीकात की तो यह खुलासा हुआ।

पैसों का दिया जाता है लालच

अपने बच्चे को नकल कराने सेंटर पर आए पैरेंट आसपास के बच्चों को पैसे का लालच देकर नकल सामग्री पहुंचाने के लिए जिम्मेवारी सौंपते हैं। जिसके बदले में उन्हें 50 रुपए

मिलता है। ये बच्चे स्कूल के पीछे के रास्ते से खिड़की के पास बैठे

स्टूडेंट को धीरे से नकल सामग्री पहुंचा देते हैं। कंकड़बाग स्थित इस स्कूल के पीछे के गेट पर एक भी

पुलिसकर्मी की ड्यूटी नहीं लगी है। परीक्षा के दौरान प्रशासन द्वारा मेन गेट को बंद कर दिया जाता है। ड्यूटी पर मौजूद सिपाही इस गेट के पास कुर्सी लगाकर बैठे रहते हैं। स्थानीय बच्चे आसानी से नकल सामग्री परीक्षार्थी तक पहुंचा देते हैं।

नकल सामग्री खोल रही पोल

परीक्षा खत्म होने के बाद जब स्कूल के चारों तरफ का मुआयना किया गया तो दीवाल के पास कई नकल सामग्री मिली। स्कूल पास मिली नकल सामग्री बता रही हैं कि परीक्षा में किस तरह कदाचार हो रहा है.

आंटी ने कहा था, काम कर दोगे तो पैसा दूंगी

नकल सामग्री पहुंचाने वाले बच्चे सुनील कुमार और दैनिक जागरण आई नेक्स्ट रिपोर्टर के बची हुई बातचीत के अंश।

रिपोर्टर - स्कूल के अंदर कैसे पहुंच गए?

स्टूडेंट - आपको क्या काम है?

रिपोर्टर - मेरा भाई एग्जाम दे रहा है

स्टूडेंट- बाउंड्री जंपकर अंदर गए थे।

रिपोर्टर - कोई कुछ बोला नहीं?

स्टूडेंट - कोई देखा नहीं तो बोलेगा क्या?

रिपोर्टर - क्या करने गए थे?

स्टूडेंट- एक लोग परीक्षा दे रहे हैं उन्हें कागज देने गए थे।

रिपोर्टर - कौन बोला पहुंचाने के लिए?

स्टूडेंट- एक आंटी ने कहा था.

रिपोर्टर - इससे तुम्हें क्या फायदा होता है?

स्टूडेंट - इसके लिए मुझे 50 रुपए मिलते हैं.

inextlive from Patna News Desk


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