आतंक का पर्याय बने लैपर्ड का खात्मा

2018-12-26T06:00:53+05:30

- शिकारियों ने सीमापानी गांव के पास लैपर्ड को किया ढेर, आज किया जाएगा पोस्टमार्टम

ALMORA: महाकालेश्वर क्षेत्र के बमनगांव में बीते कई दिनों से आतंक का पर्याय बने लैपर्ड को मंगलवार शाम शिकारियों ने सीमापानी गांव के पास ढेर कर दिया। लैपर्ड ने सप्ताहभर पहले ही एक महिला को शिकार बनाया था। वन विभाग व शिकारी ने मारे गए लैपर्ड को ही नरभक्षी बताया है। शव का बुधवार को पोस्टमार्टम होगा।

लैपर्ड के आतंक से लोगों में थी दहशत

विदित हो कि बमनगांव व आसपास के तोक गांवों में लैपर्ड ने पिछले कई दिनों ने आतंक मचा रखा था। उसने एक सप्ताह के भीतर ग्राम पंचायत बमनगांव के तोक गांव पुरिया गजा व मल्ली बाखली में हीरा देवी 52 वर्ष व गोबिंदी देवी 72 वर्ष को निवाला बना दिया। ग्रामीणों की मांग पर लैपर्ड को मारने के लिए दो दिन से प्रसिद्ध शिकारी लखपत सिंह व कुछ अन्य सहयोगियों को तैनात किया गया था, लेकिन वह पकड़ में नहीं आ सका। मंगलवार को शिकारी सीमापानी के इलाकों में गश्त कर रहे थे। सायं करीब तीन बजे सीमापानी गांव के पास खेत में चर रही शेर सिंह की बछिया पर लैपर्ड झपट गया तथा उसे घसीट कर कुछ दूर ले गया। गश्त कर रहे शिकारी लखपत सिंह व सहयोगी हरेंद्र सिंह व गंगा सिंह मौके पर पहुंचे तथा करीब 5 बजकर 15 मिनट पर बंदूक से निशाना साधकर एक ही गोली से लैपर्ड को ढेर कर दिया। मारा गया लैपर्ड नर है। जिसकी उम्र करीब साढ़े सात वर्ष बताई गई तथा लंबाई साढ़े सात फीट है। शिकारी लखपत सिंह का कहना है कि मारा गया लैपर्ड ही नरभक्षी है। उसके मुंह का एक दांत टूटा मिला है तथा गले के नीचे कुछ आंशिक हिस्सा सड़ा हुआ है।

inextlive from Dehradun News Desk


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