ऐसी लव स्टोरी का हिस्सा बनना पसंद करते हैं मनोज वाजपेयी

2018-08-31T05:15:29+05:30

जागरण डॉट कॉम से एक्सक्लूसिव बातचीत में एक्टर मनोज बाजपेयी ने खुलासा किया कि क्या वे कभी सीरियस रोल्स से हटकर लव स्टोरी बेस्ड फिल्मों में काम करेंगे या नहीं


features@inext.co.in  KANPUR: मनोज बायपेयी ज्यादातर फिल्मों में सीरियस कैरेक्टर ही प्ले करते हैं। इस इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि क्या वह कभी किसी लव स्टोरी पर बनने वाली मूवी में काम करेंगे? तो उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा कि मेरी इच्छा जरूर है कि मैं लव स्टोरी का हिस्सा बनूं लेकिन फिल्म कुछ हटकर हो। जैसे हॉलीवुड की फिल्म फॉलिंग इन लव, जिसमें पति-पत्नी को एक बार फिर शादी के बाद प्यार होता है। उनकी लव स्टोरी को बेहतरीन तरीके से दिखाया गया है। अगर ऐसी स्टोरी हो और अगर कोई डायरेक्टर मुझे कहता है तो मैं जरूर करूंगा।  जो स्क्रिप्ट दिल को छू जाए वही है बेस्ट फिल्मों के सिलेक्शन को लेकर उन्होंने कहा कि मेरा मानना है फिल्म का सिलेक्शन करते समय स्क्रिप्ट सबसे इंर्पोटेंट होती है। शुरुआत में यह कहना मुश्किल होता है कि फिल्म कितनी हिट होगी या कितनी दर्शकों को पसंद आएगी, लेकिन यह सिलेक्शन हम कर सकते हैं कि हमें किस तरह की स्क्रिप्ट पसंद है और हम कैसी फिल्में करना चाहते हैं। मैं वही स्क्रिप्ट पर काम करता हूं जो मेरे दिल को छू जाती है।  गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फिल्में बनती रहनी चाहिए  मनोज बाजपेयी कहते हैं कि, गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फिल्में बनते रहना चाहिए। जब यह फिल्म आई थी तब नहीं पता था कि ऐसी फिल्म भी बनाई जा सकती है। लेकिन किसी ने यह रिस्क लिया और लोगों को यह फिल्म बहुत पसंद आई। मेरा मानना है कि हमें हमेशा उस तरह की स्टोरी को कहना चाहिए जो हमारे बीच की हो, गलियों और मोहल्लों की, सड़कों पर रहने वाले लोगों की स्टोरी हो। अच्छी तरह से ऐसी फिल्में बनाई जाएं तो दर्शक जरूर सिनेमाघरों तक पहुंचेंगे।  रियलिटी पर है फोकस  मनोज आगे बताते हैं कि, मैं रियल स्टोरीज पर ज्यादा फोकस करता हूं। जिसमें आम लोगों की जीवनयात्रा, खुशी या दुख की बात की जाए। यह सिलसिला मैं गली गुलिया से शुरू करने जा रहा हूं। इस फिल्म की स्टोरी दिमाग में डील करती है। इसमें आम आदमी का दर्द दिखाया जाएगा, जिसे अक्सर लोग समझ नहीं पाते। इस फिल्म के जरिए आदमी की मानसिक यात्रा या खामोशी की बात कर रहे हैं।  फिल्में हमेशा रहेंगी डिजीटल वर्ल्ड के बाद अब फिल्मों के अस्तित्व के सवाल पर उन्होंने कहा कि, मुझे नहीं लगाता कि फिल्मों की जगह कोई और ले सकेगा। वेब सीरीज आने के बाद भी फिल्में वैसे ही चलती रहेंगी जैसे कि चली आ रही हैं। यह एक परंपरा है जो कभी खत्म नहीं हो सकती और न ही मर सकती है। दर्शक बहुत सारे हैं जो कि मनोरंजन के भूखे हैं इसलिए कोई भी मंच कभी नहीं मरेगा। 

 

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KANPUR: मनोज बायपेयी ज्यादातर फिल्मों में सीरियस कैरेक्टर ही प्ले करते हैं। इस इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि क्या वह कभी किसी लव स्टोरी पर बनने वाली मूवी में काम करेंगे? तो उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा कि मेरी इच्छा जरूर है कि मैं लव स्टोरी का हिस्सा बनूं लेकिन फिल्म कुछ हटकर हो। जैसे हॉलीवुड की फिल्म फॉलिंग इन लव, जिसमें पति-पत्नी को एक बार फिर शादी के बाद प्यार होता है। उनकी लव स्टोरी को बेहतरीन तरीके से दिखाया गया है। अगर ऐसी स्टोरी हो और अगर कोई डायरेक्टर मुझे कहता है तो मैं जरूर करूंगा। 

जो स्क्रिप्ट दिल को छू जाए वही है बेस्ट

फिल्मों के सिलेक्शन को लेकर उन्होंने कहा कि मेरा मानना है फिल्म का सिलेक्शन करते समय स्क्रिप्ट सबसे इंर्पोटेंट होती है। शुरुआत में यह कहना मुश्किल होता है कि फिल्म कितनी हिट होगी या कितनी दर्शकों को पसंद आएगी, लेकिन यह सिलेक्शन हम कर सकते हैं कि हमें किस तरह की स्क्रिप्ट पसंद है और हम कैसी फिल्में करना चाहते हैं। मैं वही स्क्रिप्ट पर काम करता हूं जो मेरे दिल को छू जाती है। 

गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फिल्में बनती रहनी चाहिए 

मनोज बाजपेयी कहते हैं कि, गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फिल्में बनते रहना चाहिए। जब यह फिल्म आई थी तब नहीं पता था कि ऐसी फिल्म भी बनाई जा सकती है। लेकिन किसी ने यह रिस्क लिया और लोगों को यह फिल्म बहुत पसंद आई। मेरा मानना है कि हमें हमेशा उस तरह की स्टोरी को कहना चाहिए जो हमारे बीच की हो, गलियों और मोहल्लों की, सड़कों पर रहने वाले लोगों की स्टोरी हो। अच्छी तरह से ऐसी फिल्में बनाई जाएं तो दर्शक जरूर सिनेमाघरों तक पहुंचेंगे। 

रियलिटी पर है फोकस 

मनोज आगे बताते हैं कि, मैं रियल स्टोरीज पर ज्यादा फोकस करता हूं। जिसमें आम लोगों की जीवनयात्रा, खुशी या दुख की बात की जाए। यह सिलसिला मैं गली गुलिया से शुरू करने जा रहा हूं। इस फिल्म की स्टोरी दिमाग में डील करती है। इसमें आम आदमी का दर्द दिखाया जाएगा, जिसे अक्सर लोग समझ नहीं पाते। इस फिल्म के जरिए आदमी की मानसिक यात्रा या खामोशी की बात कर रहे हैं। 

फिल्में हमेशा रहेंगी

डिजीटल वर्ल्ड के बाद अब फिल्मों के अस्तित्व के सवाल पर उन्होंने कहा कि, मुझे नहीं लगाता कि फिल्मों की जगह कोई और ले सकेगा। वेब सीरीज आने के बाद भी फिल्में वैसे ही चलती रहेंगी जैसे कि चली आ रही हैं। यह एक परंपरा है जो कभी खत्म नहीं हो सकती और न ही मर सकती है। दर्शक बहुत सारे हैं जो कि मनोरंजन के भूखे हैं इसलिए कोई भी मंच कभी नहीं मरेगा। 

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