नृत्यकला मंदिर में वर्षों से बंद है कथकली मणिपुरी और कुचीपुड़ी विभाग

2019-01-24T11:33:07+05:30

- कथकली, मणिपुरी और कुचीपुड़ी विभाग है वर्षो से बंद

PATNA : बिहार के प्रतिभाओं को नृत्य कला में प्रशिक्षित करने के लिए राज्य सरकार ने 19 फरवरी 1956 को नृत्य कला मंदिर की स्थापना की। उस समय नृत्य के विभिन्न विद्याओं में एडमिशन लेने के लिए भीड़ लगती थी। अब आलम यह है यहां गिने- चुने स्टूडेंट्स ही प्रशिक्षण कार्य में इंटरेस्ट ले रहे हैं। स्टूडेंट्स की घटती संख्या को लेकर दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने जब पड़ताल की तो पता चला कि यहां ज्यादातर विभाग शिक्षकों की कमी के कारण बंद हो गया है। ग‌र्ल्स के लिए लोकनृत्य के साथ ओडिसी और कथक कोर्स संचालित है। ब्वॉयज के लिए लोक संगीत व गिटार बजाने का प्रशिक्षण दिया जाता है.

मणिपुरी है चार साल से बंद

नृत्य कला मंदिर में मणिपुरी और कुचीपुड़ी, कथकली नृत्य प्रशिक्षण लगभग चार साल से बंद पड़े हैं। नाम नहीं छापने की शर्त पर वहां काम करने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि शिक्षकों की कमी के कारण नृत्य कला मंदिर के कई विभाग बंद हो गए हैं। भरत नाट्यम के प्रशिक्षण कार्य भी अनुबंध पर तैनात टीचर ही दे रहे हैं। तबला, हारमोनियम सहित अन्य विद्याओं का प्रशिक्षण देने वाले टीचर यहां नहीं है.

कर्मी नहीं देते सही जानकारी

नृत्य कला मंदिर में तैनात कर्मियों द्वारा एडमिशन को लेकर सही जानकारी नहीं देने की शिकायत दैनिक जागरण आई नेक्स्ट के पास पिछले कई दिनों से मिल रही थी। हकीकत जानने के लिए हमारी टीम ने रियलिटी चेक किया तो हकीकत सामने आया। रिपोर्टर द्वारा नृत्य के संबंध में पूछने पर वहां के कर्मी ने बताया कि अखबार में विज्ञापन दिया गया है। उसका अवलोकन करें। रिपोर्टर ने जब कर्मचारी का नाम पूछा तो उन्होंनें अपना नाम बताने साफ तौर पर इनकार कर दिया। इससे कर्मियों के सोच को समझा जा सकता है.

दिन प्रतिदिन घट रही है स्टूडेंट्स की संख्या

नृत्य कला मंदिर में टीचर के अभाव में दिन प्रतिदिन स्टूडेंट्स की संख्या घट रही है। यहां स्टूडेंट्स जिस विद्या में प्रशिक्षण लेने के लिए पहुंचते हैं उससे संबंधित विभाग बंद मिलता है। उल्लेखनीय है कि 1980 के आसपास लगभग 1 हजार स्टूडेंट्स प्रशिक्षण लेते थे जो फिलहाल घटकर आधे से भी कम हो गया है। जबकि वर्तमान जनसंख्या के हिसाब से इस संख्या में दोगुना वृद्धि होनी चाहिए। इसके प्रति सरकार को भी गंभीरता से सोचने की जरूरत है.

टीचर के अभाव में कुछ कोर्स को बंद किया गया है। बांकी सभी कोर्स संचालित है। लगभग 400 स्टूडेंट्स विभिन्न विद्याओं में प्रशिक्षण ले रहे हैं.

- सोमा चक्रवर्ती, टीचर, नृत्यकला मंदिर

inextlive from Patna News Desk


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