लखनऊ मेट्रो ने अभिभावकों को दी बड़ी राहत

2019-03-19T06:00:15+05:30

- अब नहीं झेलनी होगी स्कूल वैन व बस संचालक की मनमानी, मोटी फीस से मिली राहत

- सिर्फ फीस ही नहीं समय की बचत के साथ सुरक्षित सफर का एहसास करा रही है मेट्रो

LUCKNOW :

मेट्रो का अमौसी से मुंशीपुलिया तक संचालन शुरू होने के साथ ही राजधानी के हजारों पैरेंट्स को एलएमआरसी ने बड़ी राहत दी है। मेट्रो ने अपने रूट पर आने वाले सभी स्कूलों के स्टूडेंट्स और पैरेंट्स के सफर को आसान बना दिया है। पैरेंट्स वैन के बोझिल सफर के साथ अपना समय बचा सकते हैं, बल्कि पैसों की भी बचत कर सकते हैं.

समय की हो रही बचत

जिस रूट पर मेट्रो चल रही है, वह राजधानी का सबसे बिजी रूट है। स्कूल टाइम पर यहां ट्रैफिक काफी होता है। जिससे कई बार स्टूडेंट और पैरेंट्स जाम में फंस जाते हैं। अगर लोग अपने बच्चों को निजी वाहनों की जगह मेट्रो से स्कूल छोड़ने आएं तो न केवल उनका समय बचेगा बल्कि रोड पर जाम की समस्या का भी समाधान हो जाएगा। मेट्रो रूट पर करीब 20 स्कूल हैं, जिनमें लगभग 14 हजार बच्चे पढ़ते हैं।

सेविंग भी करायेगी मेट्रो

राजधानी में एक वैन चालक या बस चालक एक बच्चे को घर से स्कूल और स्कूल से घर छोड़ने के लिए औसतन 15 सौ से दो हजार रुपए लेते हैं। जिसमें हर साल 5 फीसद का इजाफा भी होता है। मेट्रो से सफर पर यह खर्च मासिक करीब 5 सौ से 7 सौ रुपए ही आएगा। अभिभावक संघ के अध्यक्ष पीके श्रीवास्तव ने बताया कि मेट्रो में दो सौ रुपए का कार्ड बनता है, जिसमें सौ रुपए की वैलेडिटी होती हैं। ऐसे में अगर दो मेट्रो स्टेशन के बीच सफर करना हो तो एक बच्चे पर डेली 20 से 25 रुपए का खर्च आएगा। जो पूरे महीने 700 रुपए के आसपास ही रहेगा। जिस दिन छुट्टी होगा उस दिन का किराया भी बचेगा। बच्चों की जर्नी सेफ रहेगी और वे जाम में भी नहीं फसेंगे।

बच्चे भी नहीं होंगे परेशान

पीके श्रीवास्तव ने कहा कि आमतौर पर सभी स्कूल गर्मियों में सुबह साढ़े सात बजे से शुरू होते हैं। ऐसे में स्कूल वैन का ड्राइवर बच्चे को साढ़े छह बजे ही लेने आ जाता है। वहीं, अगर दोपहर दो बजे छुट्टी होती है तो बच्चा एक से डेढ़ घंटे बाद घर पहुंचता है क्योंकि वैन ड्राइवर को और भी बच्चों को घर छोड़ना होता है। मेट्रो में सफर करने से बच्चों का कम से कम दो से तीन घंटे का समय भी बचेगा.

बचेगा दो महीने का पैसा

गर्मी की छुट्टी के दौरान स्कूल बंद रहते हैं, लेकिन पैरेंट्स को इस दौरान भी वैन फीस देनी होती है। वहीं मेट्रो के सफर से पैरेंट्स का इन दो माह का पैसा पूरी तरह से बच जाएगा.

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इन स्कूलों के बच्चों को फायदा

मेट्रो रूट पर सीएमएस की चारबाग, महानगर, कानपुर रोड और इंदिरा नगर ब्रांच है। जिनमें करीब 19,000 हजार बच्चे हैं। इनमें 2200 सीधे मेट्रो रूट से जुड़ गए हैं। इसी तरह हजरगंज के क्राइस्टचर्च कॉलेज, सेंट फ्रांसिस कॉलेज, कैथेड्रल सीनियर सेकंडरी स्कूल में भी छह हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स हैं। इन स्कूलों में इंदिरा नगर, निशातगंज, चारबाग से भी बच्चे आते हैं। माउंटफोर्ट कॉलेज महानगर में 3300 स्टूडेंट्स में एक हजार ऐसे हैं जिनका घर मेट्रो रूट पर है। इसी तरह लामार्ट ग‌र्ल्स में 2800 में से 250, बप्पा श्रीनारायण वोकेशनल इंटर कॉलेज में 1200 में 600 बच्चे सीधे मैट्रो रूट से जुड़े हैं। सेंट एग्निस लोरेटो डे, माउंट कार्मल, महानगर स्कूल, डीपीएस इंदिरा नगर, रानी लक्ष्मीबाई सीनियर सेकंडरी स्कूल इंदिरा नगर सहित कई स्कूलों के करीब 20 हजार स्टूडेंट्स में पांच हजार से अधिक मेट्रो रूट से जुड़े हैं.

स्टूडेंट्स को मिल सकता है बेनीफिट

कॉलेज स्टूडेंट्स मेट्रो रूट पर स्टूडेंट

क्राइस्ट चर्च 3900 700

लामार्ट ग‌र्ल्स 2800 250

सीएमएस स्टेशन रोड 2344 350

माउंट फोर्ट कॉलेज 3300 1,000

सीएमएस महानगर 6214 900

सीएमएस कानपुर रोड 8127 800

सीएमएस इंदिरा नगर 1796 150

डीपीएस इंदिरा नगर 2500 1200

केकेवी इंटर कॉलेज 1200 600

खालसा कॉलेज नाका 350 150

गुरुनानक गल्स इंटर कॉलेज चंदन नगर 650 100

अवध कॉलेजिएट 2000 700

inextlive from Lucknow News Desk


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