दूध मंडी का मैदान आ रहा मछली सुखाने के काम

2017-10-11T07:00:41+05:30

- महेवा में 2006 में हुआ था दूध मंडी का निर्माण

- अब तक शुरू नहीं हो सका है कारोबार, जर्जर हो गए भवन

GORAKHPUR: पूर्वाचल में दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए की गई कवायद जिम्मेदारों की उदासीनता की भेंट चढ़ गई है। 2006 में तत्कालीन सपा सरकार की ओर से महेवा मंडी में बनवाई गई दूध मंडी 10 साल बाद भी शुरू नहीं हो सकी है। डेढ़ एकड़ की इस जगह की बदहाली का हाल ये कि वर्तमान में यहां मछलियां सुखाने का काम किया जा रहा है। उधर देखरेख के अभाव में यहां बने भवन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। जबकि मंडी प्रशासन का तर्क है यहां दूध के कारोबार का जिंस न होने और बगल में ही मछली मंडी होने के चलते व्यापारी यहां नहीं आए।

उदासीनता ने बना दिया जर्जर

तत्कालीन सपा सरकार ने 26 नवंबर 2005 को दूध मंडी के लिए नगर निगम से डेढ़ एकड़ जमीन खरीदी। 2006 में मंडी का निर्माण शुरू हुआ। जिसमें कुल एक करोड़ 64 लाख रुपए खर्च किए गए। दूध मंडी बन कर तैयार हुई लेकिन यहां दूध का कारोबार शुरू नहीं हो पाया। पहले तो मंडी प्रशासन द्वारा प्रचार-प्रसार ना किए जाने के चलते ज्यादातर दूध व्यापारियों ने यहां व्यापार करने में रुचि नहीं दिखाई। वहीं, बगल में ही मछली मंडी होने के चलते बड़े व्यापारियों ने इस जगह को मुफीद नहीं समझा। जिसका नतीजा ये है कि 10 साल बाद भी इसे शुरू नहीं किया जा सका है। इस बीच देखरेख के अभाव में ये जगह बेहद जर्जर हो चुकी है। यहां बने छायादार शेड, चबूतरा, खुला प्लेटफॉर्म, साइकिल स्टैंड, शौचालय, चौकीदार आवास पूरी तरह जर्जर हो गए हैं। चबूतरों पर लगे टायल्स भी टूट कर अलग हो गए हैं। वर्तमान हाल की बात करें तो यहां मछलियां सुखाई जा रही हैं। उधर मंडी प्रशासन का कहना है कि मछली मंडी के बगल में होने के चलते ही दूध व्यापारी यहां कारोबार करने नहीं आए।

चारों तरफ झाडि़यां, गंदगी का अंबार

दूध मंडी की इस जगह की सफाई व्यवस्था को लेकर भी मंडी प्रशासन की उदासीनता साफ देखी जा सकती है। हाल ये है कि मंडी में चारों तरफ झाडि़यां उग आई हैं और हर तरफ कचरा पसरा रहता है। वहीं, इस जगह पर आस-पास के लोग और मंडी के श्रमिक शौच करने आते हैं। जिसके चलते इस जगह की स्थिति और भी नारकीय हो गई है।

मंडी पर खर्च बजट

डेढ़ एकड़ जमीन की खरीद पर खर्च - 86 लाख 82 हजार रुपए

2006 में दूध मंडी के निर्माण में खर्च - 76 लाख 95 हजार रुपयए

दूध मंडी में बनाए गए भवन

छायादार नीलामी चबूतरा 4

खुला प्लेटफॉर्म 1

साइकिल स्टैंड 1

शौचालय 1

चौकीदार आवास 1

आंकड़ों में शहर का दूध कारोबार

पैकेट दूध -

डेयरी सप्लाई

ज्ञान 26400 लीटर

अमूल 10 हजार लीटर

मदर डेयरी 7500 लीटर

पराग 7500 लीटर

शुद्ध 4500-5000 लीटर

पारस 4500-5000 लीटर

बड़ी डेयरी -

महाराजा डेयरी 1500 लीटर

छोटी डेयरी

250 डेयरी 50 से 100 लीटर/डेयरी

डेली दूध की सप्लाई - 90 से 95 हजार लीटर

पैकेट दूध की सप्लाई - 62,000 लीटर

बड़ी डेयरी से सप्लाई - 1500 लीटर

छोटी डेयरियों से सप्लाई - 25000 लीटर

ग्वालों से सप्लाई - 10 से 15 हजार लीटर

वर्जन

दूध के कारोबार के लिए व्यापारियों को जागरूक किया गया लेकिन इसके बावजूद भी व्यापारी नहीं आए। हालांकि लखनऊ के इंजीनियर्स इसका सर्वे कर रहे हैं। यहां पर दूसरे जिंस का कारोबार कराने की योजना बनाई जा रही है।

- केके सिंह, डीडीए मंडी परिषद

inextlive from Gorakhpur News Desk


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