MillennialsSpeak देहरादून में #RaajniTEA जो करेगा विकास का रूट मैप तैयार वही होगा वोट का हकदार

2019-02-21T10:30:55+05:30

DEHRADUN: आगामी लोकसभा इलेक्टशन को देखते हुए दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की ओर से कराए जा रहे राजनी- टी डिवेट का हिस्सा बन रहे मिलेनियल्स की भावी सरकार से बहुत कुछ अपेक्षाएं हैं। आतंकवाद, भ्रष्टाचार, पलायन, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सुरक्षा, रोजगार जैसे मुद्दों पर यूथ बेबाक अपनी बात प्रमुखता से सामने रख रहे हैं। यूथ का मानना है कि सरकार के मैनिफेस्टों में ये मुद्दे इलेक्शन के वक्त शामिल रहते हैं, लेकिन सत्ता हासिल करने के बाद जिंदाबाद- मुर्दाबाद के नारों के बीच गायब हो जाते हैं। 2019 के लोकसभा इलेक्शन में उसी पार्टी को वोट दिया जाएगा, जो चुनाव से पहले करप्शन का खात्मा कर आम जनता की समस्या के सॉल्व करने के लिए रूट मैप तैयार करेगा.

धारा 370 हटाए सरकार
बुधवार को रिंग रोड स्थित पर्ल होटल में मिलेनियल्स ने टेररिस्ट से लोहा लेते हुए शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी और सरकार को कोसते हुए कहा कि देश की सभी राजनीतिक पार्टियां साथ हैं। इस समय जम्मू- कश्मीर से धारा 370 को हटाया जा सकता है। जब सभी सुविधाएं खत्म हो जाएंगी, तभी देश में टेररिज्म समाप्त हो सकता है। सरकार को इस वक्त कड़े कदम उठाने चाहिए। यह सोच- विचार करने का समय नहीं है। इससे देशवासियों का मनोबल टूट रहा है। इस समय कश्मीर घाटी में इमरजेंसी जैसे हालात है। टेररिस्ट वहां की जनता में भी दहशत फैला रहे है.

प्राइवेट सेक्टर पर कसें शिकंजा
प्रदेश में चल रहे प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स और हॉस्पिटल्स से आम जनता परेशान हैं। प्राइवेट स्कूल्स की मनमानी से परेंट्स डिप्रेशन में हैं और प्राइवेट हॉस्पिटल्स में बीमारी का इलाज करने वाले तिमारदार लुट रहे हैं। सरकार को मजबूत एक्ट लाना चाहिए। जिससे प्राइवेट इंस्टीट्यूशंस और हॉस्पिटल्स पर शिकंजा कसा जा सके। इस बार का वोट उसी पार्टी को मिलेगा जो इन बातों को ध्यान में रखेगा और आश्वासन के बजाय जमीन पर उतरकर काम करेगा.

पलायन सबसे बड़ा मुद्दा
राज्य बनने के बाद पहाड़ों से तेजी से पलायन हुआ है। पहाड़ का युवा 12वीं पास कर शहर में पढ़ने आ रहा है। जनगणना के आंकडे़ चौंका रहे हैं कि 50 परसेंट पहाड़ खाली हो चुका है। पहाड़ में हेल्थ, ट्रांसपोर्ट, इलेक्ट्रिसिटी, वाटर, एजुकेशन जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। युवा शहर के होटलों में दस हजार की नौकरी करने को मजबूर है। लोकसभा इलेक्शन में जो नेता पहाड़ में स्वरोजगार देने की बात करेगा, उसी को यूथ स्पोर्ट करेगा.
सिटी से पहले पब्लिक हो स्मार्ट
सरकार की ओर से दून को स्मार्ट सिटी बनाने की पहल की जा रही है, लेकिन यहां पहले यहां की पब्लिक को स्मार्ट होना पड़ेगा। प्रजेंट टाइम में सिटी की हालात बहुत खराब है। शहर में कूड़े के अंबार लगे हुए हैं। नगर निगम की ओर से शहर के कूड़ा निस्तारण के लिए बनाए गए शीशमबाड़ा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में कूड़ा बढ़ता जा रहा है। कूड़े का निस्तारण नहीं किया जा रहा। पहले निगम के पास 100 वार्ड हैं। सड़क पर लगाए गए डस्टबिन की स्थिति खराब है। आखिर सरकार से पूछना चाहते हैं कि आप शहर को कैसे स्मार्ट बनाएंगे, जब आप खुद स्मार्ट नहीं है.
कड़क मुद्दा
आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों का बदला लेने के लिए सरकार को किसी वक्त का इंतजार नहीं करना चाहिए। सभी पार्टियां सरकार के साथ है। उत्तराखंड सैन्य बाहुल्य प्रदेश है। यदि इसी तरह जवान शहीद होते रहेंगे, तो प्रदेशवासियों का मनोबल टूटेगा। इस समय 370 आसानी से हटाया जा सकता है.

 

 

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हेमा पुरोहित
प्रदेश अध्यक्ष, महिला कांग्रेस सेवा दल
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मेरी बात
सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा दे रही है, लेकिन बेटियों सुरक्षित नहीं हैं। बीते साल श्रीनगर गढ़वाल और उत्तरकाशी में हुई घटना दिल दहलाने वाली थी। नाबालिग भी इन घटनाओं में शामिल हो रहे हैं। सरकार को बालिग और नाबालिग की सजा में कोई रियायत नहीं करना चाहिए.
आरुषि , स्टूडेंट
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2वीं के बाद प्रोफेशनल कोर्स करना आसान नहीं है। प्राइवेट इंस्टीट्यूट की ओर से फीस इतनी महंगी रखी है कि गरीब व्यक्ति अपने बच्चों को कोर्स कराने में असमर्थ है। सरकार को प्राइवेट इंस्टीट्यूट की मनमानी पर रोक लगाने के लिए मजबूत एक्ट लाना चाहिए। जिससे गरीब का बच्चा भी पढ़ सके.
दीक्षा, स्टूडेंट
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लोकसभा इलेक्शन में वही नेता वोट का हकदार होगा, जिसने धरातल पर काम किया होगा। यूथ को लॉलीपॉप देना आसान नहीं है। सरकार चुनाव के वक्त बड़े- बड़े दावे करती है, लेकिन सत्ता पर आसीन होते ही वादे भूल जाती है। आगामी चुनाव रोचक होगा और यूथ अपना वोट व्यर्थ नहीं जाने देगा.
तुषार पाल, समाज सेवी
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- पहाड़ों से तेजी से हो रहा पलायन गंभीर मुद्दा है। सरकार पहाड़ों के लिए कोई ऐसा रूटमैप तैयार नहीं कर पाई, जिससे की पलायन रोका जा सके। पहाड़ों में हेल्थ, एजुकेशन, इम्पलॉयमेंट का संकट पैदा हो रहा है। इस बार का वोट उसी नेता को जाएगा। जो पहाड़ के दुख दर्ज को समझेगा.
राकेश पुरोहित, समाज सेवी
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सरकारी की ओर से आम लोगों के लिए योजनाएं तैयार की जाती हैं, लेकिन उसका लाभ कुछ ही लोगों को मिल पाता है, राज्य सरकार ने अटल आयुष्मान योजना लागू की, लेकिन लोगों के गोल्डन कार्ड नहीं बन पा रहे। जिनका बना हुए है उनको प्राइवेट अस्पताल स्वीकर नहीं कर रहे.
राहुल, समाज सेवी
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सरकार को ज्यादा से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा करने के प्रयास करने चाहिए। इसका सख्त अभाव है। सत्ता में आने से पहले बीजेपी में हर साल 2 करोड़ रोजगार देने की बात कही थी, ऐसा नहीं हुआ। वैकेंसी निकलती ही नहीं हैं और निकलती भी हैं तो कैंसिल हो जाती हैं। इससे युवाओं में हताश है.
आशिष सती, होटल मैनेजर
- प्रदेश में स्वास्थ्य सेवा का बुरा हाल है। सरकारी सिस्टम की खामियों के चलते प्राइवेट हॉस्पिटल्स ने खुली लूट मचा रखी है। जब किसी व्यक्ति की इलाज के दौरान डेथ हो जाती है, तो प्राइवेट हॉस्पिटल की ओर से उनके परिजनों से मोटी रकम वसूली जाती है। निजी हॉस्पिटल्स की मनमानी के खिलाफ मजबूत एक्ट लाना चाहिए.
अंकित सेमवाल, समाज सेवी
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प्रदेश में करप्शन चरम पर है। चुनाव में करप्शन को खत्म करना नेताओं का पहला उद्देश्य होना चाहिए, लेकिन कुर्सी पर बैठने के बाद वह भ्रष्टाचार में लिप्त हो जाता है। आगामी चुनाव में ऐसे प्रतिनिधि को वोट दिया जाएगा, जो आम जनता के लिए जमीन पर काम करेगा और सरकारी दफ्तरों में करप्शन को खत्म करेगा.
नवीन कंडारी, समाज सेवी

 

inextlive from Dehradun News Desk


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