MillennialsSpeak गवर्नमेंट में है झाम तो प्राइवेट सेक्टर में करें नौकरी का इंतजाम

2019-03-25T09:48:39+05:30

बेरोजगारी का मुद्दा तो हर बार उठता है लेकिन लोगों को मिलता कुछ नहीं है

allahabad@inext.co.in
PRAYAGRAJ : बेरोजगारी का मुद्दा तो हर बार उठता है, लेकिन लोगों को मिलता कुछ नहीं है. कॉम्पटीटिव एग्जाम को छोड़ दिया जाए तो यूपी-बिहार के ब्रिलिएंट स्टूडेंट्स अपने शहरों को छोड़कर बेंगलुरु, दिल्ली, नोएडा, मुंबई, पुणे आदि बड़े महानगरों की ओर चले जाते हैं. वजह, यूपी में इस तरह की कोई यूनिवर्सिटी नहीं है, हब नहीं है, कॉल सेंटर नहीं है जहां से ब्रिलिएंट स्टूडेंट्स पढ़ाई कर सकें. कुछ दिन पहले यूपी में इंटरनेशनल समिट का आयोजन किया गया. इसमें दुनिया के कई देशों के उद्योगपति आए, जिसका असर यूपी में दिखना चाहिए. यहां पर इंडस्ट्री आनी चाहिए. ताकि यहां के लोग यहां ही रह जाएं. गवर्नमेंट सेक्टर में अगर नौकरी सरकार नहीं दे पा रही है, तो ऐसी व्यवस्था करें कि प्राइवेट सेक्टर में अधिक से अधिक नौकरी जेनरेट हो. इंडस्ट्री आने से कई फायदे होंगे.

योजनाओं का हो सही इम्प्लीमेंटेशन
इस मौके पर कामेश दुबे ने कहा कि गवर्नमेंट योजनाएं तो बनाती है, लेकिन उसका सही तरीके से इम्प्लीमेंटेशन नहीं हो पाता है. योजनाओं को लागू कराना और अंतिम व्यक्ति तक उसका लाभ पहुंचाना भी सरकार की ही जिम्मेदारी है. आयुष्मान भारत का कार्ड गरीबों को नहीं मिल पा रहा है. जो असली जरूरतमंद है, उसे तो योजना की जानकारी नहीं है. एफएम पर मैसेज आता है कि 14555 पर जाकर रजिस्ट्रेशन करा सकते है. आंगनबाड़ी की जिम्मेदारी है कि वह लोगों का आयुष्मान भारत कार्ड बनवाएं. जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल करने का तरीका बताएं, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं है. जरूरतमंदों को तो इसकी जानकारी ही नहीं है. उन्होंने बताया कि उनके ड्राइवर की पत्नी की तबियत खराब हो गई थी. उसे आयुष्मान भारत की जानकारी नहीं थी. उसका कार्ड बनवा कर एसआरएन में इलाज करवाया गया. करीब पांच लाख रुपए तक का इलाज उसने करवाया.

आलोचना से बेहतर है सुधार
किसी भी सिस्टम की आलोचना करना आसान है, लेकिन अगर सिस्टम बेहतर है तो उसकी भी चर्चा करनी चाहिए. डिजिटल इंडिया भी कुछ ऐसा ही है. डायरेक्ट और इनडायरेक्ट दोनों रूप में डिजिटल इंडिया ने आज नौकरी दी है. ऑनलाइन शॉपिंग और मार्केटिंग आज डिजिटल इंडिया के जरिए बढ़ी है. उसका फायदा कहीं न कहीं लोगों को ही मिल रहा है. हर हाथ में मोबाइल तो पहले भी था. लेकिन अब इंटरनेट का इस्तेमाल कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है. जिससे सरकारी अधिकारी व कर्मचारी डरते भी हैं.

कड़क मुद्दा
वैकेंसियों के रुकने का सिलसिला आखिर कब बंद होगा? गवर्नमेंट युवाओं को नौकरी देने के लिए भर्ती निकालती है, लेकिन भर्ती प्रक्रिया अंजाम तक नहीं पहुंच पाती है. भर्तियों पर ही रोक लग जाती है. हाईकोर्ट में भर्ती, पुलिस में भर्ती पर लगी रोक हटनी चाहिए. वैकेंसी निकालकर भर्ती शुरू करनी चाहिए. पता चला एक वैकेंसी आई और तीन-चार साल तक लटकी हुई है.

मेरी बात-
एक बात जरूर है कि इस बार देश की सुरक्षा का मुद्दा सबसे बड़ा मुद्दा है. क्योंकि जिस तरह से आतंकवाद को शह देने वाला पाकिस्तान भारत की ओर सिर उठा रहा है, उसे जवाब देने के लिए देश की सुरक्षा को मजबूत करना जरूरी है. हर मुद्दे पर समझौता हो सकता है, लेकिन देश की सुरक्षा के मुद्दे पर समझौते का तो सवाल ही नहीं उठता है.
-प्रवेश दुबे

देश में जातिगत आरक्षण तो होना ही नहीं चाहिए. आर्थिक आरक्षण ही एक बेहतर विकल्प है. क्योंकि जातिगत आरक्षण में कई जरूरतमंद और होनहार छात्र पीछे रह जाते हैं. वहीं क्रीमीलेयर के लोग फायदा उठा ले जाते हैं. इससे जरूरतमंदों का काफी ज्यादा नुकसान होता है.

कॉलिंग
लाइसेंस बना है. प्रॉपर वे में टैक्स जमा किया जाता है. उसके बाद भी कभी फूड डिपार्टमेंट तो कभी सेल्स टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा व्यापारियों को परेशान किया जाता है. इस पर रोक लगनी चाहिए.
- विजय कुमार पटेल

फुटपाथ का भी व्यापारी चैन से दो वक्त की रोटी का जुगाड़ नहीं कर पा रहा है. क्योंकि उसकी कमाई का बड़ा हिस्सा पुलिस, नगर निगम व अन्य विभागों के अधिकारियों के पास चला जाता है.
- आकाश प्रसाद

धारा 370 पर सरकार को सख्त फैसला लेना चाहिए. 370 को खत्म करना चाहिए. क्योंकि देश के अन्य राज्यों की तरह कश्मीर भी इस देश का ही हिस्सा है तो फिर वहां अलग नियम क्यों?
- जीतेश कुमार दुबे, जीतू

सोशल मीडिया पर पाबंदी के लिए सख्त साइबर लॉ लागू होना चाहिए. पक्ष हो या फिर विपक्ष किसी को भी संवैधानिक व उच्च पदों पर विराजमान नेता या फिर अधिकारी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
- कामेश दुबे

जीएसटी और नोटबंदी का लोकसभा चुनाव में कोई असर नहीं दिखेगा. अगर असर दिखना होता तो विधानसभा चुनाव में ही असर दिखता. क्योंकि नोटबंदी और जीएसटी देश हित में लिया गया फैसला था.
- अभिनव

पेपर सॉल्वर और पेपर आउट करने वाले गैंग पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. जो लोग इसमें शामिल हैं, उनके खिलाफ भी सख्त कदम उठाना चाहिए. चाहे वह कोई अधिकारी हो या कर्मचारी.
- कौशलेंद्र

मोदी सरकार ने पांच साल में एक करोड़ से अधिक बेरोजगारों को नौकरी देने का वादा किया था, जो आज तक पूरा नहीं हो सका है. बेरोजगारी आज सबसे बड़ा मुद्दा है.
- प्रवेश दुबे

सिटी में ही यूथ को नौकरी के अच्छे अवसर मिलने चाहिए. अगर सिटी को डेवलप किया जाए तो मल्टीनेशनल कंपनियां हमारे शहर की ओर भी अट्रैक्ट होंगी. इससे यूथ को शहर से बाहर जाने से रोका जा सकेगा.
- अलंकार दुबे

सिर्फ किसी नेता के लुभावने वादों पर डिपेंड नहीं होना चाहिए. जरूरत है अपना दिमाग लगाने की. हम प्रत्याशी का बैकग्राउंड पता करने के बाद उसे चुन सकते हैं. न जाने कितने गुंडे बदमाश आज नेता बने बैठे हैं.
- सत्यम कुमार

हमारी कंट्री में आज भी लोगों में सिविक सेंस की कमी है. जिन चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस नहीं होती, वहां तो सारा दिन लोगों का जाम में ही फंसे हुए निकल जाता है. वहीं ट्रैफिक लाइट्स भी ज्यादातर खराब ही पड़ी रहती है.
- तुषार श्रीवास्तव

भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए गवर्नमेंट को काम करना चाहिए. कई बार ऊपर बैठे लोग ईमानदारी दिखाते हैं, लेकिन नीचे बैठे लोग करप्शन से बाज नहीं आते हैं.
- मो. फैज

युवा को बेरोजगारी भत्ता नहीं चाहिए. यूथ को जॉब चाहिए. मनरेगा जैसी योजनाओं ने सिर्फ अधिकारियों की जेबें भरी है. न जाने कितने फर्जी जॉब कार्ड बनवा कर खेल किया गया. ऐसी योजनाओं की निगरानी की जरूरत है.
- अजीत


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