बच्चे रहे पुकार घर जाना है सरकार बाल कल्याण सुनने को नहीं तैयार

2019-03-12T06:00:14+05:30

छह महीने पहले लापता बच्चों को घर भेजने में बाल कल्याण विभाग कर रहा आनाकानी, तीन पत्र मिलने के बावजूद डिप्टी सीपीओ नहीं की कोई पहल

- छह माह पहले कुछ समय के लिए आए थे शेल्टर होम, एड्रेस ट्रेस होने के बाद भी नहीं भेजे गए घर

बरेली : अपने परिवारों से बिछड़े सात बच्चों की होली इस बार बेरंग होने वाली है। शहर के अनाथालय में छह महीने से रह रहे इन बच्चों की काउंसिलिंग के दौरान इनका एड्रेस भी पता चल चुका है। इसके बावजूद महिला एवं बाल कल्याण विभाग के अफसरों की लापरवाही के चलते ये बच्चे शेल्टर होम में अपना जीवन अनाथों की तरह गुजारने को मजबूर हैं। शेल्टर होम प्रबंधन बच्चों को उनके घर पहुंचाने के लिए विभाग को तीन बार पत्र भी लिख चुका है, लेकिन अफसरों ने इस पर कोई कदम नहीं उठाया। ये बच्चे बरेली और जिले की तहसील क्षेत्र के हैं.

हो चुका है होम ट्रेस

आर्य समाज श्ेाल्टर होम में इस समय 23 बच्चे रह रहे हैं। इनमें से सात बच्चे चाइल्ड लाइन ने शेल्टर होम में रखवाए थे। इनमें चार लड़कियां और तीन लड़के हैं, जिनकी उम्र 8 से 12 साल के बीच है। इनमें से कुछ नाराज होकर घर से भाग गए थे, जबकि कुछ अपने माता- पिता से बिछड़ गए थे। चाइल्ड लाइन ने जब इन सभी बच्चों की काउंसलिंग की तो उन्होंने अपना नाम और एड्रेस भी बता दिया। इसमें से कई बच्चों के परिजनों को इसकी सूचना भी दे दी गई है। इसके बाद भी वह अपने बच्चों को अपने साथ नहीं ले जा सकते, क्योंकि अब तक सरकारी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। ऐसे में बच्चे मजबूरन शेल्टर होम में रहने को मजबूर हैं.

तीसरा पत्र 7 मार्च को भेजा

आर्य समाज शेल्टर होम प्रमुख बच्चों को घर भिजवाने के लिए अब तक तीन पत्र डिप्टी सीपीओ को भेज चुक ा है। तीसरा पत्र सात मार्च को भेजा गया था। इससे पहले 4 जनवरी और 18 दिसम्बर 2018 को पत्र लिखा था। इसमें संस्था के प्रधान ने साफ शब्दों में लिखा था कि संस्था पूर्ण रूप से दान पर आधारित है। ऐसे में अतिरिक्त बच्चों पर होने वाले खर्च की अलग से व्यवस्था करनी होती है। इसीलिए शीघ्र ही इन सात बच्चों को उनके घर पहुंचाने का प्रबंध किया जाए.

यह है बच्चों को सौंपने की प्रक्रिया

जब कोई बच्चा डिस्ट्रिक्ट से दूसरी डिस्ट्रिक्ट में भेजना होता है तो सबसे पहले उसका होम ट्रेस किया जाता है। होम ट्रेस होने के बाद जिस डिस्ट्रिक्ट का बच्चा होता है वहां की सीडब्ल्यूसी के पास भेजा जाता है। फिर वहां से सीडब्ल्यूसी चाइल्ड लाइन की मदद से उस बच्चे के माता पिता की इंक्वायरी कर सीडब्ल्यूसी के सामने पेश करमी है। फिर बच्चे को सुपुर्द कर दिया जाता है। लेकिन जब कोई मां- बाप डायरेक्ट अपने बच्चे को दूसरी डिस्ट्रिक्ट से लेना चाहता है तो भी उसे अपने डिस्ट्रिक्ट की सीडब्ल्यूसी के माध्यम से ही दिया जाता है.

इन डेट में आए थे बच्चे

- 12 वर्षीय बच्ची, 27 जून 2018

- 12 वर्षीय बच्चा, 8 अगस्त 2018

- 8 वर्षीय बच्ची 22 अक्टूबर 2018

- 10 वर्षीय बच्ची 22 अक्टूबर 2018

- 8 वर्षीय बच्चा 22 अक्टूबर 2010

- 10 वर्षीय बच्ची 22 नवम्बर 2018

- 8 वर्षीय बच्चा 20 दिसम्बर 2018

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अनाथालय में रहने वाले बच्चों को घर क्यों नहीं भेजा गया अभी इस बारे में कुछ कह नहीं सकती। सीडब्ल्यूसी से संपर्क कर ही पूरी जानकारी बता पाऊंगी.

नीता अहिरवार, डिप्टी सीपीओ

inextlive from Bareilly News Desk


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