दबाव में शहाबुद्दीन को लूट की छूट

2016-09-11T07:40:08+05:30

-विधायक अनंत सिंह को बेल के बाद भी जेल में रखने के लिए लगाया सीसीए

PATNA: जेल से निकलते ही आरजेडी लीडर शहाबुद्दीन ने नीतीश को परिस्थितिवश सीएम बताकर बिहार समेत पूरे देश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। इतना ही नहीं, शहाबुद्दीन ने कहा कि नीतीश महागठबंधन के नेता हैं, नीतीश को मैं अपना नेता नहीं मानता। मेरे नेता सिर्फ लालू प्रसाद हैं। शहाबुद्दीन के इस बयान से देश के राजनीतिक गलियारे में भूचाल आ गया है। इसके बाद आरजेडी के वरिष्ठ नेता डॉ। रघुवंश प्रसाद सिंह भी हमलावर हो गए और नीतीश को बिन ताकत का नेता करार दे दिया। उन्होंने कहा कि सबने चुना इसलिए नीतीश नेता हैं। यूपी, झारखंड और हरियाणा में नीतीश की हवा निकल गई। वहीं महागठबंधन के नीचे दब रहे सीएम नीतीश बस इतना कह पा रहे हैं कि मेरे लिए ये बातें महत्वहीन है। इसपर क्या प्रतिक्रिया दी जाए। सवाल यह है कि शहाबुद्दीन जैसे बाहुबली की बातें जब सीएम के लिए महत्वहीन है तो बिहार के उन पीडि़त लोगों की कौन सुध ले जिनकी मांगें उजड़ गई और घर बर्बाद हो गए।

रॉबिनहुड, बाहुबली या दबंग

जेल से बाहर निकलते ही शहाबुद्दीन के बारे में चर्चाएं होने लगी है। कम उम्र में पॉलिटिक्स में आए शहाबुद्दीन के कुछ समर्थक उन्हें रॉबिनहुड मानते हैं तो दूसरे बाहुबली और दबंग। शहाबुद्दीन के लोकल नेता से दुनिया की चर्चित बाहुबली बनने की कहानी एक थप्पड़ से शुरू होती है। उसके रसूख का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह जेल में दरबार लगाते थे। सीवान जेल में सारी सुविधाएं मिली थीं। मार्च ख्0क्म् में बिहार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री अब्दुल गफूर आरजेडी के एक एमएलए संग सीवान जेल में शहाबुद्दीन की चौखट चुमने पहुंचे थे। जिसका फोटो वायरल होने पर काफी विवाद हुआ था। इसके बाद शहाबुद्दीन भागलपुर जेल भेजा गया था। हाईकोर्ट से जमानत मिलते ही शहाबुद्दीन के पैतृक गांव प्रतापपुर में लोग पटाखे फोड़ रहे हैं। लंबे अरसे के बाद साहेब के स्वागत में पूरा गांव जुटा है। ग्रामीण मानते हैं कि साहेब सिवान में पहली मीटिंग गांव में अपने लोगों के बीच करेंगे।

बेगम बोली ख्00फ् से कर रहे इंतजार

मो। शहाबुद्दीन की बेगम हिना शहाब बताती हैं कि ख्00फ् से ही इंतजार कर रहे हैं कि घर कब आएंगे? ऊपर वाले के घर देर है, अंधेर नहीं। ऊपर वाले पर भरोसा था न्याय होगा ही। सच्चाई एक-न-एक दिन सामने आ जाती है। आखिरकार जेल से बाहर आने की खुशी है। हिना बताती हैं कि अगस्त ख्00फ् को प्रतापपुर कांड में कोर्ट में हाजिर हुए थे। ख्00भ् में जमानत मिलने पर घर नहीं आए। जिलाबदर कर दिया गया। फॉल्स बिजली बिल के आरोप में ख्00भ् में दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। तबसे उनके आने का इंतजार है। वहीं खुशी उनके पिता एसएम हसिबुल्लाह के चेहरे पर साफ झलक रही है। पूछने पर बताते हैं कि बेटा के साथे बकरीद मनाएम।

भगवान ही मालिक, नहीं जाएंगे सुप्रीम कोर्ट

दोहरे अपहरण और तेजाब हत्याकांड के गवाह राजीव रौशन की हत्या मामले में शहाबुद्दीन की जमानत के बाद रिहाई पर पीडि़त पक्ष ने दु:ख जताया है। तेजाब कांड के शिकार गिरीशराज, सतीश राज और गवाह राजीव रौशन के मां-पिता ने हाई कोर्ट के फैसले को अन्यायपूर्ण फैसला बताया है। पिता चंदा बाबू ने कहा कि शहाबुद्दीन को तेजाब कांड में ही फांसी की सजा मिलनी चाहिए थी लेकिन उम्र कैद मिलने के बाद भी हाईकोर्ट ने बेल दे दिया। उन्हें राजीव रौशन हत्याकांड में पहले से अनुमान था कि हाई कोर्ट जमानत दे देगी।

चंदा बाबू ने कहा कि बिहार में शहाबुद्दीन की ही सरकार है ऐसे में न्याय मिलने की उम्मीद नहीं थी। वहीं आर्थिक कमजोरी और बुढापे की बात कह हाईकोर्ट के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट जाने से इनकार करते हुए सिर्फ ईश्वर पर भरोसा कर रहे हैं।

लालू के दबाव में शहाबुद्दीन को लूट की छूट

एक्स एमपी शहाबुद्दीन की रिहाई से यह साफ हो गया है कि नीतीश सरकार लालू यादव के दबाव में काम कर रही है। सरकार के इशारे पर हाईकोर्ट में ठीक से पैरवी नहीं की गई, जिस कारण जमानत मिली। सिवान के एमपी ओमप्रकाश यादव ने ये बातें कही। उन्होंने कहा कि एमएलए अनंत सिंह को सभी मामलों में जमानत मिलने के बाद भी जेल में रखने के लिए सीसीए लगवा दिया। इससे साफ है कि नीतीश सरकार ने शहाबुद्दीन को लूट की खूली छूट लालू के दबाव में दे दी है। एमपी यादव ने कहा कि रघुनाथपुर के एमएलए हरिशंकर यादव शहाबुद्दीन को भगवान मान रहे हैं। यह बात उनके लिए सही हो सकती है, लेकिन जिन मां-बहनों की मांग सूनी हुई उनके लिए तो शैतान ही होंगे।

शहाबुद्दीन की रिहाई नीतीश और लालू की रणनीति है। जानबूझकर ट्रायल नहीं चलाया गया ताकि कोर्ट से सहायता मिल सके। सुमो ने कहा कि जबतक बिहार में एनडीए शासन में रहा, शहाबुद्दीन बाहर नहीं निकल पाए। नीतीश और लालू के साथ आते ही बिहार फिर से पुराने दौर में जाने लगा है।

-सुशील मोदी, बीजेपी लीडर

शहाबुद्दीन की रिहाई से शांति-व्यवस्था कठघरे में आ गया है। साबित हो गया कि सरकार राज्य को अपराधियों के रहमोकरम पर छोड़ना चाहती है। पार्टी यह होने नहीं देगी। क्ब् सितंबर को सभी जिला मुख्यालयों पर धरना देकर पार्टी विरोध करेगी।

-मंगल पांडेय, प्रदेश अध्यक्ष, बीजेपी

राजधानी पटना में बढ़ते अपराध और शहाबुद्दीन की रिहाई गुंडाराज की वापसी है। नीतीश सरकार पूरी तरह फेल है। अपराधियों का मनोबल बढ़ा है।

-रामकृपाल यादव, केंद्रीय मंत्री

मो.शहाबुद्दीन की रिहाई के बाद जंगलराज की वापसी न हो इसकी जवाबदेही नीतीश सरकार की होगी। जो परिवार बर्बाद हुए हैं, जिन्होंने गवाही दी है या जो केस लड़ रहे हैं उनकी सुरक्षा हो। नीतीश से पूरे बिहार को अपेक्षाएं हैं। उन्हें सुनिश्चित करना चाहिए कि जंगलराज की वापसी न हो।

-रविशंकर प्रसाद, केंद्रीय कानून मंत्री

बदल सकती है परिस्थितियां

शहाबुद्दीन की रिहाई के बाद बिहार में राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियां बदल सकती है। एक तरफ दबाव झेल रहे नीतीश कुमार बीजेपी से हाथ मिला सकते हैं वहीं आरजेडी से सीएम भी बन सकता है। रिहाई के दिन ही राजधानी पटना में स्टूडेंट की मर्डर से यह साफ है कि अपराधियों के हौसले बुलंद है।

inextlive from Patna News Desk


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