धरती का एक दिन पहले सिर्फ 18 घंटे का था अब 24 का हो गया है यह कारस्तानी अपने चांद की है?

2018-06-06T04:40:58+05:30

वैज्ञानिकों ने बताया है कि हमारी धरती का हर एक दिन लगातार लंबा होता जा रहा है। सालों पहले यही दिन सिर्फ 18 घंटे का था जो अब 24 घंटे का हो चुका है। इसके पीछे है चांद और हमारी धरती की एक रोचक कहानी।

धरती से हर साल दूर होता जा रहा है चांद

कानपुर। यह बात सुनकर बहुत सारे लोग चौंक जायेंगे कि धरती का हमारा एक दिन लगातार पहले से लंबा होता जा रहा है। इसकी वजह यह है कि हमारा चांद धरती से हर साल कुछ सेंटीमीटर दूर खिसकता जा रहा है। डेलीमेल की रिपोर्ट बता रही है कि कि हमारा चांद धरती से हर साल 3.82 सेंटीमीटर यानि करीब 1.5 इंच दूर होता जा रहा है। चांद जैसे जैसे धरती से दूर जा रहा है, धरती के प्रति उसका गुरुत्वाकर्षण खिंचाव भी कमजोर होता जा रहा है। इसका असर यह हुआ है कि हमारी धरती की अपने धुरी (Axis) पर घूमने की स्पीड भी धीरे-धीरे कम हो रही है। कुल मिलाकर यही कारण है कि धरती का हमारा दिन पहले से लंबा होता जा रहा है। इस संबंध में की गई एक नई स्‍टडी में वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है कि आज से करीब 1.4 अरब साल पहले धरती का 1 दिन (दिन-रात मिलाकर) सिर्फ 18 घंटे का हुआ करता था जो अब 24 घंटे या उससे ऊपर का हो चुका है।


सालों पहले धरती के बहुत नजदीक था चांद

तमाम वैज्ञानिक रिपोर्ट बताती हैं कि करोंड़ो साल पहले चांद धरती के काफी नजदीक था जिस कारण धरती का 1 दिन आज से काफी छोटा हुआ करता था। साल दर साल लगातार धरती से इसकी दूरी बढ़ने के कारण धरती के घूमने की स्पीड कम हो रही है और इस कारण धरती का दिन पहले से लंबा होता जा रहा है। स्‍काई न्‍यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, अमरीका की नेशनल साइंस एकेडमी की रेग्‍युलर बुकलेट में छपी इस लेटेस्‍ट रिसर्च के सह-लेखक प्रो मेयर ने बताया कि उनकी टीम ने चांद और धरती से के इस कनेक्‍शन को जांचने के लिए बहुत सारे कॉन्प्लेक्स स्टेटिक डाटा को एनालाइज किया है। जिसके द्वारा उन्हें अपने सोलर सिस्टम की हिस्ट्री और धरती के पुराने इतिहास के बारे में पता चला। उनके मुताबिक अंतरिक्ष में घूमने वाला हरेक प्लैनेट पूरे सोलर सिस्टम में मौजूद तमाम ग्रहों और दूसरी चीजों से प्रभावित होता है क्योंकि उन सबका गुरुत्वाकर्षण बल उस पर असर डालता है।


सालों पहले की घटनाओं का बिल्‍कुल सही टाइम बताना चाहते हैं वैज्ञानिक

स्‍काई न्‍यूज ने प्रो मेयर के हवाले से बताया है कि इस रिसर्च द्वारा वैज्ञानिक पुरातन काल में हुई तमाम बड़ी घटनाओं को लेकर धरती पर उस वक्‍त के समय का सही आकलन करना चाहते हैं। इसे Astrochronology कहा जाता है, जिसमें सदियों पुरानी घटनाओं के संबंध में भी समय की बिल्‍कुल सही गणना करना संभव होता है।

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