चुनाव के बाद पुतिन के ख़िलाफ़ प्रर्दशन

2011-12-06T12:25:00+05:30

रुस में चुनावों के बाद राजधानी मॉस्को में हज़ारों लोगों ने प्रधानमंत्री व्लादिमीर पुतिन के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की है

उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने रुस के संसदीय चुनावों में व्यापक धांधली की बात कही है। पुतिन के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों के दौरान हाथापाई की कुछ घटनाओं की भी ख़बर है और पुलिस का कहना था कि उन्होंने तीन सौ से ज़्यादा प्रर्दशनकारियों को गिरफ़्तार किया है।

यूरोपीय सुरक्षा और सहयोग संगठन (ओएससीई) का कहना है कि मतदान पुतिन की पार्टी, यूनाईटिड रशिया, के पक्ष में करवाया गया। वहीं राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने कहा कि चुनाव निष्पक्ष और लोकतांत्रिक थे। लेकिन व्हाइट हाउस के प्रवक्ता, जे कार्ने, ने इस बारे में 'गंभीर चिंता' जताई है।

प्रधानमंत्री पुतिन की पार्टी ने चुनाव तो जीता है लेकिन उनके समर्थन में काफ़ी कमी हुई है। यूनाईटिड रशिया पार्टी 77 सीटों पर हारी। चुनाव अधिकारियों का कहना था कि पार्टी को केवल 50 प्रतिशत वोट ही मिले जबकि 2007 के चुनाव में उसे 64 प्रतिशत वोट मिले थे।

पुतिन वर्ष 2000 से 2008 तक राष्ट्रपति थे लेकिन रूसी संविधान के तहत वो लगातार तीसरी बार चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकते थे। अब वे फिर से राष्ट्रपति बनना चाहते हैं। मार्च में रूस में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होंगे और संसदीय चुनाव को पुतिन की लोकप्रियता पर जनमतसंग्रह के तौर पर देखा जा रहा है।

सोमवार रात को केंद्रीय मॉस्को में पुतिन के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी करते हुए प्रदर्शनकारियों ने निष्पक्ष चुनावों की मांग की। माना जा रहा है कि मॉस्को में सत्ता के ख़िलाफ़ कई सालों में ये अब तक के सबसे बड़ा प्रर्दशन है।

रूस के दूसरे सबसे बड़े शहर, सेंट पीटर्सबर्ग, में अनाधिकृत तौर पर प्रर्दशन कर रहे लगभग सौ लोगों को पुलिस ने शहर के सबसे बड़े चौक, नेवस्की प्रॉस्पेक्ट, में हिरासत में लिया।

'गड़बड़ियां'

ओएससीई के वक्तव्य को पढ़ते हुए एक अधिकारी ने कहा कि वैसे तो चुनाव 'अच्छी तरह से आयोजित' किए गए थे लेकिन मतदान गणना प्रक्रिया में कई समस्याएं थीं।

पीटर एफ़थीम्यो ने कहा, "मतदान सत्तारूढ़ पार्टी के पक्ष में करवाए गए, चुनाव प्रशासन स्वतंत्र नहीं था, ज़्यादातर मीडिया पक्षपाती था और प्रशासन ने ज़रूरत से ज़्यादा चुनाव में दखलअंदाज़ी की."

एक और पर्यवेक्षक, हेडी टागल्याविनी का कहना था कि चुनाव निष्पक्ष नहीं थे क्योंकि कई विपक्षी दलों को चुनाव में हिस्सा नहीं लेने दिया गया।

ओएससीई की रिपोर्ट के आधार पर अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने चुनाव प्रक्रिया पर 'गंभीर चिंता' व्यक्त की। रूस के विपक्षी दलों ने भी चुनावी क़ानूनों के उल्लंघनों की शिक़ायत की है।

आरआईए समाचार एजेंसी के अनुसार कम्युनिस्ट पार्टी का कहना था कि वो इन 'पूरी तरह से अवैध नतीजों' को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रही है।


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