महत्वपूर्ण मामलों को जनसंवाद कर देता है बंद

2018-09-11T06:00:42+05:30

RANCHI: मुख्यमंत्री रघुवर दास राज्य की पीडि़त, शोषित जनता को न्याय दिलाने में फेल साबित हो रहे हैं। बगैर मुख्यमंत्री से एनओसी लिए जनसंवाद केंद्र कई महत्वपूर्ण मामलों को बंद कर दे रहा है। ऐसे में जनता जब सवाल जवाब करती है तो उन्हें धमकी भी दी जाती है। ऐसा आरोप जनसंवाद के ठेकेदार पर लगाया गया है। आम लोगों का कहना है कि वे मुख्यमंत्री से अपनी शिकायत करते हैं तो ठेकेदार द्वारा उस मामले को बंद कर दिया जाता है.

क्या है मामला

जनसंवाद के रवैये से परेशान हो कर समाजसेवी दर्श चौधरी ने 19 अगस्त को सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय के निदेशक रामलखन प्रसाद गुप्ता तथा जन संवाद के ठेकेदार संजय जैन के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाते हुए एफआईआर (शिकायत संख्या: 917802) दर्ज कराने का आवेदन एसएसपी अनीश गुप्ता के पास दिया था, जिसपर आज तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। जन संवाद के उक्त निदेशक एवं ठेकेदार पर विभिन्न माध्यमों से शोषण एवं प्रताडि़त करने, मौलिक अधिकारों का हनन करने, झूठे एवं बेबुनियादी आरोपों में फंसाने, मान- सम्मान को धूमिल कर आत्महत्या करने हेतु विवश करने का आरोप लगाया गया है.

सीएम के नाम संबोधित आवेदन बंद

मुख्यमंत्री के नाम संबोधित आवेदन के माध्यम से जन संवाद निदेशक एवं ठेकेदार की शिकायत जब मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र (परिवाद संख्या: 2018- 75352) में दर्ज कराई जाती है तो ठेका पर कार्यरत अधिकारी/कर्मी द्वारा बिना कार्रवाई के ही उसे बंद कर दिया जाता है। अब सोचने वाली बात है कि मुख्यमंत्री के नाम संबोधित आवेदन को ठेका अधिकारी/कर्मी कैसे बंद कर सकते हैं, क्या यह सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करना नहीं है। राज्य का कोई नागरिक अपने मुख्यमंत्री से न्याय मांगता है तो ठेका अधिकारी/कर्मी उसे न्याय देना तो दूर शिकायत को ही मुख्यमंत्री की अनुमति लिए बिना बंद कर देते हैं।

गृह मंत्रालय ने दिया है आदेश

जन संवाद के इसी मामले में गृह मंत्रालय (दिल्ली) की संयुक्त सचिव सहेली घोष राय ने राज्य के मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी को अग्रतर कार्रवाई करने का आदेश 05 सितंबर को दिया है। अब यह मामला कोर्ट में जा सकता है।

क्या कहते हैं पीडि़त

मैंने बिजली कनेक्शन के लिए अप्लाई किया था। कई वर्षो से बिजली नहीं आई। इस संबंध में जनसंवाद में बार- बार जाता रहा। लेकिन इस मामले में कोई सुनवाई नहीं हुई.

पवन कुमार उपाध्याय, जमशेदपुर

मेरे भाई रतन गोप की हत्या हुई थी। मैंने चार लोगों के विरुद्ध नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी। लेकिन, अबतक उस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। मेरे भाई की हत्या अक्टूबर 2015 में हुई थी। इस मामले में उसे कोई माकूल जवाब नहीं मिला और न ही जांच की गई.

देवानंद गोप, रांची

मैंने एक लड़की की लावारिस बॉडी को बरामद किया था। इस मामले में उसका पोस्टमार्टम रिपोर्ट अबतक नहीं मिला है। जब मैंने मुख्यमंत्री जनसंवाद में शिकायत की तो उनलोगों द्वारा मामले को दबा दिया गया। जब उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट मांगी तो इनकार कर दिया.

रोहित कुमार भारती, धनबाद

मेरे मकान के पीछे नाली का टेंडर हुआ था लेकिन नाली आज तक नहीं बनी। जब मैेंने जनसंवाद में इसकी शिकायत की तो वहां से कोई जवाब नहीं मिला। जब फोन किया गया तो कहा गया कि शिकायत बंद कर दी गई है.

रमेश कुमार झुनझुनवाला, दुमका

क्वोट

जनसंवाद में आया मामला ऐसे ही बंद नहीं हो सकता है। उस मामले की गंभीरता को देखा जाता है। ऐसे में यदि जनसंवाद में मामला बंद हो जाता है तो यह प्रोविजन है कि दोबारा 15 दिन पर उसे रि ओपेन करने के लिए फाइल किया जा सकता है.

सुनील वर्णवाल, प्रधान सचिव, मुख्यमंत्री सह जनसंवाद प्रभारी

inextlive from Ranchi News Desk


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