नेशनल वार मेमोरियल देश में और भी हैं वार मेमोरियल जानें इनसे जुड़ी बहादुरी की दास्तान

2019-02-25T14:05:55+05:30

देश की सुरक्षा में अपने जान की बाजी लगाने वाले जाबांज सैनिक के सम्मान में बने नेशनल वार मेमोरियल का आज पीएम मोदी दिल्ली में उद्‌घाटन करेंगे। शहीदों की शहादत और बहादुरी के किस्सों को बयां करने के लिए देश में ये वार मेमोरियल और वार सेमेट्री भी बने हैं। जानें इनके बारे में

कानपुर।  शहीदों की याद, सम्मान और उनकी बहादुरी के किस्से कहने के लिए देश में कई जगह वार मेमोरियल और वार सेमेट्री बने हैं।
वेलिंगटन वॉर मेमोरियल लैंडमार्क

कुन्नूर में वेलिंगटन वॉर मेमोरियल लैंडमार्क है। कुन्नूर के पास नीलगिरी में हमारी मातृ भूमि की रक्षाा में अपने प्राणों की आहुति देेने वाले जवानों की याद में वार मेमोरियल बना है। यह तस्वीर 24 मई 2013 की है।
द्रास वार मेमोरियल बना
कारगिल के युद्ध में शहीद सैनिकों की याद में द्रास में वार मेमोरियल बना है।  फुट के पहाड़ों से घिरे द्रास में बना ये स्मारक कारगिल युद्ध के शहीदों की शहादत की दास्तान को बयान करता है। यह तस्वीर 26 जुलाई, 2009 की है। जब ऑपरेशन विजय के 10 वें वर्ष पूरे होने पर द्रास वार मेमोरियल को सजाया गया था।
इंडिया गेट वार मेमोरियल
नई दिल्ली में वार मेमोरियल के रूप में इंडिया गेट है। इसका निर्माण पहले विश्व युद्ध में शहादत देने वाले भारतीय सैनिकों की याद में हुआ है। इसकी दीवारों पर हजारों शहीद सैनिकों के नाम खुदे हैं और इंडिया गेट के मेहराब के नीचे अमर जवान ज्योति है। यह हमेशा जलती रहती है। यह तस्वीर 13 सितंबर, 2015 की है।
डोगराई वार मेमोरियल
अमृतसर में डोगराई वार मेमोरियल बना है। यह जगह सबसे कठिन युद्ध स्थलों में गिनी जाती है। 22 सितंबर 1965 को भारतीय सैनिकों ने जीत प्राप्त की थी। यह तस्वीर 11 अक्टूबर, 2015 की है जब पीएम नरेंद्र मोदी ने डोगराई युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की थी।

ग्रेनेडियर्स रेजिमेंटल सेंटर

जबलपुर में ग्रेनेडियर्स रेजिमेंटल सेंटर भी शहीदों की शहादत को याद दिलाता है। इंडो-पाक युद्ध 1965 में ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट के जाबांजों ने पाकिस्तानी सैनिकों को धूल चटाई थी। यहां पर जीप पर एक तोप रखी है। यह तस्वीर 8 अगस्त, 2015 में जबलपुर में स्वर्ण जयंती समारोह की है। तस्वीर में परम वीर चक्र अवार्डी अब्दुल हमीद की विधवा रसूलन देवी अपने पोते व ब्रिगेडियर एसपी सिंह कमांडेंट के साथ।
कोहिमा वार सेमेट्री
कोहिमा वार की याद में कोहिमा वार सेमेट्री बना है। यहां पर  1944 में भारतीय सेना-आजाद हिन्द फौज एवं जापान की संयुक्त सेना के बीच जंग लड़ी गई थी। इस युद्ध में जापानी सेना मैदान छोड़ भागी थी। इस युद्ध को ब्रिटिश सेना ने अब तक की सबसे बड़ी लड़ाई डिक्लेयर किया था। यह 20 जून, 2013 की है।  

किरकी वार सेमेट्री
पुणे में किरकी वार सेमेट्री बना है। यहां पहले औद दूसरे विश्व युद्ध में शहीद हुए वीर सैनिकों को सामाधि दी गई है। यहां साल भर विदेशियों के आने-जाने का सिलसिला लगा रहता है। यह तस्वीर 11 अक्टूबर, 2013 की है जब ब्रिटेन के राजकुमार चार्ल्स और उनकी पत्नी कैमिला यहां आई थीं।

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