सदियों की यादों का कारवां है नौचंदी मेला सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक मेले का है अपना इतिहास

2019-05-22T10:39:29+05:30

सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक नौचंदी मेले का अपना विशिष्ट इतिहास है। मॉल कल्चर के आगे नई पीढ़ी में नौचंदी की चमक पड़ी फीकी

MEERUT: कई सदियां बीत गई कई पीढि़यां बदल गई। लेकिन नौचंदी मेले की कहानियां आज भी वैसे ही है जैसी पहले थीं, हां, आधुनिकता के दौर में काफी बदलाव हुआ है। मॉल कल्चर ने भले ही बदलाव की दस्तक दी हो, लेकिन सांप्रदायिक सौहार्द के संवाहक नौचंदी मेले की आज भी खास पहचान है। बताते हैं तकरीबन 347 साल से नौचंदी मेले का आयोजन चल रहा है। खास बात यह है कि नौचंदी मेले ने कई पीढि़यों को बड़ा होते देखा है। ऐसे में बुजुर्गो, वयस्कों और युवाओं ने अपने अनुभवों को साझा किया। ऐतिहासिक नौचंदी मेले का बीते दिनों धूमधाम तरीके से शुभारंभ हो गया। हालांकि, आज के दौर में भले ही बदलते मॉल कल्चर में मेले की ज्यादा उपयोगिता न बची हो, बावजूद इसके, शहर में आज भी नौचंदी मेले को लेकर शहरवासियों में खास उत्साह है। नौचंदी मेले की कुछ खासियत ही है जो हर उम्र के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है।

नौचंदी का एक लंबा सफर
नौचंदी मेले ने 347 साल का सफर तय कर लिया है। इस समयचक्र में कई बदलाव भी हुए। प्रशासन ने हर साल मेले को कुछ खास बनाने के लिए कई कवायद भी की। शहर की संस्कृति में नौचंदी मेले की अपनी विशिष्ट पहचान है।

हर साल करते थे इंतजार
नौचंदी मेले का क्रेज इस बात से समझ सकते हैं कि 80 वर्षीय शुकंतला देवी कहती हैं कि पहले हमारे समय में नौचंदी मेला जाने के लिए तांगे चलते थे। मोहल्ले की सभी महिलाएं एक दिन ही गुट बनाकर मेला देखने जाती थीं। बाजार से अलग इस हाट मेले की अलग रौनक होती थी। साल भर मेले का इंतजार करते थे। इसका अलग ही शौक था। झूले, चाट-पकौड़ी, देशभर की अलग-अलग चीजें सिर्फ मेले में ही मिलती थी। बाजार में न तो वैसा सामान मिलता था, न ही मेले जैसा एहसास होता था।

बचपन की कई यादें जुड़ी
40 वर्षीय सुनीता कहती हैं कि नौचंदी मेले से हमारे बचपन की कई यादें जुड़ी हैं। सब मिलकर जाते थे.तब वहां मिट्टी के खिलौने मिलते थे। आज की तरह तब बार-बार जाना नहीं होता था। पूरी प्लानिंग करके जाते थे। एक बार जो ले आएं सो ले आएंघर से हिदायत होती थी कि जो लेना है एक बार में ही ले लेना। हालांकि घर आकर एक-दूसरे के सामान देखकर लड़ाई भी होती थी। एक्सचेंज भी कई दिन तक चलता था।

मॉल के बावजूद, नौचंदी का क्रेज
मानसी कहती हैं कि हालांकि, अब तो अक्सर मॉल घूम लेते हैं जहां जरूरत की हर चीज भी मिल जाती है, लेकिन आज भी नौचंदी मेला घूमने का अलग ही क्रेज है। झूले, मौत का कुआं या जादूगर का शो देखने जरूर चले जाते हैं। हालांकि, बीते सालों में कुछ ऐसी घटनाएं हो गई थी, जिनसे लोग नौचंदी मेला जाने से डरते थे। साल भर में एक बार ये मेला लगता है ऐसे में एक बार तो घूम आते हैं।

50 साल पहले नौचंदी मेले की अलग रौनक थी। शहर के साथ साथ दूर दराज के गांव के लोग मेला देखने आते थे रात भर मेले में ही घूमते और रुकते थे। सुबह वापस जाते थे। तब लाइट के नाम पर अधिकतर दुकानों में लालटेन जला करती थी। शोर शराबा नही था, गंदगी नही थी, भीड़ थी लेकिन धक्कामुक्की या छेड़छाड नही थी। अब मेला पूरी तरह बदल गया है। मेले में हाथ से बनी चीजों की प्रदर्शनी अधिक लगती थी अब कंपनी मेड चीजें ही आ रही हैं। हलवा पराठा और सूरमा लेने लोग आया करते थे आज बहुत कम लोगो को पसंद है।

- सुल्तान अली

नौचंदी मैदान के पास में ही रहते हैं इसलिए बचपन से ही मेला देखते आए हैं। मेले की जो रौनक पहले थी वह अब नही है। मेले में तब दूर दराज से व्यापारी अपना सामान बेचने आते थे लोगों में भी क्रेज था कि जो कहीं नही मिलता वह मेले में मिल जाएगा। तब सर्कस, मौत का कुआं देखने दूर दराज गांव से लोग आते थे। एक एक माह पहले से सर्कस का प्रचार होता था। अब तो सर्कस भी बेकार हो गए हैं।

- जफर चौधरी

नौचंदी मेले में भीड़भाड़ के कारण अव्यवस्था और छेड़छाड़ की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं इस कारण से फैमिली के साथ जाने में भी अब सेफ नही लगता। खाने पीने की चीजों की क्वालिटी की जांच भी नही है ऐसे में खानापीना भी सेफ नही है। बाकी झूले और पटेल मंडप के कार्यक्रम में नयापन ना होने के कारण मेले का क्रेज अब कम हो गया है।

- शिवानी

दो साल पहले लाइव टेलीकास्ट
दो साल पहले नौचंदी मेले को हाईटेक बनाते हुए उसका वेबसाइट और लोकल चैनल के माध्यम से लाइव टेलीकास्ट भी किया गया था। यही नहीं, नौचंदी मेले को यू-ट्यूब पर अपलोड भी किया गया था।

परिसर में लगे थे 40 कैमरे
आशीष त्यागी ने बताया कि दो साल पहले नौचंदी मेले के हाईटेक प्रसारण के लिए उन्हें ठेका दिया गया था। इसके लिए नौचंदी मैदान परिसर में 40 परिसर संचालित किए गए थे। यही नहीं पटेल मंडप में भी होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लोगों ने देश दुनिया में बैठकर लाइव देखा था।

अबकी बार नहीं है व्यवस्था
जिला पंचायत अध्यक्ष कुलविंद सिंह ने बताया कि इस बार लाइव टेलीकास्ट की व्यवस्था नहीं की गई है, लेकिन सभी स्थानों पर सीसीटीवी जरूर लगेंगे।

सर्कस की चर्चा
जिला पंचायत अध्यक्ष कुलविंदर सिंह ने बताया कि उनकी कई सर्कस मालिकों से बात चल रही है। कई सर्कस मालिक जमीन भी देखकर गए है। कुछ ही दिनों में नौचंदी मेले में सर्कस भी आएगा। दरअसल, नौचंदी मेले में जिस खाली मैदान में पिछले 100 सालों से सर्कस लगता था। उसमें एक व्यक्ति ने अपना मालिकाना हक जताकर कब्जा कर लिया है। वह उसपर प्लाट भी काट रहा है। जिसमें अब विवाद चल रहा है। अब यह देखने वाली बात होगी कि यह सर्कस कहां पर लगेगी। चूंकि अब नौचंदी मेले में इतनी जगह नहीं है कि जहां पर सर्कस का विशाल पंडाल लगाया जाए।


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