मैं बदलाव में यकीन रखती हूं नेहा भसीन

2018-09-24T02:35:26+05:30

जग घूमिया स्वैग से स्वागत जैसे कई हिट गाने दे चुकीं नेहा भसीन जल्द ही एंड टीवी पर बच्चों के लाइव रियलिटी शो लव मी इंडिया में बतौर जज नजर आएंगी। उनसे बातचीत

मुंबई(ब्यूरो)। 'लव मी इंडिया' से जुड़ने से बचपन की कौन-सी यादें ताजा हुईं?  मैं जब बड़ी हुई, तब एमटीवी-वीटीवी का जमाना था। मैंने अंग्रेजी गाने बहुत सुने थे। माइकल जैक्सन की फैन थी और पॉप स्टार बनना चाहती थी। जब मैं 19 साल की हुई, तब एक शो 'पॉप स्टार्स' आया। उस शो में मेरा दिल्ली से चयन हुआ। वहां से मेरी जर्नी आरंभ हुई। थोड़े समय बाद पॉप संगीत का जोश देश में ठंडा पड़ गया। 2007 से मैंने हिंदी सिनेमा में शुरुआत की। फिर दोबारा पॉप गाना शुरू किया। इसीलिए बच्चों की जर्नी से खुद को रिलेट कर पाई हूं।  बचपन में बच्चों के सपनों का सपोर्ट कितना जरूरी मानती हैं..?  यह उम्र पर निर्भर करता है। मेरे पैरेंट्स ने मुझे गिटार, पियानो और डांस सीखने को प्रोत्साहित किया। आम तौर पर बच्चों के सपनों को हल्के में लिया जाता है। मैंने जब पॉप सिंगर बनने की बात कही थी तो पैरेंट्स ने गंभीरता से नहीं लिया था। बड़े होने पर भी यही बात कही, तो थोड़ा घबरा गए थे। मुझे 18 की उम्र में अकेले मुंबई भेजना आसान नहीं था। मेरा मानना है कि बच्चों पर दबाव नहीं डालना चाहिए। उन्हें वही करने देना चाहिए, जो वे करना चाहते हैं।  हमारे यहां रियलिटी शोज में ओरिजनैलिटी कम देखने को मिलती हैं?  हम बॉलीवुड से इतने प्रभावित है कि गजल, क्लासिकल और लोक संगीत को मौका देने का प्रयास नहीं करते। उसे बचाने की शुरुआत शोज से नहीं, नागरिकों से होनी चाहिए। गुरु रंधावा हमारे साथ जज पैनल में हैं। वह अपना संगीत खुद बनाते हैं। मैं भी अपना संगीत खुद करती हूं। मैं बॉलीवुड को कमतर नहीं दिखा रही। मेरा मानना है गैर फिल्मी गीत-संगीत को भी बढ़ावा देना होगा। यह सिर्फ रियलिटी शो से संभव नहीं होगा।  भविष्य की पीढ़ी से क्या उम्मीदें की जा सकती हैं?  आज तकनीक बहुत तेजी से बदल रही है। डिजिटल मीडियम बहुत विस्तार ले चुका है। हमारा शो आप लाइव देख सकते हैं। मेरे कई दोस्तों के पास केबल कनेक्शन नहीं है, वे एप पर प्रोग्राम देखते हैं। यू ट्यूब बड़े प्लेटफॉर्म के तौर पर उभरा है। अब लोग दूसरे सिंगर की तरह बनना चाहते हैं, जबकि उन्हें ओरिजनैलिटी पर फोकस करना चाहिए।  आप रियलिटी शो से बच्चों से संबंधित मुद्दे भी उठाना चाहेंगी?  मैं चाहे टीवी करूं, सोशल मीडिया या लाइव शो, मुझे जो सही लगता है, बोलती हूं। मैं क्रांतिकारी नहीं हूं, लड़ाई-झगड़े में विश्वास नहीं रखती, लेकिन बदलाव में यकीन रखती हूं। अगर उसका कोई मौका मिला तो अवश्य उठाऊंगी। मैंने अपने तौर-तरीकों से महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा दिया है। हमारे यहां बॉडी शेमिंग बहुत होती है, उसके खिलाफ आवाज उठाई है।  बच्चों को लाइव शो के लिए कैसे गाइड किया है?  शो में हम तीन जज के अलावा चार मेंटर हैं। उन्हें कैप्टेन का दर्जा दिया गया हैं। वे बच्चों को प्रशिक्षित करेंगे। बच्चों का परफारमेंस हमारे लिए भी सरप्राइज होगा। हमने भी उनका सिर्फ प्रोमो देखा है।  संगीत की दुनिया में पांच साल बाद सबसे बड़ा बदलाव क्या देखना चाहती हैं?  मैं नॉन फिल्मी संगीत को आगे बढ़ते हुए देखना चाहती हूं। मैं चाहती हूं कि उसे भी उतना मार्केट मिले, जितना फिल्मी संगीत को मिलता है। वह भारत में संगीत के परिदृश्य को बदल देगा।  स्मिता श्रीवास्तव 

 

मुंबई(ब्यूरो)। 'लव मी इंडिया' से जुड़ने से बचपन की कौन-सी यादें ताजा हुईं? 

मैं जब बड़ी हुई, तब एमटीवी-वीटीवी का जमाना था। मैंने अंग्रेजी गाने बहुत सुने थे। माइकल जैक्सन की फैन थी और पॉप स्टार बनना चाहती थी। जब मैं 19 साल की हुई, तब एक शो 'पॉप स्टार्स' आया। उस शो में मेरा दिल्ली से चयन हुआ। वहां से मेरी जर्नी आरंभ हुई। थोड़े समय बाद पॉप संगीत का जोश देश में ठंडा पड़ गया। 2007 से मैंने हिंदी सिनेमा में शुरुआत की। फिर दोबारा पॉप गाना शुरू किया। इसीलिए बच्चों की जर्नी से खुद को रिलेट कर पाई हूं। 

बचपन में बच्चों के सपनों का सपोर्ट कितना जरूरी मानती हैं..? 

यह उम्र पर निर्भर करता है। मेरे पैरेंट्स ने मुझे गिटार, पियानो और डांस सीखने को प्रोत्साहित किया। आम तौर पर बच्चों के सपनों को हल्के में लिया जाता है। मैंने जब पॉप सिंगर बनने की बात कही थी तो पैरेंट्स ने गंभीरता से नहीं लिया था। बड़े होने पर भी यही बात कही, तो थोड़ा घबरा गए थे। मुझे 18 की उम्र में अकेले मुंबई भेजना आसान नहीं था। मेरा मानना है कि बच्चों पर दबाव नहीं डालना चाहिए। उन्हें वही करने देना चाहिए, जो वे करना चाहते हैं। 

हमारे यहां रियलिटी शोज में ओरिजनैलिटी कम देखने को मिलती हैं? 

हम बॉलीवुड से इतने प्रभावित है कि गजल, क्लासिकल और लोक संगीत को मौका देने का प्रयास नहीं करते। उसे बचाने की शुरुआत शोज से नहीं, नागरिकों से होनी चाहिए। गुरु रंधावा हमारे साथ जज पैनल में हैं। वह अपना संगीत खुद बनाते हैं। मैं भी अपना संगीत खुद करती हूं। मैं बॉलीवुड को कमतर नहीं दिखा रही। मेरा मानना है गैर फिल्मी गीत-संगीत को भी बढ़ावा देना होगा। यह सिर्फ रियलिटी शो से संभव नहीं होगा। 

भविष्य की पीढ़ी से क्या उम्मीदें की जा सकती हैं? 

आज तकनीक बहुत तेजी से बदल रही है। डिजिटल मीडियम बहुत विस्तार ले चुका है। हमारा शो आप लाइव देख सकते हैं। मेरे कई दोस्तों के पास केबल कनेक्शन नहीं है, वे एप पर प्रोग्राम देखते हैं। यू ट्यूब बड़े प्लेटफॉर्म के तौर पर उभरा है। अब लोग दूसरे सिंगर की तरह बनना चाहते हैं, जबकि उन्हें ओरिजनैलिटी पर फोकस करना चाहिए। 

आप रियलिटी शो से बच्चों से संबंधित मुद्दे भी उठाना चाहेंगी? 

मैं चाहे टीवी करूं, सोशल मीडिया या लाइव शो, मुझे जो सही लगता है, बोलती हूं। मैं क्रांतिकारी नहीं हूं, लड़ाई-झगड़े में विश्वास नहीं रखती, लेकिन बदलाव में यकीन रखती हूं। अगर उसका कोई मौका मिला तो अवश्य उठाऊंगी। मैंने अपने तौर-तरीकों से महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा दिया है। हमारे यहां बॉडी शेमिंग बहुत होती है, उसके खिलाफ आवाज उठाई है। 

बच्चों को लाइव शो के लिए कैसे गाइड किया है? 

शो में हम तीन जज के अलावा चार मेंटर हैं। उन्हें कैप्टेन का दर्जा दिया गया हैं। वे बच्चों को प्रशिक्षित करेंगे। बच्चों का परफारमेंस हमारे लिए भी सरप्राइज होगा। हमने भी उनका सिर्फ प्रोमो देखा है। 

संगीत की दुनिया में पांच साल बाद सबसे बड़ा बदलाव क्या देखना चाहती हैं? 

मैं नॉन फिल्मी संगीत को आगे बढ़ते हुए देखना चाहती हूं। मैं चाहती हूं कि उसे भी उतना मार्केट मिले, जितना फिल्मी संगीत को मिलता है। वह भारत में संगीत के परिदृश्य को बदल देगा। 

स्मिता श्रीवास्तव 

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