कानून को चैलेंज दे रही स्टाइलिश नंबर वाली गाड़ियां

2019-01-29T11:00:03+05:30

राजधानी की सड़कों पर स्टाइलिश नंबर प्लेट वाली गाडि़यां सरपट दौड़ रही हैं

ranchi@inext.co.in
RANCHI: किसी के वाहन पर 'पापा' तो किसी की गाड़ी में 'बॉस'. किसी में 'राम' तो किसी में 'दादा'. इतनी नहीं और भी तरह-तरह के अजब-गजब नाम. राजधानी की सड़कों पर स्टाइलिश नंबर प्लेट वाली गाडि़यां सरपट दौड़ रही हैं. खास बात है कि नंबर प्लेट के साथ नए-नए प्रयोग करने वालों की तादाद तेजी से बढ़ रही है. दरअसल, अपने वाहन को अलग दिखाने की चाहत में वे नंबर प्लेट के साथ यह छेड़छाड़ कर रहे हैं. स्टाइलिश नंबर प्लेट लगा वे ट्रैफिक रूल्स की धज्जियां उड़ा रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से उनके खिलाफ किसी तरह का कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है.

नंबर प्लेट के साथ छेड़छाड़
लोग अपनी गाडि़यों की नंबर प्लेट अपने मनमुताबिक आकार और प्रकार में बनवा रहें हैं. वे गाड़ी के नंबर को कुछ इस तरह बदल देते हैं कि उसका मायने ही बदल जाते हैं. जैसे गाड़ी नंबर 8055 को बॉस, 0214 को राम, 4141 को पापा में तब्दील कर दिया गया है, सड़कों पर ऐसी नंबर प्लेट देखकर अक्सर लोग भ्रमित हो जाते हैं और किसी तरह का कोई हादसा होने की स्थिति में नंबर ट्रेस करने में काफी मुश्किलें आती है.

नम्बर प्लेट के ये हैं मानक

-टू व्हीलर और थ्री व्हीलर नंबर प्लेट का साइज 200 एमएम, ऊंचाई 35 एमएम, मोटाई 7 एमएम होनी चाहिए.

- नम्बरों के बीच में खाली स्थान 5 एमएम को होना चाहिए

-व्हाइट कलर की नंबर प्लेट पर ब्लैक कलर से नम्बर ही लिखा होना चाहिए

-नंबर प्लेट पर एक समान, सीधे और साधारण नंबर लिखे होने चाहिए.

वीआईपी वाहनों में भी हो रहा इस्तेमाल
स्टाइलिश नंबर प्लेट लगाने के मामले में सिर्फ आम लोग शामिल नहीं है. खास लोग भी खुलेआम कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने स्टाइलिश नंबर प्लेट लगाने वालों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. इसके बावजूद कई विधायक, विभिन्न राजनीतिक पार्टी के लोग, पुलिस-प्रेस के प्रतिनिधि, सैन्य पदाधिकारी अपने वाहन पर मनमाना रंग और डिजायन का नंबर प्लेट और नंबर लिखवा रहे हैं. कोई अशोक स्तंभ लगा रहा है तो कोई अपने राजनैतिक दल का सिंबल और रंग का इस्तेमाल कर रहा है.

नंबर की पहचान में परेशानी
स्टाइलिश नंबर प्लेट से ज्यादातर नंबर स्पष्ट रूप से नहीं लिखे होने के कारण उसे पढ़ने में कठिनाई होती है. ऐसे वाहन से कोई दुर्घटना हो जाती है, तो आसपास के लोग नंबर पढ़ नहीं पाते हैं. वाहन चालक एक्सीडेंट करने के बाद भी आसानी से बच जाता है, पुलिस भी संबंधित वाहन को ट्रेस नहीं कर पाती है. दुर्घटना में जिसकी मौत होती है, उसके परिजनों को सरकार की ओर से देय किसी तरह का पारिवारिक लाभ भी नहीं मिलता.


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