वीआईपी को नसीब नहीं इनोवा!

2019-05-02T06:00:38+05:30

चुनाव ड्यूटी में महज पांच इनोवा मिलने पर भड़के अधिकारी

वाहन मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की दी गई अर्जी

प्रत्याशियों से मिल रहे अधिक नकद रुपए

ऐसा है हाल

80

इनोवा की मांग की गई है

05

ही मिल सकी हैं अभी

1600

छोटी गाडि़यों की डिमांड

1200

बसें उपलब्ध कराई जानी हैं

2000

कुल बसों का रजिस्ट्रेशन है

PRAYAGRAJ: लोकसभा चुनाव ड्यूटी में लगे वीआईपी अफसरों के लिए इनोवा का टोटा हो गया है। निर्वाचन कार्यालय की ओर से वाहन मालिकों से 80 इनोवा मांगी गई। उन्हें सिर्फ पांच भी उपलब्ध करायी जा सकी है। इससे निर्वाचन अधिकारी की नाराजगी बढ़ गई और उन्होंने वाहन मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा भी निर्वाचन कार्यालय को बड़ी संख्या में छोटी गाडि़यों की आवश्यकता है। इसे उपलब्ध कराने के लिए आरटीओ को पत्र लिखा गया है।

इनोवा में आती है बेहतर फीलिंग

चुनाव ड्यूटी में लगे प्रेक्षकों सहित तमाम बड़े अधिकारियों को आयोग की ओर से वीआईपी वाहन उपलब्ध कराए जाते हैं। इनमें इनोवा की डिमांड पहले नंबर पर होती है। स्पेस अधिक होने के साथ यह गाड़ी बेहतर फीलिंग भी देती है। आरटीओ कार्यालय के जिम्मेदारों का कहना है कि वाहन उपलब्ध न कराने वाले वाहन स्वामियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए एप्लीकेशन बुधवार को संबंधित थानों में दे दी गयी है।

सेक्टर, जोनल मजिस्ट्रेट सहित दूसरे अधिकारियों को चुनाव में दौड़-भाग करने के लिए क्वॉलिस, टवेरा, स्कार्पियो सहित 1600 छोटी गाडि़यों की मांग की गई है।

यह जिम्मा आरटीओ को दिया गया है।

पोलिंग पार्टियों की रवानगी के लिए कुल 1070 बसों की आवश्यकता है।

130 बसें रिजर्व में रखी जाएंगी।

आरटीओ कार्यालय को 9 मई से पहले 1200 बसें उपलब्ध करानी हैं।

इसके लिए वाहन मालिकों से बसों का परमिट और आरसी ली जा रही है।

चार मई से सरकारी बसों को सरकारी पर्ची पर तेल भी उपलब्ध कराया जाने लगेगा।

एक बार सरकारी ईधन यूज करने के बाद बसों को चुनावी ड्यूटी करनी ही होगी।

शहर में कुल 2000 बसों का पंजीकरण है।

इसलिए नहीं देना चाहते हैं इनोवा

बता दें कि कई विभागों में इनोवा अनुबंध के तहत चल रही है। चुनाव में प्रत्याशियों ने बडे़ पैमाने पर लग्जरी गाडि़यों की बुकिंग करा रखी है। यहां से वाहन मालिकों को तत्काल नगद पैसा मिल जाता है। चुनाव आयोग की ओर से ईधन तत्काल मिलता है लेकिन गाडि़यों का किराया बाद में अकाउंट में आता है। इससे ट्रेवल एजेंसी वाले बचते हैं और इसीलिए वह अपने वाहन नहीं देना चाहते।

जिला निर्वाचन अधिकारी के आदेश पर इनोवा मालिकों के खिलाफ संबंधित थानों में एफआईआर दर्ज कराने की लिखित अप्लीकेशन दे दी गई है। जो लोग चुनाव ड्यूटी में अपने वाहन देने से बच रहे हैं उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

-रविकांत शुक्ला,

एआरटीओ प्रयागराज

inextlive from Allahabad News Desk


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