बिना यंत्र नहीं पता चल पा रही धरती की धड़कन

2015-04-30T07:01:29+05:30

- यूनिवर्सिटी में सिस्मोग्राफ का इंतजार कर रहा मौसम विभाग

- यूनिवर्सिटी के मौसम विभाग में काफी समय से प्रोसेस में प्रक्रिया

MEERUT: नेपाल में आए भूकंप से पूरा उत्तर भारत कांप उठा। जहां तबाही नेपाल में हुई और चपेट में भारत का कुछ हिस्सा भी आया। वहीं इस भूकंप का केंद्र नेपाल रहा, लेकिन इसके झटके पूरे उत्तर भारत में लगे। जिसका डर आज भी लोगों के दिल और दिमाग से निकला नहीं है। भूकंप के झटकों की जानकारी देने वाला यंत्र सिस्मोग्राफ सीसीएस यूनिवर्सिटी के मौसम विभाग में आना है। जहां इस यंत्र के बिना मौसम विभाग धरती की धड़कन मापने में नाकाम है।

रिक्टर स्केल

भूकंप की तीव्रता मापने के लिए फिलहाल रिक्टर और मारकेली स्केल का इस्तेमाल किया जाता है। रिक्टर स्केल पर पृथ्वी में कंपन के आधार पर भूकंप की तीव्रता मापी जाती है, वहीं मारकेली स्केल पर भूकंप से हुई क्षति के आधार पर तीव्रता का आंकलन किया जाता है। क्9फ्भ् में चा‌र्ल्स रिक्टर ने भूकंप की तीव्रता मापने का स्केल तैयार किया था। वैसे भूकंप की जानकारी हासिल करने के लिए चीन में सबसे पहले सिस्मोस्कोप का आविष्कार किया गया। चीनी दार्शनिक चेंग हेंग ने ईसा पूर्व क्फ्ख् में इस यंत्र का ईजाद किया था।

भूकंप मापने का यंत्र सिस्मोग्राफ

सिस्मोग्राफ के आंतरिक हिस्से में सिस्मोमीटर लगा होता है, जो पेंडुलम की तरह होता है। सिस्मोग्राफ वह यंत्र है, जिसके जरिए भूकंप के दौरान कंपन को मापा जाता है। इस यंत्र का विकास क्890 में किया गया था। अब दुनिया में कहीं भी भूकंप आता है तो उसकी पूरी जानकारी तुरंत सिस्मोग्राफिक नेटवर्क के जरिए मिल जाती है.

एनसीआर में क्म् जगह लगेगा यंत्र

सीसीएस यूनिवर्सिटी के मौसम विज्ञान विभाग में पिछले काफी समय से भूकंप मापने का यंत्र सिस्मोग्राफ लगना है। जिसके लिए आईएमडी (इंडियन मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट) हेड क्वार्टर से भी हां हो चुकी है। यही नहीं इसके लिए टेंडर भी छोड़े जा चुके हैं, लेकिन आजतक इस यंत्र को मेरठ में नहीं लाया जा सका है। विभाग के अनुसार इसके लिए सभी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब यह यंत्र आना बाकी है। जिसके लिए तैयारियां लगभग कंप्लीट हो चुकी है।

पहली बार मेरठ रहा था केंद्र

पिछले महीने मेरठ में लगे भूकंप के झटके से लोगों को डर का अहसास तो हो ही गया था। जहां पहली बार मेरठ सेंटर रहा था। सीसीएस यूनिवर्सिटी में मौजूद भारत मौसम विज्ञान विभाग (इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट) के अनुसार मेरठ पहली बार भूकंप का सेंटर रहा था। जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर तीन मापी गई थी। इस भूकंप का केंद्र ख्9.क् डिग्री नॉर्थ व 77.भ् ईस्ट रहा। यानि मेरठ और बड़ौत के बीच पड़ने वाला एरिया करनाल के आसपास बताया गया है। जिसकी डेप्थ दस किलोमीटर रही। यह भूकंप दस किलोमीटर के एरिया में ही महसूस किया गया।

मेरठ जोन चार में शामिल

वैज्ञानिकों के अनुसार भारतीय उपमहाद्वीप में भूकंप का खतरा हर जगह अलग- अलग है। भारत को भूकंप के क्षेत्र के आधार पर चार हिस्सों जोन- ख्, जोन- फ्, जोन- ब् तथा जोन- भ् में बांटा गया है। जोन ख् सबसे कम खतरे वाला जोन है तथा जोन- भ् को सर्वाधिक खतरनाक जोन माना जाता है। मेरठ जोन- ब् में आता है।

रिक्टर स्केल पर ट्रेमर या फॉल्ट की जानकारी पता चल जाती है। सिस्मोग्राफ इक्वीपमेंट के लिए आईएमडी हेड क्वार्टर से आना ही बाकी है। इसके लिए सब प्रक्रिया पूरी जो चुकी हैं। वास्तव में यह एक लंबी प्रक्रिया होती है। इसके लिए ग्लोबल टेंडर होता है। दिल्ली एनसीआर के अंदर सोलह इक्वीपमेंट लगने हैं। जिसके लगने के बाद वेव फॉर्म को डिस्पले पर देखा जा सकता है। इससे पृथ्वी में होने वाली हलचल का पता चल सकेगा।

- डॉ। अशोक गुप्ता, एचओडी मौसम विज्ञान विभाग, सीसीएसयू मेरठ

inextlive from Meerut News Desk


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