स्कूल बैग का बोझ बच्चे की सेहत को दे रहा चोट

2019-04-05T06:00:02+05:30

RANCHI : 12 साल का राकेश स्कूल जाता है, पढ़ाई करता है, टीवी देखता है, कभी-कभी वीडियो गेम खेलकर मन बहला लेता है, लेकिन बाहर जाकर अपने दोस्तों के साथ दौड़-भाग नहीं पाता। वह शारीरिक रूप से सक्षम होने के बाद भी आम जीवन नहीं जी पा रहा है। कारण है कि राकेश दो साल से सवाईकल स्पाइन का पेशेंट है। यह समस्या केवल राकेश के साथ नहीं बल्कि सैंकड़ों स्कूली बच्चों के साथ है। रांची के जितने भी स्कूल है वहां पढ़ने वाले बच्चों का बस्ता भारी रहता है। विशेषज्ञों की मानें तो कम उम्र में स्कूल बैग का वजन ढोने वाले अधिकांश बच्चों में कमर दर्द, हाइट कम रहना और सवाईकल स्पाइन की प्रॉब्लम सामने आ रही है।

बच्चे की उम्र से ज्यादा बस्ते का बोझ

राजधानी रांची के जितने भी स्कूल हैं खासकर प्राइवेट स्कूल, उनमें बच्चों की उम्र से अधिक बैग का बोझ अधिक रहता है। बच्चों के बैग को संभालने के लिए उनके पैरेंट्स मौजूद रहते हैं ताकि उनको बहुत अधिक बोझ ढोना ना पड़े। स्कूल मैनेजमेंट भी यह सब देखता है, लेकिन कुछ नही करता है।

हर बोर्ड की अलग-अलग किताबें

सीबीएसई एनसीईआरटी की बुक्स को अपने स्कूलों में पढ़ाने का दावा करता है, पर बोर्ड से संबद्ध केवल गर्वमेंट स्कूल ही अपने यहां एनसीईआरटी की बुक्स पढ़ाते हैं। शेष सीबीएसई के स्कूलों में एनसीईआरटी के सिलेबस के अनुसार तैयार प्राइवेट पब्लिसर्स की बुक्स ही चलती हैं। वहीं दूसरी ओर सीआईएससीई बोर्ड में एक कॉमन सिलेबस नहीं है। इस बोर्ड से सम्बद्ध स्कूल तो अपने हिसाब से एक कॉमन सिलेबस को आधार मानकर किसी भी प्रकाशक की किताबें अपने स्कूलों में संचालित कराते हैं। साथ ही यह बच्चों पर सिलेबस की किताबों के अलावा मोरल साइंस, एनवायरमेंट स्टडीज व दूसरी की अतिरिक्त किताबें बहुत ही छोटी क्लास से पढ़ाना शुरू कर देते हैं।

प्राइमरी सेक्शन में भी किताबों का बोझ

मौजूदा समय में बड़े स्कूलों में पूरी तरह से एक्टिविटी आधारित प्री-प्राइमरी की पढ़ाई में भी दर्जन भर किताबें मंगवाई जाती हैं। आलम यह है कि पहली क्लास में इंग्लिश में पोयम, स्टोरी, ग्रामर, राइटिंग के नाम पर अलग-अलग बुक्स हैं। बड़ों से देखकर सीखे जाने वाले नैतिक ज्ञान को स्कूल पहली क्लास में ही 6 किताबों से पढ़ा रहे हैं। ्इनका असर अभिभावक की जेब के साथ ही साथ बच्चे की सीखने की प्रक्रिया और सेहत दोनों पर पड़ रहा है।

द चिल्ड्रेन स्कूल बैग लिमिटेशन ऑन वेट एक्ट 2006 के प्रावधान

- बच्चों के वजन से 10 प्रतिशत ज्यादा स्कूल बैग का वजन नहीं

-नर्सरी एवं केजी में स्कूल बैग न रखा जाए

-8वीं तक के बच्चों के लिए स्कूल में लॉकर उपलब्ध करवाए जाएंए जिससे वहीं किताबें रख सकें

- नियम तोड़ने पर 3 लाख रुपए की पेनल्टी, दूसरी बार गलती पर मान्यता खत्म

सीबीएसई स्कूलों में मौजूदा किताबों की स्थिति

-पहली से पांचवीं तक :

-11 से 15 किताबें वर्क बुक छोड़कर

-इंग्लिश की 3 से 4 किताबें

-हिंदी की दो किताब

-सोशल व मोरल साइंस की 2 से 3 किताब

-आर्ट एंड क्राफ्ट की 2 किताबें

-कम्प्यूटर व इंवायरनमेंट सांइस.की 2 से 3 किताबें

सीआईएससीई के स्कूलों में किताबों की स्थित

-पहली से पांचवीं तक

- 18 से 20 किताबें दो वर्क बुक सहित

-इंग्लिश की 6 किताब

-मोरल साइंस की 5 किताबे

-मैथ्स । 2 किताबें

-हिंदी की 3 किताबें

-आ‌र्ट्स की 2 किताब

-कम्प्यूटर व इन्वाइनरमेंट सांइस की 2 से 3 किताबें

मिशनरी स्कूल में किताबों की स्थिति

नर्सरी

-11 किताबें

-अंग्रेजी । 5 किताबें

-हिंदी । 3 किताबें

-मैथ्स। 1 किताब

-जीके। 1 किताब

-आर्ट । 1 किताब

-स्टेशनरी । 8 कॉपियां

केजी में किताबों की स्थिति

-13 किताबें

-अंग्रेजी की 5 किताबें

-हिंदी की 4 किताबें

-मैथ की 2 किताब

-जीके की 1 किताब

-आर्ट की 1 किताब

-जीके के 1 किताब

-स्टेशनरी की 13 कॉपियां व रजिस्टर

inextlive from Ranchi News Desk


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