बॉयोमीट्रिक वोटर आईडी से रुकेगा फर्जीवाड़ा

2014-01-10T09:04:03+05:30

kanpur वोटर आईडी कार्ड के बारे में आप जरूर जानते होंगे लेकिन ‘बायोमीट्रिक वोटर आईडी कार्ड’ का नाम शायद ही कभी सुना देखा या पढ़ा हो कानपुर के प्रशासनिक अफसरों का प्रपोजल अगर मंजूर हो जाए तो देश भर में ‘बायोमीट्रिक वोटर वोटर आईडी’ का कॉन्सेप्ट लागू कर दिया जाएगा

नाम के बाद फोटो की पहचान
फर्जी वोटर्स की पहचान के लिए चुनाव आयोग ने ईआरएमएस नाम का सॉफ्टवेयर सभी डिस्ट्रिक्ट के इलेक्शन ऑफिसेज में इंस्टॉल करवा रखा है. इसकी मदद से यह पता लगाया जा सकता है कि एक ही नाम के शख्स ने किस-किस विधानसभा सीट से वोटर आईडी इश्यू करवा रखा है. नई व्यवस्था के तहत अब फोटो के जरिए भी फर्जी वोटर्स को पहचानने वाला सॉफ्टवेयर मंगवाया गया है. बताते चलें लास्ट वोटर लिस्ट रिवीजन ड्राइव के दौरान इलेक्शन ऑफिस ने ईआरएमएस के जरिए करीब 2600 वोटर्स चिन्हित किये थे, जिनका नाम अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में दर्ज था.
कानपुर का अलग प्रपोजल
चुनाव में फर्जी वोटर्स की सौ प्रतिशत रोकथाम के लिए एक नई व्यवस्था लागू करने के फेवर में हैं. विधानसभा चुनाव-2012 के दौरान वोटर रिवीजन ड्राइव के दौरान मंडल के बेस्ट ईआरओ का अवार्ड पा चुके एसीएम-1 योगेन्द्र कुमार ने एक खास योजना तैयार की है. उनका मानना है कि नाम और फोटो के जरिए फर्जी वोटर्स की पहचान में कुछ एरर भी हो सकती है. अगर यहां भी बायोमीट्रिक सिस्टम लागू कर दिया जाए तो फर्जीवाड़ा सौ फीसदी रोका जा सकता है. उन्होंने माना कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर यह प्रॉसेस टाइम टेकिंग है. मगर, यह सौ फीसदी सेफ-सिक्योर और ट्रांसपेरेंट सिस्टम है.
दर्ज होगी बायोमीट्रिक पहचान
एनआईसी में चुनाव आयोग के सीनियर ऑफिसर्स संग वीडियो कांफ्रेंसिंग से पहले एसीएम-1 योगेन्द्र कुमार व एसीएम-6 आरपी त्रिपाठी ने बताया कि अगर यह प्रक्रिया आयोग लागू करता है. तब हर एक वोटर की बायोमीट्रिक पहचान अलग से दर्ज करानी पड़ेगी. जिसमें वोटर के फिंगर प्रिंट से लेकर आंखों की रेटिना की स्कैनिंग समेत थम्ब इम्प्रेशन भी लिया जाएगा. बायोमीट्रिक वोटर आईडी कार्ड में यह सारी डिटेल मौजूद रहेगी. तब कोई भी व्यक्ति फर्जीवाड़ा नहीं कर सकेगा. वोट तभी डालने को मिलेगा जब वोटर की पहचान तकनीकि रूप से सुनिश्चित कर ली जाएगी.
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कानपुर में 7 लाख रिपीटेड वोटर..!
डुप्लीकेट वोटर्स की पहचान के उद्देश्य से इलेक्शन कमीशन ने स्टेट लेवल पर एक लिस्ट तैयार की है. अकेले कानपुर में करीब 7 लाख वोटर्स चिन्हित किये गये हैं, जिनकी डुप्लीकेसी पाई गई है. इलेक्शन कमीशन के ज्वाइंट सीईओ आरके पांडेय ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कानपुर के इलेक्शन ऑफिसर्स को यह जानकारी दी. उदाहरण के तौर पर कल्याणपुर विधानसभा सीट में रहने वाले सुरेश कुमार पुत्र दयाशंकर का नाम कानपुर समेत 15 अलग-अलग जिलों की विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में दर्ज है. ज्वाइंट सीईओ आरके पांडेय के अनुसार ये वोटर एक भी हो सकते हैं और अलग-अलग भी. इसीलिए इनकी शिनाख्त करवाई जाए. डिप्टी इलेक्शन ऑफिसर आरएन बाजपेई ने बताया कि 14 जनवरी तक सभी 7 लाख रिपीटेड वोटर्स की पहचान वैरीफाई करवाने के आदेश मिले हैं. इसी क्रम में 10 जनवरी को सारे बीएलओज को बुलाया गया है. 14 तक सभी नामों को वैरीफाई करवाकर आयोग को इनफॉर्म कर दिया जाएगा. आयोग का मानना है कि एक ही व्यक्ति के कई जगह नाम दर्ज होने से न सिर्फ वोटिंग परसेंटेज प्रभावित होता है. बल्कि, फर्जी मतदान की आशंका भी बनी रहती है.


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