Rewa: प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की सिर्फ बातें हो रही हैं ठोस उपाय नहीं. इसका उदाहरण मंदबुद्धि के एथेंस ओलंपिक में देश और प्रदेश के लिए दो कांस्य पदक जीतने वाली सीता साहू है. यह ओलंपियन गरीबी में पेट भरने के लिए सडक़ों पर गोल गप्‍पे बेचने को मजबूर है. इसके हालात देखकर लगता है मानो देश-प्रदेश के लिए गौरव कमाना इसके लिए सजा बन गया हो.


स्पेशल ओलंपिक में दो ब्रांज मेडलविशेष ओलंपिक में दो कांस्य पदक हासिल कर चुकी रीवा की मंदबुद्धि सीता साहू को मदद की दरकार है. करीब छह माह पहले सीता साहू को आर्थिक मदद एवं सुविधाओं को लेकर कमिश्नर, कलेक्टर, सामाजिक न्याय विभाग से बात की गई थी. इस दौरान अधिकारियों ने बड़े दावे से तीन दिन के अंदर कार्यवाही का भरोसा दिलाया था, लेकिन उनकी बातें हवा-हवाई होकर रह गईं. आज तक सीता साहू को मदद नहीं मिली.फिर वही रटे-रटाए शब्दसीता साहू के मामले पर जब संभाग के कमिश्नर को वादे याद दिलाए गए, तो उन्होंने छह माह पुराने रटे-रटाए शब्द दोहरा दिए. मानो उनके सामने यह प्रकरण पहली बार आया हो. प्रशासनिक अधिकारियों के संवेदनहीन रवैए से जाहिर हो गया है कि वे बातें तो बड़ी-बड़ी करना जानते हैं, लेकिन वे पूरी होंगी इसकी उम्मीद करना बेमानी है.
मंत्री की घोषणा बड़ी-बड़ी, देने में दिखाया ठेंगा


स्पेशल ओलंपिक गुना मध्य प्रदेश के सहायक खेल निदेशक साजिद मसूद के अनुसार मंत्री गोपाल भार्गव ने घोषणा कि थी गोल्ड मेडल पाने वाले खिलाडिय़ों को एक लाख रुपये, सिल्वर को 75 हजार, कांस्य पदक पाने वाले को 50 हजार रुपये का इनाम मिलेगा. सीता साहू को एक लाख की मदद मिलनी चाहिए, जो नहीं मिली. भार्गव ने एक पत्र सामाजिक न्याय विभाग को लिखा था, इसकी कॉपी मेरे पास है. हद दर्जे की बात यह है कि 2012 में ओलंपिक में जीत हासिल करने वाले सुशील कुमार हरियाणा को प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने नकद पुरस्कार दिया है.जनता को नहीं रहा भरोसामंच पर अक्सर नेताओं की बड़ी-बड़ी घोषणाओं से वैसे भी आम लोगों का भरोसा घट चुका है. एक उम्मीद की किरण बाकी थी कि बड़े ओहदों पर बैठे सरकारी अफसर उनकी समस्याओं, दुख-दर्द को दूर कर सकते हैं, लेकिन यह आशा भी सीता साहू के प्रकरण में धूमिल होती जा रही है. मध्यप्रदेश के रीवा शहर में आते जाते नागरिक जब सीता साहू की हालत देखते हैं, तो वे इस बात को सोचते पर जरूर मजबूर होते हैं कि क्या देश के लिए नाम कमाने का यही इनाम मिलता है. जब शहरवासियों की नब्ज टटोली गई, तो उनका नजरिया शासन-प्रशासन के विपरीत था. किसी को भी सरकार पर भरोसा नहीं था कि वह कुछ करेगी. खिलाडिय़ों की ऐसी बेरुखी सरकार के लिए अच्छे संकेत नही हैं.एथेंस में सीता ने जीते थे दो कांस्य पदक

15 वर्षीय सीता साहू ने जून 2011 में ग्रीस की राजधानी एथेंस में आयोजित मानसिक बाधित बच्चों के लिए विशेष ओलंपिक खेलों में एथलेटिक्स की 200 और 1600 मीटर की दौड़ में 2 कांस्य पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया था. इस विशेष ओलिंपिक में देश भर के कुल 200 खिलाडिय़ों ने हिस्सा लिया था। जिसमें प्रदेश के 8 बच्चे भी शामिल थे. सीता के अलावा प्रदेश के 7 बच्चे और भी थे. जिन्होंने मेडल हासिल किया. इन्हें प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद सामने आए थे और इन बच्चों का सम्मान किया था.'सीता के पिता पुरुषोत्तम साहू ने मदद के लिए आवेदन किया है. मैंने भी शासन को तीन बार पत्र लिखा, लेकिन जवाब नहीं आया. इसका रिमांइडर भी किया है. विभाग के पास कोई ऐसा अधिकार नहीं है, जिससे मैं सीता साहू की मदद कर सकूं.'-एनपीएस परिहार, संयुक्त संचालक सामाजिक न्याय विभाग'मुयमंत्री, स्थानीय मंत्री, कलेक्टर एवं कमिश्नर को कई बार पत्र लिखा, लेकिन आज तक मदद नहीं मिली. जिले के डॉ. केके परौहा ने पांच हजार, सांसद देवराज ने 10 हजार एवं पुष्पराज सिंह ने 15 सौ रुपये की मदद की है. सीता हाल में कक्षा छठवीं में अध्ययनरत हैं.'-रामसेवक साहू, प्राचार्य स्नेह मंदबुद्धि स्कूल
'आप सोमवार को सीता साहू के ओलंपिक संबंधी कागज उपलब्ध करा दें. सीता को आने की जरूरत नहीं है. मैं खेलकूद, सामाजिक न्याय विभाग की गाइड लाइन देखूंगा. मेरा प्रयास होगा कि पूरी मदद मिले.'-प्रदीप खरे, कमिश्नर रीवाReport by: Neelambuj Panday

Posted By: Satyendra Kumar Singh