सात महीने में 39 लाख से ज्यादा नौकरियां र्इपीएफआे ने जारी किए आंकड़े

2018-05-23T01:38:08+05:30

र्इपीएफआे ने कहा है कि मार्च को खत्म हुए साल के पिछले सात महीनों में 39 लाख से ज्यादा लोगों को नौकरियां मिली हैं। जाॅब डाटा को लेकर सवाल उठाने वालों को ध्यान में रखते हुए इस बार र्इपीएफआे ने अतिरिक्त सावधानी भी बरती है आैर डिस्क्लेमर के साथ आंकड़े जारी किए हैं।

मार्च में 6.13, फरवरी में 5.89 लाख नौकरियां
नर्इ दिल्ली (पीटीआर्इ)।
मार्च में खत्म हो रहे इस साल में पिछले सात महीनों के दौरान लोगों को 39.36 लाख नौकरियां मिली हैं। यह आंकड़ा र्इपीएफआे ने जारी किया है। र्इपीएफआे के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस साल के मार्च में 6.13 लाख नर्इ नौकरियां लोगों को मिली हैं। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (र्इपीएफआे) के पेरोल डाटा के मुताबिक फरवरी में 5.89 लाख लोगों को नौकरियां मिलीं।
इलेक्ट्रिक, कंस्ट्रक्शन आैर टेक्सटाइल में जाॅब
आंकड़ों के अनुसार, इनमें आधे से ज्यादा नौकरियां एक्सपर्ट सर्विस सेग्मेंट से हैं। इनमें इलेक्ट्रिक, मकैनिकल या जनरल इंजीनियरिंग उत्पाद, बिल्डिंग एेंड कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री, ट्रेडिंग एेंड कमर्शियल संस्थान आैर टेक्सटाइल्स शामिल हैं। इन आंकड़ों से यह पता चलता है कि मार्च में खत्म हो रहे साल के अंतिम सात महीनों के दौरान आधे से ज्यादा नौकरियां महाराष्ट्र, तमिलनाडु आैर गुजरात के संगठित क्षेत्र में सृजित हुर्इं हैं।
विशेषज्ञ का कहना जाॅब बदलना भी नौकरी सृजन
र्इपीएफआे ने पिछले महीने पेरोल डाटा की पहली किस्त जारी की थी। कुछ एक्सपर्ट्स ने इन आंकड़ों के अनुसार जाॅब को लेकर आशंका जतार्इ थी। उनका कहना था कि इन आंकड़ों से देश में नौकरियों के सृजन का पता नहीं चलता क्योंकि इन आंकड़ों में कर्मचारियों द्वारा नौकरियां बदलने को भी नर्इ नौकरी मान लिया जाता है। र्इपीएफआे ने ये आंकड़े डिस्क्लेमर्स के साथ अपनी साइट पर अपलोड की है। इसमें कहा गया है कि हाल के महीनों के आंकड़े अस्थार्इ हैं आैर जैसे-जैसे कर्मचारियों के रिकाॅर्ड अपडेट होंगे ये आंकड़े साफ होते जाएंगे।
र्इपीएफआे में छह करोड़ अंशदाता
र्इपीएफआे ने कहा है कि ये आंकड़े उम्र वर्ग के मुताबिक जारी किए गए हैं। इनमें कोर्इ एेसा सदस्य शामिल नहीं है जिसका अंशदान शून्य हो। हो सकता है इनमें एेसे अस्थार्इ कर्मचारी भी शामिल हों जिनका अंशदान पूरे वर्ष न रहा हो। ध्यान रहे कि र्इपीएफआे देश में कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा निधि का प्रबंधन करता है। पिछले महीने के अंशदान के मुताबिक इसमें छह करोड़ से ज्यादा सक्रिय सदस्य हैं।
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