एमजीएम में मरीज ने तड़पतड़पकर दी जान

2019-05-18T06:00:08+05:30

छ्वन्रूस्॥श्वष्ठक्कक्त्र: कोल्हान के सबसे बड़े गवर्नमेंट हॉस्पिटल महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज व हॉस्पिटल अपनी करतूतों की वजह से आए दिन चर्चा में रहता है। शुक्रवार को भी हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन की खामियां फिर सामने आईं। दो सीनियर डॉक्टरों के ड्यूटी से नदारद रहने की वजह से एक मरीज का सही तरीके से इलाज नहीं हुआ और उसकी मौत हो गई। मरीज को लू लगने पर दोपहर के करीब सवा दो बजे आनन-फानन में एमजीएम लाया गया था, लेकिन अस्पताल के इमरजेंसी में कोई सीनियर डॉक्टर के नहीं होने के कारण उसका सही से इलाज न हो सका। उस समय डॉ। जितेंद्र कुमार व डॉ। एसबी भट्टाचार्य की ड्यूटी थी। दोनों के ड्यूटी पर न होने पर जूनियर डॉक्टरों के हाथ-पांव भी फूलने लगे। अस्पताल में बेड भी नहीं थे, इसलिए फर्श पर ही उसे लेटा दिया गया। किसी तरह महिला जूनियर डॉक्टरों ने मरीज को बचाने की कोशिश की, लेकिन वे इसमें असफल रहे।

फोन पर भी नहीं आए डॉक्टर

जूनियर डॉक्टरों ने दोनों सीनियर डॉक्टरों को फोन कर बुलाया भी, लेकिन वे नहीं आए। इस कारण मरीज को बचाया नहीं जा सका। मरीज का नाम शमीम अहमद था और वह मानगो के जवाहर नगर रोड नंबर-13 का रहने वाला था। शुक्रवार की दोपहर को वह शालीग्राम स्वीट्स में मिठाई खरीदने के लिए गया था। तभी लू लगने से वह चक्कर खाकर गिर पड़ा और बेहोश हो गया। इसके बाद स्थानीय लोगों ने एमजीएम अस्पताल पहुंचाया। जहां ड्यूटी के दौरान डॉक्टरों के न होने की कीमत उसे अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। गौरतलब हो कि लौहनगरी में लू लगने से शहर में यह चौथी मौत है।

जूनियर के भरोसे इमरजेंसी

एमजीएम हॉस्पिटल का इमरजेंसी डिपार्टमेंट जूनियर डॉक्टरों के भरोसे चल रहा है। अधिकांश समय सीनियर डॉक्टर गायब रहते है। जिसके कारण अक्सर हंगामे की नौबत आती है। पदाधिकारियों का कहना है कि जूनियर डॉक्टरों के भरोसे इमरजेंसी विभाग नहीं छोड़ा जा सकता। जूनियर सिखने के लिए होते हैं।

सभी डॉक्टरों को समय पर ड्यूटी आने का आदेश कई बार निर्गत किया जा चुका है। अगर कोई नहीं आता है तो यह गलत है। दोपहर के वक्त इमरजेंसी विभाग में डॉक्टर नहीं होने की सूचना मिली है।

- डॉ। नकुल प्रसाद चौधरी, उपाधीक्षक, एमजीएम।

inextlive from Jamshedpur News Desk


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