जब मोबाइल पर होगी पैथालॉजी

2014-01-18T09:04:02+05:30

Allahabadअगर आपको बारबार अपने रूटीन हेल्थ चेकअप के लिए पैथालॉजी न जाना पड़े तो कैसा रहेगा? ये फैसिलिटी आपके मोबाइल फोन पर अवेलेबल हो जाए तो जी हां अगले चार से पांच सालों में ऐसी डिवाइस मार्केट में होगी जो पलक झपकते ही आपकी बॉडी का हाल बता देगी बंग्लुरू स्थित सेंटर फॉर नैनो साइंसेज एंड इंजीनियरिंग में इस पर रिसर्च जारी है नैनो साइंटिस्ट और इस सेंटर के चेयरमैन प्रो रुद्र प्रताप के मुताबिक यह सब नैनो टेक्नोलॉजी के जरिए पॉसिबल होगा इस डिवाइस को मोबाइल में आसानी से इंस्टॉल कर यूज किया जा सकेगा

कैसे करेगी work
प्रो. रुद्र प्रताप बीबीएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के साइंस विंटर कैंप इंस्पॉयर में स्टूडेंट्स को एड्रेस करने सिटी आए थे. उन्होंने बताया कि नैनो टेक्नोलॉजी के जरिए करोड़ों-अरबों ट्रांजिस्टर्स को एक चिप में फिट कर दिया जाता है. इसी टेक्नोलॉजी की मदद से इलेक्ट्रानिक डिवाइसेज को पहले से ज्यादा रिलॉयबल बनाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि जैसे आप घर बैठे एक डिवाइस के जरिए अपना शुगर लेवल पता कर लेते हैं, ठीक वैसे ही अन्य बीमारियों का चेकअप भी किया जा सकेगा. बस आपको ब्लड की एक बूंद डिवाइस पर डालनी होगी और पलक झपकते ही रिजल्ट सामने होगा. ऐसे में पेशेंट को बार-बार चेकअप के लिए पैथालॉजी नहीं जाना पड़ेगा.
बारिश में नहीं बहेगा दीवारों का पेंट
चाहे जितना महंगा पेंट लगवाओ, लेकिन बारिश में दीवारें बदरंग हो ही जाती है. लेकिन, नैनो टेक्नोलॉजी के जरिए इससे भी निजात मिल जाएगी. प्रो. रुद्र प्रताप ने बताया कि उनकी लैब में ऐसे हाइड्रो फोबिक पेंट पर रिसर्च चल रही है जिस पर पानी का असर नहीं होगा. अगले कुछ सालों में यह पेंट बाजार में अवेलेबल होगा. उन्होंने बताया कि जिस प्रकार कमल के फूल पर पानी नहीं टिकता है, वैसे ही इन दीवारों से भी पानी फिसल जाएगा. कमल के फूल पर नेचुरल नैनो सरफेस होती है और यही प्रिंसिपल इस पेंट पर भी अप्लाई किया जा रहा है. इसके अलावा इन दीवारों पर नमी भी बनी रहेगी, यह सूरज से निकलने वाली सोलर एनर्जी को एबजार्व कर लेगी.
बार-बार नहीं लेनी होगी शुगर की दवा
नैनो टेक्नोलॉजी के जरिए एक और चमत्कार जल्द होने वाला है, और वह भी डायबिटीज पेशेंट के लिए. फिलहाल मरीजों को बार-बार अपना शुगर लेवल डायग्नोस कर इंसुलिन की मात्रा लेनी पड़ती है. प्रो. रुद्र प्रताप ऐसी डिवाइस पर काम कर रहे हैं जिसे आसानी से मरीज की बॉडी में इम्प्लांट किया जा सकेगा. यह डिवाइस ऑटोमेटिक आपके ब्लड का शुगर लेवल पता करेगी और इस डिवाइस में मौजूद इंसुलिन की मात्रा इसी हिसाब से बॉडी में रिलीज होगी. उन्होंने बताया कि यह डिवाइस डायबिटीज के मरीजों के लिए वरदान साबित होगी. इम्प्लांट के बाद यह डिवाइस खुद ब खुद वर्क करेगी.
World level की lab बनाने का श्रेय
मूलरूप से बलिया के रहने वाले प्रो. रुद्र प्रताप इस समय बंग्लुरू के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के सेंटर फॉर नैनो साइंस एंड इंजीनियरिंग के चेयरमैन हैं. वह 1996 में विदेश से इंडिया आए थे और फिर उन्होंने यहां पर वल्र्ड लेवल की नैनो लैब डेवलप की है. वल्र्ड की टॉप थ्री लैब में यह शामिल है. जिसका श्रेय प्रो. प्रताप को जाता है. उन्होंने बताया कि प्रजेंट में विदेशी साइंटिस्ट्स भी इस लैब में रिसर्च करने आते हैं और यही रीजन है कि इंडिया कहीं से भी नैनो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में दूसरे देशों से पीछे नहीं है.
Science  के प्रति लगाव खींच लाया
फिजिक्स, केमेस्ट्री और मैथ के प्रति स्टूडेंट्स का रुझान बढ़ाने के लिए गवर्नमेंट की ओर से इंस्पॉयर प्रोग्राम चलाया जा रहा है. इसी के तहत बीबीएस कॉलेज में पांच दिनी साइंस विंटर कैंप इंस्पॉयर का आयोजन किया गया है, जो 17 से 21 जनवरी तक चलेगा. इस कैंप में यूपी बोर्ड व सीबीएसई के 233 मेरिटोरियस स्टूडेंट्स को इनवाइट किया गया था. इनमें से 213 ने प्रोग्राम के पहले दिन हाजिरी दर्ज कराई. कड़ाके की ठंड के बीच पहुंचे स्टूडेंट्स ने बताया कि साइंस के प्रति नई चीजों को सीखने के लिए यह बेहतरीन मौका है और वह इसे ड्रॉप नहीं करना चाहते थे.
एक्स वीसी ने जीरो के बारे में बताया
 दूसरे लेक्चर में सीएसजेएम यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति और यूपीपीएससी के अध्यक्ष प्रो. केवी पांडेय ने जीरो और प्राचीन चिकित्सा पद्धति पर लेक्चर दिया. इनॉगरेशन प्रो. रुद्र प्रताप ने किया था. प्रोग्राम में बीबीएस ग्रुप के वाइस चेयरमैन दिलीप सिंह, कुलदीप सिंह, डायरेक्टर जनरल वीएल अस्थाना सहित कई लोग मौजूद रहे. सैटरडे को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रुड़की के प्रो. विनोद गुप्ता और सेंटर फॉर अप्लीकेबल मैथमेटिक्स, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च सेंटर बंग्लुरु के प्रो. पीएन श्रीकंठ लेक्चर देंगे.


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