बरेली अंदर मरीज ने दम तोड़ा बाहर डाॅक्टर बताते रहे खतरे में नहीं जान

2019-05-01T10:00:27+05:30

सिद्धि विनायक हास्पिटल का मामला तीमारदारों ने प्रबंधन पर लगाया लापरवाही का आरोप तीमारदारों की मांग पर सीएमओ ने जांच के लिए पैनल किया गठित

 

BAREILLY: प्राईवेट हॉस्पिटल में तीमारदार अपने मरीजों को बेहतर इलाज के लिए ले जाते हैं। लेकिन मुनाफाखोरी और तीमारदार की मजबूरी का फायदा उठाकर डॉक्टर मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला शहर के सिद्धि विनायक हॉस्पिटल में सामने आया है। यहां 13 अप्रैल को भर्ती सड़क हादसे में घायल मरीज की हालत डॉक्टर खतरे से बाहर बताते रहे, लेकिन करीब 24 घंटे बाद मरीज की की मौत हो गई। तीमारदारों ने अस्पताल से अपने मरीज के इलाज का ब्योरा मांगा तो वह भी नहीं दिया गया। परेशान परिजनों ने मामले की शिकायत सीएमओ से की तो उन्होंने मामले की जांच के लिए पैनल गठित कर दिया है।

क्या है मामला
उत्तराखंड के मझोला निवासी अमित अग्रवाल 13 अप्रैल को किसी काम के लिए बरेली अपनी कार से आ रहे थे। पीलीभीत के ललौरीखेड़ा ब्लॉक के पास उनकी कार का एक्सीडेंट हो गया। जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आई। उन्हें फौरन पीलीभीत के जिला अस्पताल में पुलिस ने भर्ती कराकर परिजनों को सूचना दी। जहां जरूरी जांचे करवाने के बाद परिजन उन्हें शाम करीब सात बजे बरेली के सिद्धि विनायक अस्पताल ले आए। यहां रिपो‌र्ट्स देखने के बाद डॉ। ब्रजेश्वर सिंह ने उन्हें बताया कि मरीज की दो पसलियों और कूल्हे की हड्डी में फ्रैक्चर है। खतरे की कोई बात नहीं है। आरोप है कि 14 अप्रैल को करीब दो बजे परिजनों को बताया गया कि पसलियां टूटने से उनके चेस्ट में ब्लड क्लाट्स हो गए हैं। इसलिए ब्लड निकलना पड़ेगा। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने एक यूनिट खराब ब्लड निकालने की बात कहीं थी लेकिन अमित की बॉडी से कई यूनिट ब्लड निकाला गया। जिस कारण उन्होने 14 अप्रैल को शाम करीब सात बजे दम तोड़ दिया। इसके बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कोतवाली पुलिस को तहरीर दी थी। वही परिजनों को कहना है कि अमित को भर्ती कराते वक्त प्रबंधन ने इलाज का पूरा खर्चा 25 हजार रुपये बताया था, लेकिन बाद में जांचों के नाम पर कई गुना ज्यादा वसूल किए गए।

डॉक्टरों से हुई थी नोकझोंक
जब अमित की बॉडी से डॉक्टर ब्लड निकाल रहे थे तो छोटे भाई कपिल ने इसका विरोध भी किया था लेकिन बावजूद इसके डॉक्टर नहीं माने। इसे लेकर कपिल की डॉक्टर से नोकझोंक भी हुई।

कार्बन डाई ऑक्साइड लेवल बढ़ने से हुई अमित की मौत
जब डाक्टर अमित की बॉडी से ब्लड निकाल रहे थे, इस दौरान अमित की हालत बिगड़ने लगी। डॉक्टर ने बाहर आकर परिजनों को बताया कि कार्बन डाई आक्साईड लेवल अधिक हो गया है। आप इन्हें दिल्ली ले जाओ। जब परिजनों ने दिल्ली के मेदांता अस्पताल में संपर्क किया तो और रिपोर्ट की जानकारी दी तो मेदांता के डॉक्टर ने रिपोर्ट का आंकलन करने के बाद कहा कि स्थिति बहुत खराब है यहां आने से पहले ही पेसेंट की डेथ हो सकती है।

मृतक के भाई की बात
14 अप्रैल को डेथ होने के बाद भाई के इलाज की रिपोर्ट मांगी तो अस्पताल प्रबंधन ने देने से इंकार कर दिया। जिसके बाद सीएमओ को कार्रवाई करने के लिए पत्र दिया है।

कपिल अग्रवाल

अस्पताल प्रबंधन की बात
जो भी आरोप तीमारदार लगा रहे हैं वह निराधार हैं। जब अमित को भर्ती कराया गया था। उसका वजन भी अधिक था। हालत नाजुक थी कूल्हे के साथ ही दो पसलियां भी टूटी थीं। इसलिए उसे दिल्ली रेफर किया गया लेकिन परिवार वाले मरीज को नहीं ले गए। इसके प्रबंधन को कोई फाल्ट नहीं है।

डॉ। ब्रिजेश्वर सिंह, सिद्धि विनायक हास्पिटल।

मामला मेरे संज्ञान में है। अमित को चोट लगी थी, परिवारों वालों का आरोप है कि डॉक्टरों ने पहले उसे खतरे से बाहर बताया बाद में उसकी मौत हो गई। यह जांच का विषय है। जिसके लिए पैनल का गठन कर दिया गया है। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद कार्रवाई की जाएगी।

डॉ। विनीत कुमार शुक्ला, सीएमओ।


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