जांच से परेशान गोरखपुरवासी लौटे आयुर्वेद के रास्ते

2018-12-15T06:00:03+05:30

-जिला अस्पताल के आयुष विंग में बढ़ रही मरीजों की तादाद

-एलोपैथी का दुष्प्रभाव देखते हुए देसी दवाओं को तरजीह दे रहे लोग

GORAKHPUR: अंग्रेजी दवाओं और जांच से परेशान गोरखपुराइट्स इन दिनों आयुर्वेद इलाज को तरजीह देने लगे हैं। बीते कुछ महीनों में जिला अस्पताल परिसर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की तरफ से संचालित आयुष विंग पहुंचने वाले मरीजों की तादाद में इजाफा हुआ है। पहले जहां यहां की ओपीडी में डेली जहां 40 से 50 मरीज आते थे, वहीं इधर इनकी संख्या 60 से 70 हो चुकी है।

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इनमें ज्यादातर मरीज ऐसे हैं जिन्हें काफी समय से एलोपैथ इलाज के बाद भी फायदा नहीं मिल रहा था। साथ ही जांच की परेशानियों से जूझना पड़ रहा था।

जिला अस्पताल परिसर में संचालित आयुष विंग में यूनानी, होम्योपैथी व आयुर्वेद पद्धति से मरीजों का इलाज होता है। आयुर्वेद विंग में इन दिनों मरीजों की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है। यहां तैनात आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ। आशीष त्रिपाठी कहते हैं कि एलोपैथिक दवाओं के साइडइफेक्ट के डर से काफी लोग आयुर्वेदिक इलाज का रुख कर रहे हैं। आयुष विंग की बात करें तो यहां आने वाले जोड़, पेट, बुखार, सर्दी, जुखाम, चर्म रोग, बीपी और शुगर के मरीजों की संख्या में पहले से बढ़ोत्तरी हो गई है। डॉ। आशीष त्रिपाठी बताते हैं कि जिन मरीजों को एलोपैथिक दवाओं से फायदा नहीं मिलता वे इस विद्या को तेजी से अपना रहे हैं। पहल जहां आयुष विंग की ओपीडी में डली 40 से 50 मरीज आ रहे थे। वहीं वर्तमान में डेली 60 से 70 लोग यहां पहुंच रहे हैं।

कोट्स

पिछले काफी समय से चर्म रोग की शिकायत थी। एलोपैथिक दवा का प्रयोग किया लेकिन ठीक नहीं हुआ तो आयुर्वेद विशेषज्ञ के पास पहुंचा। दवा प्रॉपर तौर पर चल रही है। अब बिल्कुल ठीक हूं।

- किरन सिंह, कुशीनगर

गैस की समस्या पिछले काफी समय से है। एलोपैथी में कई डॉक्टर्स से दिखाया और दवा भी खाई। दवा खाने पर फायदा मिलता था लेकिन फिर दिक्कत बढ़ जाती थी। दूसरे की सलाह पर अस्पताल मेमं आयुर्वेद पद्धति से इलाज करा रहा हूं जिससे बहुत राहत मिली है।

- राधेश्याम, बड़हलगंज

आर्मी से रिटायर्ड हूं। शरीर और पेट के दर्द से परेशान रहता था। एलोपैथिक दवाओं का काफी प्रयोग किया लेकिन फायदा नहीं मिला। फिर आयुष विंग में आयुर्वेद दवा का प्रयोग करना शुरू किया। अब काफी राहत महसूस कर रहा हूं।

- राम कृपाल यादव, तारामंडल

कई महीनों से चर्म रोग से परेशान थी। चर्म रोग विशेषज्ञ से भी दिखाया। हजारों रुपए की दवा भी खाई लेकिन फायदा नहीं मिला। आयुर्वेद दवा का इस्तेमाल करने से बिल्कुल ठीक हूं।

- नीलम पांडेय, खजनी

पेट की समस्याओं से पिछले कई दिनों से जूझ रहा था। किसी ने बताया कि जिला अस्पताल के आयुष विंग में आयुर्वेद से इलाज कराएं। चार माह से इलाज करा रहा हूं। आयुर्वेद दवा से ठीक हूं।

- धीरेंद्र प्रसाद मिश्र, अंबेडकर नगर

वर्जन

आयुर्वेदिक पुरानी पद्धति है। आज भी लोग इससे ही इलाज कराना पसंद कर रहे हैं। एलोपैथी के दुष्प्रभाव की वजह से लोग देसी दवाएं भी यूज करना पसंद कर रहे हैं। इसलिए मरीजों का रुझान बढ़ा है।

- आशीष त्रिपाठी, आयुर्वेद विशेषज्ञ, आयुष विंग

inextlive from Gorakhpur News Desk


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