अब गंगा पर कब्जा नदी तट से 8 मीटर बाद बना मकान लेखपाल ने कागज पर दिखाया 200 मीटर दूर

2019-05-11T06:01:01+05:30

अधिकारियों की मिलीभगत से गंगा के रीवरबेड पर मकान बनाए जा रहे हैं। इस पर लेखपाल ने फर्जी रिपोर्ट लगाकर मकान को 200 मीटर दूर दिखाया पर जांच में पता चला पहला मकान गंगा से महज 8 मीटर और दूसरा 80 मीटर की दूरी पर है। दोनों ही गंगा के डूब क्षेत्र में होने के चलते अधिकारियों में हड़कंप मच गया और डीएम ने मामले में रिपोर्ट तलब करके जिम्मेदारों पर विभागीय कार्रवाई करने के दिए निर्देश दिए।

KANPUR : गंगा को साफ-स्वच्छ और अविरल बनाने के लिए अरबों रुपए पानी की तरह बहाए जा रहे हैं। जबकि दूसरी ओर सरकारी अफसरों ने इसे अवैध कमाई की गंगा बना दिया है। गंगा के पानी को दूषित करने के साथ ही गंगा की जमीन पर भी खुलेआम कब्जा किया जा रहा है। एनजीटी के नियम हवा में उड़ाए जा रहे हैं। लेखपाल, राजस्व निरीक्षक, सिंचाई विभाग के अधिकारी तक इस 'खेल' में शामिल हैं। गंगा के जलमग्न क्षेत्र को कब्जाने और उस पर मकान बनाने के ऐसे ही एक मामले का खुलासा हुआ है। कागजों में निर्माणाधीन मकान को गंगा से 200 मीटर दूर दिखाया गया है, जबकि तहसील में दर्ज डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक वह गंगा का रीवर बेड (जलमग्न क्षेत्र) है। मामला संज्ञान में आने के बाद डीएम विजय विश्वास पंत ने रिपोर्ट तलब कर गंगा के गुनहगारों को पर कार्रवाई करने का फरमान जारी किया है।

इस प्रकार है पूरा मामला

केडीए में भवन का नक्शा पास कराने के लिए 20 फरवरी 2019 को डॉक्यूमेंट दिए गए। डॉक्यूमेंट के मुताबिक नजूल फ्री होल्ड प्लाट संख्या-366,399 और 403 परिसर संख्या 13फ्/70 परमट और भवन संख्या-15भ्/80 सिविल लाइंस को गंगा से क्रमश: 525 मीटर व 200 मीटर दूर दिखाया गया है। मामले की जांच एडीएम फाइनेंस वीरेंद्र पांडेय को दी गई। 1 अप्रैल 2019 को मामले की फिर जांच कराई गई। जांच में गंगा से इनकी वास्तविक दूरी 10 मीटर औ80 मीटर पाई गई।

गंगा नदी का क्षेत्र
एसडीएम सदर अमित कुमार ने गंगा के क्षेत्र की जांच की तो जमीन शंकरपुर राजस्व ग्राम की आराजी संख्या 500 मीटर रकबा 1.58 हेक्टेअर जलमग्न जमीन के खाता संख्या-184 पर दर्ज है। इसका मतलब यह है कि वह गंगा नदी का जलमग्न क्षेत्र है। ऐसे में गंगा नदी पर निर्माण को देखते हुए फौरन ही निर्माणकर्ता पर कार्रवाई के आदेश दिए गए और निर्माण कायर्1 को रोक दिया गया।

 

दोषी लेखपाल रिटायर

मामले में दोषी पाए लोधवाखेड़ा क्षेत्र के लेखपाल संतोष पांडेय ने गलत रिपोर्ट दी थी। वह अपने पद से रिटायर भी हो चुके हैं। उनकी जगह पर आए लेखपाल नंदलाल की ओर से भी रिपोर्ट को आगे बढ़ा दिया गया है। ऐसे में उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसके अलावा अधिशाषी अभियंता, निचली गंगा नहर को संबंधित कर्मचारी पर कार्रवाई करने के निर्देश डीएम ने दिए हैं.  मामला काफी गंभीर है। पूरी जांच कर लेखपाल पर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। साथ ही ऐसे अन्य मामलों की भी जांच कराई जा रही है। एनजीटी के नियमों का पालन हर हाल में किया जाएगा।

-विजय विश्वास पंत, डीएम।

लेखपाल की गलत रिपोर्ट के चलते केडीए में नक्शा पास कराने के लिए डॉक्यूमेंट दिए गए थे। एसडीएम सदर और मेरे द्वारा जांच कराई गई है। दोषियों पर कार्रवाई की जा रही है।

-वीरेंद्र पांडेय, एडीएम फाइनेंस।


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