अब शादीब्याह या निजी कार्यक्रमों में नहीं बुक होंगे यूपी पुलिस के घोड़े

2019-01-23T09:19:21+05:30

अब यूपी पुलिस के घोड़ों की बदौलत भौकाल मेंटेन करना मुश्किल होगा

-प्राइवेट कार्यक्रमों में बुक नहीं किए जा सकेंगे पुलिस के घोड़े

-शान बघारने के लिए प्राइवेट कार्यक्रमों में लोग बुलाते थे घुड़सवार

Gorakhpur@inext.co.in
GORAKHPUR: यूपी पुलिस के घोड़ों की बदौलत भौकाल मेंटेन करना मुश्किल होगा. शादी-विवाह, बर्थडे सहित अन्य निजी कार्यक्रमों में पुलिस के घुड़सवार को दरवाजे पर खड़ा कर शान बघारने पर शासन ने रोक लगा दी है. पुलिस विभाग के घोड़े प्राइवेट कार्यक्रमों में शिरकत नहीं कर सकेंगे. राजकीय कामों के अलावा इनका इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घोड़ों के निजी कार्यक्रमों में शामिल होने पर रोक लगा दी गई है. इसलिए आगे से इनकी सुविधा नहीं मिल पाएगी.

शान बढ़ाने को बुलाए जाते थे पुलिस के घोड़े
शहर में आयोजित होने वाले बड़े निजी कार्यक्रमों में पुलिस के घुड़सवार बल शान बढ़ाते थे. शादी-विवाह, बर्थडे पार्टी, सेलिब्रेशन और अन्य निजी आयोजनों में लोग पुलिस के घोड़ों की डिमांड करते थे. निर्धारित किराया जमाकर घोड़ों की बुकिंग हो जाती थी. तय समय पर घंटे के हिसाब से पुलिस का घुड़सवार बल मौके पर पहुंचकर खड़ा हो जाता था. पुलिस के घोड़ों का अरेंजमेंट करने के लिए लोग पुलिस अधिकारियों से जुगाड़ लगाते थे. इसलिए कई बार किसी वीवीआईपी, प्रतिष्ठित अधिकारी या अन्य किसी प्रभावशाली की पैरवी पर आसानी से घोड़ों की बुकिंग हो जाती थी. 21 जनवरी को एडीजी, लॉजिटिक्स विजय कुमार मौर्य की तरफ से जारी निर्देश में घुड़सवार पुलिस-घोड़ों को राजकीय कार्यक्रम के अलावा कहीं पर भेजने प्रतिबंधित कर दिया है. इसलिए आगे से पुलिस के घोड़ों की बुकिंग नहीं हो पाएगी.

गोरखपुर में नौ घोड़े, पांच की कुंभ मेला ड्यूटी
जिले में पुलिस के पास वर्तमान में नौ घोड़े हैं. इनमें पांच घोड़ों को कुंभ मेला ड्यूटी के लिए प्रयागराज भेज दिया गया है. चार घोड़े पुलिस लाइन के घुड़साल में बंधे हैं. आमतौर पर घोड़ों का कोई उपयोग न होने से शहर की शादियों में इनकी बुकिंग होती थी. पिछले साल करीब 20 जगहों पर बुकिंग हुई थी. घुड़साल से जुड़े लोगों का कहना है कि पहले 15 हजार रुपए बुकिंग रेट था. बुकिंग का अप्रूवल एसएसपी के जरिए मिलता था. निर्धारित रकम जमा कराने पर पुलिस के घोड़े प्राइवेट कार्यक्रमों में भेज दिया जाते थे. कुंभ मेला ड्यूटी में घोड़ों के भेजे जाने से घुड़सवार दल की पेट्रोलिंग भी नहीं हो पा रही है.

हार्स राइडिंग होती तो बढ़ जाता यूज
पुलिस लाइन में हार्स राइडिंग की कोई व्यवस्था नहीं है. इसलिए वीआईपी मूवमेंट और निजी कार्यक्रमों के अलावा घोड़ों का कोई यूज नहीं हो पाता था. एसएसपी के निर्देश पर कभी-कभार बाजारों में गश्त कराई जाती थी. पुलिस लाइन में हार्स राइडिंग की व्यवस्था के अभाव में घोड़ों की सवारी की प्रैक्टिस नहीं हो पाती. इसलिए पहले से ट्रेंड पुलिस कर्मचारी इनकी सवारी कर पाते हैं. पुलिस लाइन में नौ घोड़ों के लिए कुल सात कर्मचारी हैं. इनमें दो सईस हैं जो घोड़ों की देखभाल करते हैं.

घुड़सवार बल की सदस्य
दो घोड़ी- निशा और कैटरीना

घोड़े- चेतक, प्रिंस, ट्रेकर, केशरी, योद्धा, अनुपम, गौरव,

इतनी है इनकी खुराक
-घोड़ों की देखभाल के लिए दो सईस रखे गए हैं.

-एक घोड़ा रोजाना दो किलो चना खा जाता है.

-चना के अलावा घोड़ों को दो किलो जौ का आहार दिया जाता.

-घास के साथ एक किलो चोकर खिलाने की व्यवस्था है.


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