यहां छिपे कितने बदमाश हमें बताओ

2019-04-13T06:00:41+05:30

-परदेस में क्राइम करके बढ़ा रहे गोरखपुर पुलिस का सिरदर्द

-बांसगांव में सोना बरामदगी के बाद खंगाली जा रही कुंडली

GORAKHPUR: परदेस में क्राइम कर गोरखपुर में पनाह लेने वाले बदमाशों की कुंडली तैयार होगी। शहर के भीतर उनको संरक्षण देने वालों पर शिकंजा कसेगा। उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस अधिकारियों ने मन बना लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परदेस में अपराध करके यहां छिपे हुए बदमाशों की गिरफ्तारी के बाद मामले सामने आते हैं। इसलिए सभी का ब्यौरा तैयार किया जाएगा। पूर्व में सामने आई घटनाओं पर फोकस करते हुए जांच पड़ताल की जाएगी।

गिरफ्तारी से होती किरकिरी, फेल मानते इंटेलीजेंस

शहर में होने वाले अपराधों में शामिल बदमाशों की धर-पकड़ के लिए पुलिस कार्रवाई करती है। लेकिन शहर के अलावा अन्य किसी दूसरी जगह पर वारदात करके यहां पनाह लेने वालों के बारे में जानकारी नहीं मिल पाती। बाहर से आकर पुलिस जब छिपे हुए बदमाशों को पकड़ती है तब लोकल टीम मामला जान पाती है। ऐसे में लोकल पुलिस की काफी किरकिरी होती है जबकि यह भी माना जाता है कि लोकल पुलिस का इंटेलीजेंस फेल है। ऐसे हालात से निपटने के लिए पुलिस हर तरह की सूचनाओं को अपडेट रखेगी। लोकल इंटेलीजेंस को मजबूत किया जाएगा।

पूर्व में कितने बदमाश हुए अरेस्ट, तैयार होगी सबकी कुंडली

शहर में आकर पनाह लेने वाले बदमाशों की धर-पकड़ होती रहती है। हर साल दो से तीन लोगों को पुलिस अरेस्ट करती है। पूर्व में कितने मामलों में यहां छिपे बदमाशों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इसका रिकॉर्ड भी तैयार कराने की तैयारी है। पूर्व में पकड़े गए शातिरों की कुंडली खंगालकर रिकॉर्ड मेंटेन किया जाएगा। इसका फायदा यह मिलेगा कि अपने क्षेत्र में शराफत का चोला ओढ़कर घूमने वाले आसानी से बेनकाब हो सकेंगे।

केस 1

11 अप्रैल 2019: मुंबई की एक गोल्ड लोन कंपनी में तैनात सिक्योरिटी कर्मचारी परमानंद 10 किलो सोना चुराकर गोरखपुर भाग आया था। गुरुवार को मुंबई पुलिस गोरखपुर पहुंची। बांसगांव पुलिस से मदद लेकर उसे अरेस्ट किया। गुलरिहा के शिवपुर सहबाजगंज मोहल्ला निवासी परमानंद यादव एक सप्ताह पूर्व गोरखपुर आया। सोना लेकर वह अपनी बहन के घर में जाकर चोरी-छिपे रहने लगा।

केस 2

16 सितंबर 2018: हिमाचल प्रदेश के पचरुखिया, कंडवारी निवासी रिटायर्ड फौजी अनूप खत्री की हत्या करके उनके फार्म हाउस में डेडबॉडी छिपा दी गई थी। इस आरोप में हिमाचल प्रदेश की पुलिस ने बेलघाट के टीकापुर में रहने वाले निरंजन को अरेस्ट किया। उसने अपने साथियों बेलघाट के टीकापुर निवासी सूरज, सिकरीगंज के राजेंद्र यादव के साथ मिलकर वारदात की थी।

केस 3

30 अगस्त 2017: बिहार के 50 हजार के ईनामी बदमाश महेश राय को एसटीएफ ने बौलिया रेलवे कॉलोनी से अरेस्ट किया। कॉलोनी के 615 नंबर बिल्डिंग में छिपकर रह रहे बदमाश की तलाश में बिहार की एसटीएफ लगी थी। छपरा, अवतारनगर के रामगढ़ा निवासी महेश के खिलाफ एक दर्जन से अधिक संगीन मामले दर्ज थे।

क्या होता है नुकसान

परदेस में क्राइम करके गोरखपुर में पनाह लेने वालों के बारे में पुलिस के पास कोई जानकारी नहीं होती।

पेशेवर क्रिमिनल भी सफेदपोश बनकर क्षेत्र में घूमते रहते हैं। अपनी छवि से वह हनक कायम करते हैं।

रिकॉर्ड के अभाव में पुलिस उनके बारे में कोई जानकारी नहीं जुटा पाती। पुलिस की पकड़ से वह दूर होते हैं।

अपराध दर्ज होने के बावजूद लाइसेंसी असलहा, चरित्र प्रमाण सहित अन्य लेने में बदमाश कामयाब हो जाते हैं।

यह होगा फायदा

किस जिले, कब, कौन बदमाश पकड़ा गया था। उसके बारे में पूरी जानकारी रहेगी।

एक जगह पर अपडेट डाटा होने से बदमाश आसानी से पुलिस को धोखा नहीं दे पाएंगे।

एनसीआरबी, एससीआरबी और डीसीआरबी के रिकॉर्ड से मिलान में सहूलियत मिलेगी।

थानों पर डिटेल होने से हर कोई ऐसे बदमाशों के बारे में पूरी जानकारी ले सकेगा।

वर्जन

क्राइम करने वाले बदमाश अक्सर किसी दूसरी जगह पर पनाह लेते हैं। ऐसे में उनके बारे में सटीक जानकारी नहीं मिल पाती। इसलिए ऐसे बदमाशों का पूरा रिकॉर्ड जुटाया जाएगा। ताकि आने वाले समय में किसी तरह की प्रॉब्लम न हो सके।

- प्रवीण सिंह, सीओ क्राइम ब्रांच

inextlive from Gorakhpur News Desk


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