झुग्गी झोपडि़यों में तो नहीं रह रहे हैं बांग्लादेशी

2019-02-05T06:00:22+05:30

- पूर्व में शहर में मिल चुके हैं रोहिंग्या और बांग्लादेशी

- झोपड़ी में रहने वालों का सत्यापन, संदिग्धों से पूछताछ

आगरा। रोहिंग्या और बांग्लादेशियों की तलाश में पुलिस हर झुग्गी-झोपड़ी पर दस्तक दे रही है। इनमें रहने वालों की हर जानकारी जुटा रही है। उनका रिकॉर्ड मेनटेन कर रही है। पूर्व में रोहिंग्या और बांग्लादेशियों के शहर में पकड़े जाने के बाद इस बार पुलिस कोई रिस्क लेना नहीं चाहती। हर संदिग्ध पर नजर रखी जा रही है।

पुलिस पूरी तरह कर रही जांच

सभी थाना क्षेत्र की पुलिस अपने-अपने एरिया में झुग्गी-झोपड़ी बनाकर रहने वाले लोगों की जांच कर रही है। पुलिस एक झोपड़ी से दूसरी झोपड़ी तक जा रही है। लोगों का मूल निवास क्या है। यहां पर कितने सालों से रह रहे हैं। क्या-क्या काम करते हैं। इनका कोई आपराधिक इतिहास तो नहीं आदि सभी पहलुओं की जांच चल रही है। उनके मूल निवास के थाना क्षेत्रों से उनकी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस की कोशिश है कि कहीं भी कोई अपराधी या बाहरी व्यक्ति नाम और धर्म बदल कर न रह रहा हो।

कहीं भी बना लेते हैं आशियाना

पूर्व में शहर के अंदर म्यामांर व बांग्लादेश के लोगों ने घुसपैठ कर दी। म्यामार से आए लोगों पर तो रिफ्यूजी कार्ड मिला पर बांग्लादेशियों पर कुछ नहीं था। सिकंदरा पुलिस ने रुनकता में रह रहे एक परिवार को जेल भी भेजा था। बाहर से आने वाले लोग खाली मैदान देखते हैं जहां पर टेंट लगा कर पूरा परिवार गुजर बसर करता है।

रोहिंग्या आए थे पुलिस के हाथ

6 अक्टूबर 2018 को आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन पर पुलिस के हाथ 16 रोहिंग्या लगे थे। एक यात्री को उनकी भाषा पर शक हुआ तो उसने पुलिस को खबर दी। पुलिस ने जब जांच की तो सभी के साथ संयुक्त राष्ट्र संघ का रिफ्यूजी कार्ड मिला। इन 16 शरणार्थियों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। पूछताछ के बाद पुलिस ने सभी को छोड़ दिया लेकिन इनकी पूछाताछ में रुनकता में रहे रहे बांग्लादेशी परिवार का पर्दाफाश हो गया।

15 साल पहले आया था गाजी

उस दौरान खुलासा हुआ कि बांग्लादेशी मूल का गाजी 15 साल पहले अवैध रूप से बार्डर क्रॉस कर कोलकाता आया था। कुछ दिन वहां रहने के बाद वह मथुरा में आकर रहने लगा। उसकी पत्‍‌नी रत्‍‌ना के मथुरा में बेटा समीम और बेटी सरमीन पैदा हुई। आठ साल पहले वह रुनकता में आ गया।

गाजी ने बनवा लिए आधार कार्ड

गाजी ने अपने और पत्‍‌नी के साथ सभी बच्चों के भी आधार कार्ड बनवा लिए थे। उसने वोटर आइडी कार्ड और जाति प्रमाण पत्र बनवाकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में अकाउंट भी खुलवा लिया। उसने कई बार मतदान भी किया। पुलिस ने गाजी, उसकी पत्‍‌नी और चारों बच्चों के खिलाफ धोखाधड़ी और पासपोर्ट अधिनियम और विदेशी विषयक अधिनियम की धारा 14 के तहत मुकदमा दर्ज किया था।

धर्म परिवर्तन कांड के बाद गायब हो गए बांग्लादेशी

वर्ष 2014 में वेद नगर प्रकरण सभी को याद होगा। धर्म परिवर्तन कांड से प्रकाश में आया वेद नगर लोगों की जुबांन पर है। वहां पर भी रहने वाले लोगों के बांग्लादेशी होने की आशंका थी। इसकी भी जांच हुई थी। धीरे-धीरे वहां से लोग निकल गए और एरिया खाली हो गया।

जाली नोटों की बांग्लादेशी सौदागर आई थी हाथ

थाना एत्मादउद्दौला सुशील नगर से फरवरी 2017 में बांग्लादेशी महिला फातिमा को एनआईए व एटीएस की संयुक्त कार्रवाई से उसका पकड़ा। फातिमा जाली नोटों का काम करती थी। उसने शहर में जाली नोटों को चलन में ला दिया। वह नकली नोटों के सौदागरों के साथ काम काम करती थी। कैरियर के माध्यम से रुपये यहां पर आते थे।

गरीब बनकर रहती थी महिला

फातिमा का रहन-सहन गरीबों की तरह था। पति मजदूरी करता था और वह खुद सब्जी मंडी में सब्जी की ठेल लगाती थी। कई बार उसने आस पास के ठेल वालों को नकली नोट दिए। टोकने पर वह सबसे गाली-गलौज करने लगती थी। कोई उससे बात नहीं करना चाहता था। उसकी गिरफ्तारी ने सभी को चौंका दिया था। नोटबंदी के दौरान नोट खपाने में उसकी भूमिका रही थी।

inextlive from Agra News Desk


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