होलिका जली और चढ़ गया शहर का पारा

2019-03-23T06:01:03+05:30

-होलिका दहन के बाद बढ़ी गर्मी और एयर पॉल्यूशन का लेवल

-हवा में घुला जहर, सांस लेने हुआ मुश्किल

दीपावली पर एयर पॉल्यूशन का लेवल बढ़ने की बात सामान्य है लेकिन होली में भी ऐसा हो तो सोचना को मजबूर होना पड़ेगा। यह कड़वा सच है कि पहले से प्रदूषित शहर में होलिका दहन की वजह से पॉल्यूशन लेवल बढ़ गया वो भी इतना कि शहर का टेम्परेचर भी बढ़ गया। इसकी वजह से सांस के मरीजों की मुसीबत भी बढ़ गई है। वहीं चिकित्सकों का कहना हैं कि होली के दिन सांस के मरीजों की समस्याएं बढ़ गई है। उनमें यह समस्या होलिका जलने के बाद आई है।

मानक से अधिक स्तर पॉल्यूशन

बनारस की आबोहवा पर नजर रखने वाली संस्था एयर फॉर केयर के मुताबिक होलिका दहन की रात शहर का ऐसा कोई क्षेत्र नहीं बचा जहां पॉल्यूशन न बढ़ा हो। होली के दिन शहर में पीएम 2.5 का स्तर कहीं 380 से 500 के ऊपर, जबकि पीएम 10 का स्तर 500 से 700 से ज्यादा पाया गया। पीएम 2.5 और पीएम 10 का यह स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्वच्छता मानकों की तुलना में बेहद प्रदूषित रहा। सिटी में सबसे अधिक प्रदूषित क्षेत्र डीएलडब्ल्यू, चितईपुर, मंडुवाडीह, महमूरगंज रोड रहा जहां पीएम 2.5 व पीएम 10 का स्तर मानक से बेहद ऊपर रहा।

होलिका में डाल दिया गंदगी

-शहर पहले ही तमाम अव्यवस्थाओं की वजह से एयर पॉल्यूशन की मार झेल रहा है।

-होलिका की आग से निकलने वाली लपटों को वजह से स्थिति बिगड़ रही है।

-होलिका में सूखी लकड़ी, ऊपला आदि पर्यावरण को शुद्ध करने वाली चीजें डालने का विधान है

-कंक्रीट के जंगल में तब्दील शहर में होलिका के लिए लकड़ी जुटाना मुश्किल है

-सूखी लकड़ी महंगी होने की वजह से लोगों ने कूड़ा-करकट भी होलिका में डाल दिया

-होलिका में बड़ी मात्रा में पॉलिथिन, प्लास्टिक प्रोडक्ट, घरों से निकले अनुपयोगी सामान डाल दिया गया

-इन सामानों की वजह से वातावरण शुद्ध होने की बजाय प्रदूषित हो गया

सेहत के लिए खतरनाक

एयर पॉल्यूशन का मानव स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। चिकित्सकों की मानें तो कोयला, डीजल, पेट्रोल, कचरा या अन्य सामग्री जलने से पीएम 2.5 कणों का निर्माण होता है, जबकि शहर में लगातार उड़ रही धुल से पीएम 10 कण बनते हैं। ये दोनों ही स्वास्थ्य पर खराब प्रभाव डालते हैं। पीएम 2.5 सांस की नली के माध्यम से फेफड़े पर सीधा हमला करता है। वहीं पीएम 10 कणों से त्वचा की बीमारियां, एलर्जी आदि रोग बढ़ते हैं।

शहर में एक साथ सैकड़ों एरिया में होलिका दहन होने के बाद पॉल्यूशन का लेवल बढ़ा है। इस रोकने में जिला प्रशासन को अपने स्तर पर प्रयास करने की जरूरत है, जो कि नहीं हो रहा।

एकता शेखर, मुख्य अभियानकर्ता, द क्लाइमेट एजेंडा

होलिका दहन के बाद पहले से बीमार सांस के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। होली की शाम ओपीडी में कई सांस के मरीज जांच के लिए पहुंचे उन्हें यह समस्या होलिका दहन के बाद से आई थी।

डॉ। एसके पाठक, ब्रेथ ईजी, टीबी, चेस्ट, एलर्जी केयर सेंटर

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पॉल्यूशन कंट्रोल के सुझाव

-कहीं भी कूड़ा-कचरा न जलाएं और न जलाने दें

-सार्वजनिक वाहनों का प्रयोग अधिक से अधिक करें

-घर के आस-पास पेड़-पौधे लगाकर हरियाली बनाएं

-पॉल्यूशन रोकने के लिए अपने वाहनों की समय-समय पर जांच कराएं

-साइकिल का अधिक प्रयोगा भी पॉल्यूशन लेवल को मेंटेन करता है

एक नजर

-इंडियन इंडेक्स के अनुसार

100

होना चाहिए पीएम 10 का स्तर

60

से ज्यादा नहीं होना चाहिए पीएम 2.5 का स्तर

700

से ज्यादा रहा पीएम 10 का स्तर होली के दिन लेवल

500 से ज्यादा रहा होली के दिन पीएम 2.5 का स्तर

1400

होलिका जलीं शहर भर में

inextlive from Varanasi News Desk


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