यहां पर सिर्फ सिलाई ही सीख पाए बंदी

2019-04-20T06:00:58+05:30

-मंडलीय कारागार में बंदियों के लिए नहीं मिल सका रोजगार

-पांच साल पूर्व लौट गया प्रपोजल, योजनाएं नहीं चढ़ी परवान

GORAKHPUR: मंडलीय कारागार गोरखपुर के बंदियों के लिए रोजगार के साधन मुहैया नहीं हो सके हैं। पांच साल पूर्व बनी योजना के वापस होने से बंदियों के सामने रोजगार का संकट है। सब्जी उगाने से लेकर बंदियों के कपड़ों की सिलाई तक बंदी सिमट कर रह गए। जेल अफसरों का कहना है कि बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कंप्यूटर की शिक्षा भी दी जा रही है। विभिन्न योजनाओं की मांग शासन से की गई है। लेकिन इलेक्शन के बाद भी योजनाएं परवान चढ़ सकेंगी।

सब्जियां उगाकर नाम कमा रहे गोरखपुर के बंदी

मंडलीय कारागार गोरखपुर में बंदियों के लिए रोजगार का मुख्य जरिया खेती-किसानी है। इसके अलावा करीब 16 बंदियों को सिलाई के काम पर लगाया गया है। अन्य के पास रोजगार का कोई अन्य साधन न होने से बंदियों को खेती-किसानी पर निर्भर रहना पड़ता है। जेल की करीब 10 एकड़ भूमि पर हर साल पांच सौ क्विंटल आलू उपजाया जाता है। ब्रोकली सहित कई अन्य प्रजाती की सब्जियों को उगाकर बंदी अपना रोशन कर रहे हैं।

समाज की मुख्यधारा में जोड़ने को िसखाते काम

कई जेलों में बंदियों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने की कोशिश हो रही है। कामकाज के गुर सीखकर बंदी जेल से बाहर आने के बाद अपना रोजगार कर सकते हैं। इसलिए गोरखपुर जेल में बंदियों को निजी संस्थाओं की मदद से कंप्यूटर का प्रशिक्षण भी दिया गया। ताकि जेल से बाहर निकलने पर वह अपना रोजगार आसानी से शुरू कर सकें। लेकिन गोरखपुर जेल में बंदियों के ऐसा कोई इंतजाम नहीं हो सका, जिससे वह कोई उद्योग धंधा लगाएं। जेल अधिकारियों का कहना है कि जेल में किसी तरह का उत्पादन होने पर उसका लाभ बंदियों को मिलता है। जिन जेलों में बंदी खुद प्रोड्क्शन करते हैं तो वहां के लोकल बाजारों में सामान बेचकर जेल प्रशासन खर्च जुटाता है।

इन जेलों में यह है सुविधा

केंद्रीय कारागार वाराणसी - पीतल, स्टील बर्तन उद्योग, दरी, कपड़ा, बुनाई, सिलाई बुनाई

केंद्रीय कारागार आगरा - साबुन, फिनायल, जूता, चप्पल, दरी बुनाई, सिलाई उद्योग बंदी वस्त्र बंदी रक्षक वर्दी

केंद्रीय कारागार नैनी, इलाहाबाद - कंबल दरी, कपड़ा बुनाई, साबुन, फिनायल, फर्नीचर, लौह उद्योग, सिलाई उद्योग

केंद्रीय कारागार बरेली - कंबल दरी उद्योग, फर्नीचर, लौह उद्योग, पेंट, सिलाई उद्योग,

केंद्रीय कारागार फतेहगढ़ - तंबू उद्योग, रंगाई छपाई, निवाठ, लौह, काष्ठ, दरी, पावरलूम, सिलाई,

आदर्श कारागार लखनऊ - पावरलूम उद्योग, चादर, हस्त निर्मित कागज, प्रिंटिंग पे्रस, सिलाई उद्योग

नारी बंदी निकेतन लखनऊ - कढ़ाई, बुनाई, सिलाई, मसाला पिसाई

जिला कारागार उन्नाव - सिलाई उद्योग, बंदी, दरी उद्योग

शासन ने लौटाई योजना, प्रोजेक्ट रह गए अधूरे

आठ साल पूर्व जिला जेल में साबुन और फिनायल बनाने का उद्योग लगाने की बात शुरू हुई थी। तब तत्कालीन जेल अफसरों ने इसका प्रपोजल बनाकर यूपी गवर्नमेंट को भेजा, लेकिन गवर्नमेंट ने प्रपोजल लौटा दिया। इसके बाद दोबारा जेल में उद्योग लगाने के लिए कोई प्रयास नहीं हुए। जेल में 15 सिलाई मशीनों का इंतजाम किया गया है। महिला और पुरुष बंदियों के कपड़े और वर्दी सिलने में मशीन इस्तेमाल की जा रही है। सिलाई का काम जानने वाली बंदी ही अपनी क्षमता का उपयोग कर पाते हैं।

तिहाड़ जेल में सौ से अधिक रोजगार के साधन

एशिया की सबसे बड़ी जेल तिहाड़ में बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए तमाम योजनाएं चल रही हैं। इनमें कैदियों और अन्य बंदियों को फैशन, फैब्रिक वुड कार्विग, आर्ट गैलरी, बेकरी, जूट, टेलिरिंग, मसालों का निर्माण, धूप और अगरबत्ती निर्माण, हर्बल कलर, आचार सहित करीब सौ तरीके के रोजगार के साधन मुहैया कराए जा रहे हैं। गोरखपुर मंडलीय कारागार को सेंट्रल जेल बनाने की योजना भी फाइलों में कैद होकर रह गई है। हालांकि बंदियों की मानसिक हालत सुधारने, समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए योग-प्रशिक्षण, गीता की पुस्तकों का वितरण इत्यादि कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं।

वर्जन

गोरखपुर जेल में बंदियों का स्तर सुधारने के लिए सिलाई के अलावा कंप्यूटर का प्रशिक्षण दिया गया है। ब्रोकली के उत्पादन में जेल को प्रथम पुरस्कार मिला है। अन्य कई योजनाओं पर काम चल रहा है। लोकसभा इलेक्शन खत्म होने के बाद यहां रोजगार के साधन बढ़ाने की योजना पर तेजी से काम किया जाएगा।

डॉ। रामधनी, वरिष्ठ जेल अधीक्षक

inextlive from Gorakhpur News Desk


This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy  and  Cookie Policy.