बचपन से खेल रहे दून के प्राइवेट स्कूल

2019-05-16T06:00:57+05:30

- स्कूल बसों में तैनात स्टाफ का नहीं कराया पुलिस वेरिफिकेशन

- कई स्कूल बसों में कंडक्टर ही नहीं तैनात

- अब पुलिस कसेगी शिकंजा, स्कूलों की होगी इन्क्वायरी

देहरादून,

दून में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी इस कदर हावी है कि वे स्कूल वाहनों में तैनात ड्राइवर-कंडक्टर का वेरिफिकेशन तक कराने को तैयार नहीं हैं। यातायात निदेशालय से मिले आंकड़ों के मुताबिक दून में केवल 128 स्कूलों ने ही अपना डाटा पुलिस को दिया है। जबकि, दून में 200 से ज्यादा प्राइवेट स्कूल हैं। प्राइवेट स्कूलों की यह मनमानी और लापरवाही मासूम बच्चों की सुरक्षा से बड़ा खिलवाड़ है। 8 मई को दून हेरिटेज स्कूल का एक साढ़े 3 वर्ष का बच्चा स्कूल बस की विंडो से गिरकर बुरी तरह घायल हो गया था, इस घटना के बाद अब पुलिस ऐसे स्कूलों पर नकेल कसने की तैयारी कर रही है।

एजुकेशन हब में ये कैसी मनमानी

एजुकेशन हब के नाम से फेमस दून में 200 से ज्यादा प्राइवेट स्कूल्स हैं। इनमें से लेकिन यातायात निदेशालय के पास सिर्फ 128 स्कूलों की ही डिटेल है। जाहिर है कई स्कूलों ने अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए पुलिस को अपना डाटा ही नहीं दिया है।

स्कूल बसों में कंडक्टर ही नहीं

यातायात निदेशालय से मिले आंकड़ों के मुताबिक दून के 128 स्कूलों ने ही अपने यहां संचालित स्कूल बसों के 272 ड्राइवर और 148 कंडक्टर्स का वेरिफिकेशन कराया है। ये आंकड़ा अहम खुलासा करता है। पहली बात तो 128 स्कूलों ने सिर्फ 272 बसें होने की बात कही है, जबकि हकीकत यह है कि कई स्कूलों के पास एक दर्जन तक स्कूल बसें हैं। इस लिहाज से कहा जा सकता है कि कई स्कूलों ने पूरे ड्राइवर्स का वेरिफिकेशन नहीं कराया है। दूसरा अहम सवाल यह है कि जब 272 ड्राइवर का वेरिफिकेशन कराया गया है तो कंडक्टर्स की संख्या केवल 148 ही क्यों है। जाहिर है सेफ्टी नॉ‌र्म्स का वॉयलेशन करते हुए स्कूलों द्वारा हर बस में कंडक्टर तैनात नहीं किया गया है।

स्कूल बसों के लिए ये नॉ‌र्म्स

- ड्राइवर और कंडक्टर का पुलिस वेरिफिकेशन जरूरी

- वेरिफिकेशन कराना स्कूल की जिम्मेदारी

- स्कूल बसों में कंडक्टर की तैनाती भी जरूरी

- ग‌र्ल्स स्कूल्स की बसों में महिला कंडक्टर की तैनाती

- ड्राइवर-कंडक्टर के लिए ड्रेस कोड जरूरी

एजुकेशन हब में ही सबसे कम वेरिफिकेशन

सिटी स्कूल ड्राइवर कंडक्टर

देहरादून 128 272 148

हरिद्वार 300 490 377

यूएसनगर 234 428 353

पौड़ी गढ़वाल 137 206 186

स्कूल ज्यादा वेरिफिकेशन कम क्यों

चार शहरों के आंकड़ों की तुलना की जाए तो एक और चौंकाने वाली बात सामने आती है। पौड़ी जैसे पर्वतीय जिले में दून से ज्यादा स्कूलों ने पुलिस वेरिफिकेशन कराया है। जबकि, दून में स्कूलों की संख्या काफी ज्यादा है। हरिद्वार, यूएसनगर में भी दून से ज्यादा स्कूलों ने ड्राइवर-कंडक्टर का वेरिफिकेशन कराया है। जाहिर है दून में कई स्कूल बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं।

अब पुलिस कसेगी नकेल

स्कूल बस से गिरकर घायल हुए दून हेरिटेज स्कूल के स्टूडेंट के मामले के बाद अब पुलिस ने भी स्कूलों पर लगाम कसने की तैयारी कर ली है। यातायात निदेशक केवल खुराना ने खुद माना कि दून में काफी कम स्कूलों ने ड्राइवर-कंडक्टर्स का वेरिफिकेशन कराया है। उन्होंने कहा कि अब पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि वे एक-एक स्कूल की इन्क्वायरी करें। जिन्होंने स्कूल बसों के ड्राइवर-कंडक्टर्स का वेरिफिकेशन नहीं कराया है उनके खिलाफ कार्रवाई करें।

-------

स्कूल बस स्टाफ का वेरिफिकेशन न कराना गंभीर मामला है। सभी थाना-चौकियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने इलाके में स्कूलों की इन्क्वायरी करें। और उनकी रिपोर्ट दें, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

- केवल खुराना, यातायात निदेशक

inextlive from Dehradun News Desk


This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy  and  Cookie Policy.