स्मार्टफोन का रेडिएशन दे सकता है मेमोरी लॉस की प्रॉब्लम! राइट हैंडेड यूजर्स हैं सबसे ज्‍यादा मुसीबत में

2018-07-30T08:50:01+05:30

स्मार्टफोन से निकलने वाले रेडिएशन से हमारी या आपकी मेमोरी कम हो सकती है। राइट हैंडेड लोगों को इससे सबसे ज्‍यादा खतरा है। जानिए नई रिसर्च में हुए इस खुलासे को।

कानपुर। आजकल के स्मार्टफोन युग में लोग खास तौर पर टीनएजर्स और यंगस्टर्स अपना बहुत सारा वक्त स्मार्टफोन देखने, बात करने और यूज करने में बिताते हैं। स्मार्टफोन से होने वाले नुकसानों यानी साइड इफेक्ट्स को लेकर भले ही दुनिया भर में तमाम रिसर्च और आंकड़े आते रहते हों लेकिन हाल ही में हुई एक नई रिसर्च में इस बात का खुलासा हुआ है कि ज्यादा वक्त तक स्मार्ट फोन के संपर्क में रहने वाले टीनएजर्स और यंगस्टर्स को मेमोरी लॉस की प्रॉब्लम या बीमारी हो सकती है। इस नए शोध के हवाले से डेलीमेल ने बताया है कि इसमें भी सबसे अधिक परेशानी वाली बात उन लोगों के लिए है जो राइट हैंडेड हैं, यानि वो दाहिने हाथ और दाहिने कान के द्वारा स्मार्टफोन ज्यादा यूज करते हैं।

700 टीनएजर्स पर किया गया शोध
एंड्रॉयड हेडलाइंस के मुताबिक स्विट्जरलैंड के स्विस ट्रॉपिकल एंड पब्लिक हेल्थ इंस्टिट्यूट द्वारा करीब 700 टीनएजर्स बच्चों पर की गई रिसर्च में एक नया फैक्ट सामने आया है। इस रिसर्च में 12 से 17 साल तक की उम्र के स्‍कूल स्‍टूडेंट्स शामिल किए गए थे। रिसर्च के दौरान यह नतीजे सामने आए कि स्मार्टफोन से निकलने वाले रेडिएशन से कम उम्र के लोगों यानी टीनएजर्स और यंगस्टर्स की मेमोरी परफॉर्मेंस यानी याद रखने की क्षमता को जबरदस्त नुकसान पहुंच सकता है।

मोबाइल रेडिएशन से दिमाग की फिगरल मेमोरी को होता है नुकसान
रिसर्च के मुताबिक यूं तो स्मार्टफोन का रेडिएशन सभी लोगों की मेमोरी पर असर डालता है लेकिन राइट हैंड लोग यानी जो लोग स्मार्टफोन दाहिने हाथ और दाहिने कान के द्वारा यूज करते हैं उनकी मेमोरी पर इसका रेडिएशन ज्यादा बुरे प्रभाव डालता है। इसके पीछे वजह यह है कि दिमाग के दाहिने हिस्से में ही Figural मेमोरी मौजूद होती हैं जो कि लोगों में खास तौर पर तस्वीरें, पैटर्न और शेप्‍स को पहचानने और समझने की छमता देती हैं। ऐसे में स्मार्टफोन का यह रेडिशन उनकी फिगरल मेमोरी को सबसे ज्यादा खराब कर सकता है।

इस रिसर्च के दौरान सभी बच्चों को, जोकि स्मार्टफोन का अच्छा खासा यूज करते थे, उन्हें एक कंपलीट क्वेश्चन पेपर सॉल्व करना था और उसके तुरंत बाद उन्हें एक कंप्यूटराइज्ड लॉजिकल टेस्ट देना था। जिसके टेस्‍ट के आधार पर ये नतीजे प्राप्‍त हुए हैं।

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