ईपीएफ के बाद सब्सिडी भी डकार गईं सफाई कंपनियां

2019-02-09T09:20:05+05:30

शहर की सफाई व्यवस्था संभाल रही कंपनियां कर्मचारियों के ईपीएफ का पैसा खाने के अलावा प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना का पैसा भी डकार चुकी हैं

- ईपीएफ का पैसा जमा होने पर प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना का मिलता है लाभ

- योजना के तहत मिली 73 लाख की सब्सिडी का भी पता नहीं, नहीं हुई सख्ती तो भाग जाएंगी कंपनियां
Gorakhpur@inext.co.in
GORAKHPUR:शहर के 70 वार्डो की सफाई व्यवस्था संभाल रही कंपनियां कर्मचारियों के ईपीएफ का पैसा खाने के अलावा प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना का पैसा भी डकार चुकी हैं. दोनों सफाई कंपनियों ने कर्मचारियों के ईपीएफ के रूप में जमा 1.62 करोड़ रुपए का कोई हिसाब नहीं दिया है. प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना के तहत एक अप्रैल 2016 के बाद से कर्मचारियों का ईपीएफ जमा करने वाले नियोक्ता को 12 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाती है. केवल एक कंपनी विशाल प्रोटेक्शन फोर्स के नियमित ईपीएफ जमा करने पर अगस्त 2018 से लेकर नवंबर 2018 तक 17.84 लाख रुपए की सब्सिडी निगम को मिलती. इसका लाभ लेने के लिए कंपनियों ने कर्मचारियों का नए सिरे से ईपीएफ में रजिस्ट्रेशन कराया था.

73 लाख की सब्सिडी भी ले गईं कंपनियां
प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना के तहत केंद्र सरकार की ओर से नियोक्ता द्वारा जमा किए गए 13 प्रतिशत ईपीएफ का 12 प्रतिशत सब्सिडी मिल जाती है. नगर निगम ने अगस्त 2018 से दिसंबर 2018 तक नियमित कर्मचारियों के ईपीएफ का भुगतान किया है. विशाल प्रोटेक्शन फोर्स को नवंबर तक 36,58,205 रुपए और हिंदुस्तान सिक्योरिटी कंपनी को 42,55,097 रुपए कर्मचारियों के ईपीएफ के तौर पर भुगतान किया गया था. इस तरह निगम ने 13 प्रतिशत की दर से 79,13,586 रुपए जमा किए थे. नियमानुसार निगम को सभी नए कर्मचारियों के ईपीएफ जमा करने पर 12 प्रतिशत की सब्सिडी मिलती जो 73,04,586 रुपए होती. लेकिन निगम को कुछ भी हासिल नहीं हुआ है. कंपनियों ने इसे भी खा लिया है.

निगम ने जमा किया ईपीएफ

महीना विशाल प्रोटेक्शन फोर्स हिंदुस्तान सिक्योरिटी

अगस्त 18 8,51,040 8,35,414

सितंबर 18 7,25,532 8,67,574

अक्टूबर 18 6,08,107 7,81,231

नवंबर 18 7,17,181 8,83,705

दिसंबर 18 7,56,345 8,87,173

ईपीएफ वसूली की रफ्तार धीमी
दोनों सफाई कंपनियों ने अगस्त 2018 से दिसंबर 2018 तक नगर निगम व कर्मचारियों ने ईपीएफ के नाम पर 1.62 करोड़ जमा किए थे. दोनों कंपनियों में से विशाल प्रोटेक्शन फोर्स ने कर्मचारियों के ईपीएफ व ईएसआईसी का स्टेटमेंट दिया था जबकि हिन्दुस्तान सिक्योरिटी कंपनी ने कोई डाटा नहीं दिया है. हालांकि जांच में पता चला कि विशाल प्रोटेक्शन फोर्स द्वारा जमा किए गए डाटा गोरखपुर के कर्मचारियों से मैच नहीं हो रहे. निगम ने इसके लिए दोनों कंपनियों को 9 पत्र लिखकर वार्ड वार डाटा मांगा जो अभी तक जमा नहीं हो सका है. दोनों कंपनियों का ठेका कैंसिल कर उन्हें ब्लैक लिस्टेड तो कर दिया गया है, लेकिन ईपीएफ रकम की वसूली की रफ्तार बेहद धीमी है. दोनों कंपनियों को नगर निगम ईपीएफ व ईएसआईसी के लिए 1.08 करोड़ रुपए का भुगतान कर चुका है. जिसमें पीएफ के तहत 79,06,937 व ईएसआईसी का 28,89,063 करोड़ रुपया है. पीएफ अकाउंट में कर्मचारी के वेतन का 12 फीसदी व नियोक्ता की ओर से 13 प्रतिशत भुगतान किया जाता है. कर्मचारियों के वेतन से फंड में जमा करने के लिए 12 प्रतिशत की कटौती हर महीने की जाती है. पीएफ के नाम पर करीब 60,02,180 की कटौती होती है. इस तरह से 70 वार्डो में तैनात सफाई कर्मचारियों के खाते में ईएसआई व पीएफ के रूप में 1,78,96,000 रुपए जमा होना चाहिए लेकिन इनका कोई पता नहीं चल पा रहा है.

दोनों कंपनियों से ईपीएफ व ईएसआईसी में जमा पैसा वापस लिए जाने की कोशिश की जा रही है. पैसा नहीं देने पर दोनों कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया जाएगा.
- सीताराम जायसवाल, मेयर


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