रिम्स में चल रहा कंस्ट्रक्शन मरीजों को दे रहा टेंशन

2019-06-09T06:00:44+05:30

RANCHI : रिम्स में 60 साल बाद वार्डो की सूरत बदलने का काम चल रहा है। इसके लिए पुरानी दीवारों और फर्श को तोड़कर नया रूप दिया जा रहा है। लेकिन इस चक्कर में इनडोर में इलाज करा रहे मरीजों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। दिन भर खटर पटर होने और मशीनों की आवाज से जहां उनकी नींद उड़ी हुई है। वहीं धूल और गंदगी से उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसे लेकर कई बार यूनिट के डॉक्टर्स ने कंप्लेन भी की, साथ ही काम बंद करने की भी रिक्वेस्ट की। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हॉस्पिटल प्रबंधन को मरीजों की परेशानी से कोई लेना-देना नहीं है।

आईसीयू के मरीज ज्यादा परेशान

इनडोर से लेकर आउटडोर तक पुराने फ्लोर को तोड़कर टाइल्स लगाया जा रहा है। ऐसे में गायनी वार्ड, आईसीयू और सर्जरी वार्ड में काम तेजी से चल रहा है। लेकिन काम के दौरान किसी भी मरीज को कहीं और शिफ्ट नहीं किया। ऐसे में उन्हें इंफेक्शन होने का भी खतरा बढ़ गया है। सबसे ज्यादा परेशानी तो आईसीयू के मरीजों को हो रही है। यहां एडमिट मरीजों को क्रिटिकल केयर की जरूरत होती है। लेकिन शोर के कारण उनकी बीमारी कम होने की बजाय बढ़ गई है।

मेन बिल्डिंग में एक हजार मरीज

हॉस्पिटल के इनडोर में लगभग 1500 मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें से एक हजार मरीज मेन बिल्डिंग में एडमिट हैं। इसमें छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग और महिलाएं इलाज करा रहे हैं। जहां वे पहले से ही कष्ट में हैं। अब कंस्ट्रक्शन ने उनका दर्द और बढ़ा दिया है। वाइब्रेटर के साथ मशीन की आवाज से कई बार मरीज चाहकर भी आराम नहीं कर पा रहे हैं। वहीं धूल-डस्ट की लगातार चपेट में आने के कारण मरीजों के कई अन्य बीमारियों से भी घिरने की आशंका बढ़ गई है। इनडोर में एडमिट मरीजों को अन्य जगह शिफ्ट करने के बाद काम कराया जाना था। इसी के तहत मेडिसीन ए 1 के मरीजों को आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। लेकिन बाकी वार्डो के मरीजों को शिफ्ट नहीं किया जाना कई सवाल खड़े कर रहा है।

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वर्जन

कंस्ट्रक्शन के कारण वार्डो की हालत काफी खराब है। इसलिए मैंने अपने वार्ड में काम बंद करने को कह दिया है। चूंकि मेरे वार्ड में लंबे समय से काम चल रहा है। जिससे कि मरीजों को आइसोलेशन वार्ड में रखा गया। हर वार्ड में कंस्ट्रक्शन वर्क बंद किया जाना चाहिए। नहीं तो मरीजों के साथ डॉक्टर भी बीमार हो जाएंगे।

डॉ.जेके मित्रा, मेडिसीन

inextlive from Ranchi News Desk


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