बॉडी वॉर्न कैमरों से लैस होंगे आरपीएफ स्कॉर्ट

2019-05-04T06:00:54+05:30

- आरपीएफ आईजी ने ट्रायल के तौर पर इलाहाबाद जोन की कुछ ट्रेनों में शुरू की योजना

- पैसेंजर्स के फीडबैक व उपयोगिता के मुताबिक बढ़ाई जाएगी कैमरों की संख्या

- आरपीएफ आईजी ने कुंभ के दौरान 12 कैमरों का कराया था ट्रायल

kanpur। ट्रेनों में स्कॉर्ट करने वाले आरपीएफ सिपाही जल्द ही बॉडी वॉर्न कैमरों से लैस होंगे। जी हां, पैसेंजर्स को स्कॉर्ट सिपाहियों की वर्दी पर कैमरा लगा हुआ दिखाई देगा। रेलवे ने यह फैसला ट्रेनों में स्कॉर्ट करने वाले सिपाहियों पर आए दिन लगने वाले वसूली के आरापों पर शिकंजा कसने के लिए लिया है। इलाहाबाद जोन के आरपीएफ आईजी एसएन पांडेय ने बताया कि इलाहाबाद मंडल में चलने वाली कई ट्रेनों में यह सुविधा शुरू कर दी गई है। उन्होनें बताया कि पैसेंजर्स के फीडबैक व कैमरों की उपयोगिता को देखते हुए कैमरों की संख्या बढ़ा कर एनसीआर जोन की विभिन्न ट्रेनों में चलने वाले स्कॉर्ट सिपाहियों को भी इन कैमरों से लैस किया जाएगा।

कुंभ के दौरान हो चुका है ट्रायल

एनसीआर जोन के आरपीएफ आईजी एसएन पांडेय ने बताया कि कुंभ के दौरान वर्दी में लगाए जाने वाले 12 बॉडी वॉर्न कैमरों का ट्रायल किया गया था। एक्सपेरिमेंट के तौर पर इलाहाबाद मंडल से चलने वाली आधा दर्जन से अधिक ट्रेनों में चलने वाले स्कॉर्ट सिपाहियों को कैमरों से लैस करके भेजा जा रहा है। इस पहल से आने वाले बदलाव पर भी विचार किया जा रहा है। संभावना जताई जा रही है कि इससे पैसेंजर्स को काफी लाभ मिलेगा।

थमेगी आरपीएफ की अवैध वसूली

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक इस पहल से ट्रेनों में बर्थ पर बैठाने के नाम पर पैसेंजर्स से स्कॉर्ट सिपाहियों द्वारा की जाने वाली अवैध वसूली पर शिकंजा कसा जा सकेगा। साथ ही ट्रेनों में होने वाले अपराध पर भी काफी हद तक शिकंजा कसा जा सकेगा। ट्रेनों में कोई अपराध होने पर सिपाही की वर्दी में लगे कैमरे की रिकार्डिग के आधार पर संदिग्ध पैसेंजर व अपराधी को चिन्हित करना आसान हो जाएगा।

एसी कोच होगा टारगेट

आरपीएफ आईजी एसएन पांडेय ने बताया कि बीते कुछ वर्षो में स्लीपर कोचों की अपेक्षा एसी कोचों में चोरी की वारदातें लगातार बढ़ रही हैं। एसी कोचों में होने वाली चोरियों को रोकने के लिए कैमरों से लैस आरपीएफ स्कॉर्ट सिपाहियों को एसी कोचों में तैनात किया जाएगा। उन्होने बताया कि एसी कोच में होने वाली चोरियों के केसों में देखा गया कि अपराधी टिकट लेकर कोच में सफर करता है और समय मिलते ही पैसेंजर का सामान चोरी करके ट्रेन से उतर जाता है। ऐसे केसों में आरपीएफ अधिकारी स्कॉर्ट सिपाही के वर्दी में लगे कैमरों की रिकार्डिग के माध्यम सें आरोपी को चिन्हित कर पकड़ सकते हैं।

कुंभ के दौरान बॉडी वॉर्न कैमरों का ट्रायल किया गया था। इसके बाद इलाहाबाद से चलने वाली कई ट्रेनों में कैमरों से लैस स्कॉर्ट सिपाहियों को भेजा जा रहा है। पैसेंजर्स के फीडबैक व उपयोगिता देखते हुए कैमरों की संख्या जल्द बढ़ाई जाएगी।

एसएन पांडेय, आईजी आरपीएफ, एनसीआर जोन

inextlive from Kanpur News Desk


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