सैड बना रहा डिप्रेशन का मरीज

2019-01-08T01:22:07+05:30

विंटर डिप्रेशन या सीजनल अफेक्टिव डिसआर्डर यानी सैड के बढ़ रहे मरीज

20 फीसदी मरीज विंटर डिप्रेशन की समस्या लेकर पहुंच रहे

30 से 40 मरीज रोजाना पहुंच रहे जिला अस्पताल

60- 70 मरीज रोजाना पहुंच रहे मेडिकल कॉलेज की मेंटल हेल्थ ओपीडी में

MEERUT। एक तरफ जहां सर्दी लोगों को ठिठुरने पर मजबूर कर रही हैं, वहीं उन्हें डिप्रेशन भी दे रही हैं। मौसमी बदलाव के चलते होने वाले केमिकल लोचे की वजह से लोग विंटर डिप्रेशन या सीजनल अफेक्टिव डिसआर्डर यानी सैड के शिकार होने लगे हैं। अस्पतालों की ओपीडी में इन दिनों लगभग 20 प्रतिशत लोग इसी तरह से की समस्या लेकर एक्सप‌र्ट्स के पास पहुंच रहे हैं।

यह है स्थिति

मौसम में बदलाव के चलते जिला अस्पताल में रोजाना करीब 30 से 40 मरीज ऐसे ही पहुंच रहे हैं। जबकि मेडिकल कॉलेज की मेंटल हेल्थ ओपीडी में भी करीब 60- 70 मरीज ऐसी ही समस्याओं को लेकर पहुंच रहे हैं। मरीजों में महिला और युवाओं की संख्या ज्यादा है।

ये है कारण

मनोरोग विशेषज्ञों के मुताबिक धूप की वजह से दिमाग में सेरॉटोनिन केमिकल बनता है। जिसका असर हमारे मूड पर पड़ता है।

सर्दियों में धूप न होने और माहौल डार्क होने से इसका रिसाव कम होता है.

दिमाग में सेरॉटोनिन का रिसाव कम होने से मूड नॉर्मल नहीं रह पाता है।

कुछ लोगों पर यह केमिकल ज्यादा असर करता है और वह डिप्रेशन में आ जाते हैं।

इसके अलावा हार्मोन बदलाव और विटामिन डी की कमी की वजह से ऐसा होने लगता है।

ये हैं लक्षण

थकान, सिर में दर्द रहना, आलस, काम में मन न लग पाना, अकेलापन, बेचैन रहना और छोटी- छोटी बातों को लेकर स्ट्रेस में आना, चिड़चिड़ा होना और अधिक गुस्सा करना।

ऐसे करें डिप्रेशन दूर

अधिक से अधिक धूप में बैठें।

ऐसी काम करें जो खुशी दे।

अकेले न रहे, म्यूजिक सुनें, किताबें पढ़ें और सिनेमा देखें।

क्वालिटी टाइम स्पेंट करें।

एक्सर्साइज करें ताकि मूड बदलने में मदद मिल सके।

शॉपिंग करें, दोस्तों के साथ वक्त बिताएं, परिवार के लोगों के बीच रहें।

बहुत ज्यादा किसी विषय के बारे में न सोचे।

बदलते मौसम का असर इंसान के शरीर में होने वाले केमिकल रिएक्शन पर पड़ता हैं। इसमें धूप बेहद फायदेमंद होती है। सर्दी के दिनों में सुबह और शाम को धुंध अधिक होती है, जिसकी वजह से लोग डिप्रेशन के ज्यादा शिकार होते हैं।

डॉ। विभा नागर, क्लीनिकल साइक्लोजिस्ट, जिला अस्पताल

मौसम बदलने के साथ स्ट्रेस और थकान बढ़ जाती है। सुबह और शाम को डिप्रेशन जैसी फीलिंग आने लगती है।

मीरा

सर्दियों में डिप्रेशन जैसी स्थिति हो जाती है। अंधेरे से ज्यादा घबराहट होती है, डर सा लगने लगता है।

सुमन

सर्दियों में मूड में तेजी से बदलाव आता है। कभी भी गुस्सा आने लगता है, कभी मन उदास हो जाता हैं। चिड़चिड़ाहट सी रहती है।

वर्षा

inextlive from Meerut News Desk


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