अपनों की बेरुखी से छोड़ा शहर अब दूसरों के लिए ला रहे गोल्ड

2019-02-18T06:00:09+05:30

- प्रशासन की वादाखिलाफी के चलते दूसरे प्रदेश की ओर से कूच रहे उत्कृष्ट खिलाड़ी

- सेपक टाकरा गेम से शुरु हुआ यह सिलसिला अब महिला क्रिकेट तक पहुंचा

बरेली : वो कहतें हैं अभी पास है तो कदर नहीं जब दूर जाएंगे तो ढूंढ़ते फिरोगे हम बात कर रहे हैं उन उत्कृष्ट खिलाडि़यों की जो सुविधाओं का टोटा और वादाखिलाफी के चलते शहर से गैर प्रदेश की ओर कूच कर गए। विभिन्न खेलों के उत्कृष्ट खिलाड़ी प्रदेश छोड़ने को मजबूर हैं। सेपक टाकरा से शुरु हुआ यह सफर किक्रेट तक पहुंच गया है। दूसरे प्रदेशों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर यह खिलाड़ी देश का गौरव बड़ा रहे हैं। यह खिलाड़ी पहले एमजेपीआरयू की टीम से खेलते थे, लेकिन जब इन्हें यहां कफर्ट जोन नहीं मिला तो वह दूसरे प्रदेशों में दूसरी टीमों से खेल रहे हैं। साथ ही मेडल लाकर देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। जब यह खिलाड़ी एमजेपीआरयू की टीम से खेलते थे तो उन्हें दिलासा दी जाती थी कि उन्हें नकद पुरस्कार के साथ पढ़ाई की फीस में भी छूट मिलेगी, लेकिन वादे से मुकरने पर कई खिलाडि़यों को मजबूरन बाहर की ओर रुख करना पड़ा। साथ ही इनामी राशि, भत्ता आदि भी नहीं दिया जाता था।

फ्रांस में जीता था स्वर्ण फिर भी उपेक्षा

शहर के टीचर्स कॉलोनी निवासी लकी ने आरयू से 2016 में थाईलैंड में आयोजित सेपक टाकरा किंग्स क्लब में गोल्ड मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया था। यूपी से एक मात्र लकी को ही इंडिया टीम में जगह दी गई थी, लेकिन सुविधाओं के अभाव के चलते उन्होंने भी शहर छोड़ दिया। अब वह पंजाब टीम से खेल रहे हैं।

बिहार किया कूच अब टीम इंडिया एक कदम दूर

बिहारीपुर निवासी श्रद्धा सक्सेना 2016 में स्पो‌र्ट्स स्टेडियम में क्रिकेट की प्रैक्टिस करती थीं। यहां काफी मेहनत के बाद भी उनके हाथ सिर्फ निराशा ही लगी। इसके बाद उन्होंने बिहार यूनिवर्सिटी में दाखिला ले लिया। 2018 में उनका चयन रणजी टीम के लिए हो गया है।

खिलाडि़यों से बात

1. वर्ष 2015 में सेपक टाकरा की ऑल इंडिया चैंपियनशिप में एमजेपी यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व कर गोल्ड मेडल जीता था। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने 51000 नकद पुरस्कार की घोषणा की गई थी, लेकिन कई बार कहने के बाद भी पुरस्कार नही मिला। एक दिन पंजाब के पटियाला यूनिवर्सिटी की कॉल आई। मैंने वहां पर बीपीएड में दाखिला लिया। अब पढ़ाई भी फ्री है और मान भी मिलता है।

लकी।

2. वर्ष 2017 में एमजेपी यूनिवर्सिटी की ओर से सेपक टाकरा में कई राष्ट्रीय स्तरीय खेलों में मेडल जीते, लेकिन यूनिवर्सिटी ने हर सुविधा से दूर रखा। अब पंजाब यूनिवर्सिटी की ओर से खेल रहा हूं पढ़ाई मुफ्त हो गई है और हर सुविधा भी मिल रही है।

शुभम कनौजिया।

3. एमजेपी यूनिवर्सिटी के उपेक्षित व्यवहार के चलते बीच में पढ़ाई छोड़कर वर्ष 2017 में पंजाब यूनिवर्सिटी में दाखिला लेकर सेपक टाकरा की टीम में शामिल हुआ। पंजाब टीम में शामिल होकर कई मेडल अपनी झोली में डाल चुके हैं।

अर्पित ।

4. बरेली स्पो‌र्ट्स स्टेडियम में महिला क्रिकेट के लिए कोई भी संसाधन उपलब्ध नहीं है, जिस कारण महिला क्रिकेट खिलाड़ी गैर प्रदेशों में कूच कर रहे हैं। दो साल प्रैक्टिस करने के बाद भी बरेली में आगे बढ़ने के आसार नजर नहीं आ रहे थे जिसके बाद बिहार के विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने के बाद क्रिकेट को अपने करियर बनाने का मलाल नहीं है। यहां से ही रणजी की टीम का सफर आसानी से तय किया। हालांकि उत्तर प्रदेश की टीम में न खेल पाने का मलाल जरुर है।

श्रद्धा सक्सेना।

inextlive from Bareilly News Desk


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