युवाओं की ऊर्जा का और बेहतर तरीके से हो सकता है इस्तेमाल सद्गुरु जग्गी वासुदेव

2019-06-10T12:22:59+05:30

फर्क नहीं पड़ता कि आपने सुबह अपने कुत्ते से कैसा बर्ताव किया शाम को घर आते हैं तो जो स्वागत आपको उससे मिलेगा उसकी उम्मीद आप इंसानों से नहीं कर सकते।

आज का युवा वर्ग ऐप्स और गैजेट्स से बहुत आकर्षित है। ऐसी स्थिति में वे अपने जीवन को कैसे संचालित करें?
जिन्होंने खुद का संचालन अपने हाथ में नहीं लिया है, उनका ध्यान हमेशा किसी न किसी चीज की ओर खिंचता रहेगा। तो समस्या गैजेट्स की नहीं है, समस्या विवशता की है। हमें अपने युवाओं, बच्चों और बड़ों में यह चीज लानी होगी कि हम जीवन को विवशतापूर्ण तरीके से न चलाएं। हम कैसे खाते हैं, बैठते हैं, खड़े होते हैं, और काम करते हैं, यह सचेतन तरीके से करना चाहिए। अगर यह सचेतन बन जाताहै, तब हमारा गैजेट्स का इस्तेमाल भी एक सचेतन पक्रिया बन जाएगा। हमें जानकारी के बारे में शिकायत करने जरूरत नहीं है। सौ साल पहले, बस सौ किलोमीटर दूर, चाहे कोई आपदा आए या कोई बहुत बढिय़ा चीज हो, उसके बारे में आपको जानने में एक महीना लग जाता था। दुनिया में क्या हो रहा है, आज आप उसे उसी पल जान जाते हैं। टेक्नॉलजी अच्छी या बुरी नहीं होती। इसका अपना कोई गुण नहीं होता - यह इस पर निर्भर करता है कि हम इसे कैसे इस्तेमाल करते हैं।
आप चाहे जो दूसरी टेक्नॉलजी
इस्तेमाल करें - फोन, कंप्यूटर, या सोशल मीडिया - वह इंसानी प्रक्रिया जितनी परिष्कृत नहीं है। यह धरती पर सबसे परिष्कृत गैजेट है। आपको पहले इस पर ध्यान देना चाहिए। तब, स्वाभाविक रूप से हर दूसरी चीज अपने आप व्यवस्थित तरीके से होगी। वरना, टेक्नॉलजी का जबरदस्त उपहार बहुत तनावपूर्ण होने वाला है। आज का युवा, जिसका परिवार और मित्रों से संबंध छूटता जा रहा है, वह अपने भावनात्मक रिश्तों को कैसे सुधारे।
पास हर समय एक प्यार भरा वातावरण
होना चाहिए - न सिर्फ घर पर, बल्कि स्कूल में, गली में-बच्चा जहां भी जाता है, उसे एक प्रेम और स्वागत का भाव अनुभव करना चाहिए। यही सबसे महत्वपूर्ण पहलू है जिसका हमें भविष्य में खुशहाली के लिए ध्यान रखना चाहिए। अधिकतर इंसानों के लिए भावना सबसे बड़ा पहलू होता है, तो भावनात्मक सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। अगर इंसान वाकई सचेतन हो जाता है, तो भावना का फर्क नहीं पड़ता। वरना भावना एक अहम भूमिका निभाती है। तो, बचपन से ही, बच्चों के पास भावनात्मक सुरक्षा होनी चाहिए। इसका मतलब है कि उनके आसपास हर समय एक प्यार भरा वातावरण होना चाहिए - न सिर्फ घर पर, बल्कि स्कूल में, गली में-बच्चा जहां भी जाता है, उसे एक प्रेम और स्वागत का भाव अनुभव करना चाहिए। यही सबसे महत्वपूर्ण पहलू है जिसका हमें भविष्य में खुशहाली के लिए ध्यान रखना चाहिए।

पशुओं या पालतू जानवरों से युवावर्ग क्या सीख सकता है?

इन दिनों, तमामों लोग इंसानों के बदले कुत्तों को चुन रहे हैं क्योंकि एक कुत्ते का मतलब है कि 12 साल के प्रेम संबंध की गारंटी है! हम यह नहीं जानते कि ईश्वर प्रेमै या नहीं, लेकिन कुत्ता नि:संदेह प्रेम है! इससे फर्क नहीं पड़ता कि आपने सुबह अपने कुत्ते से कैसा बर्ताव किया था, जब शाम को आप घर जाते हैं, तो जिस तरह का स्वागत आपको कुत्ते से मिलता है, किसी पत्नी, पति या बच्चे से वैसा स्वागत कभी नहीं मिलेगा। तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि तमाम लोग अपने परिवार के लोगों के बजाय अपने कुत्तों से ज्यादा प्रेम करते हैं। लेकिन आप एक कुत्ते के लिए जितना प्रेम महसूस करते हैं, उसी तरह आप एक इंसान के प्रति भी महसूस कर सकते हैं, क्योंकि प्रेम का संबंध आपके कुत्ते, मित्रों, या परिवार सनहीं है, प्रेम का संबंध आपसे है। प्रेम आपके भीतर घटित होता है। अगर आप बहुत प्रेममय बन जाते हैं, आपका अस्तित्व खुशनुमा होगा। अगर आप प्रसन्न हैं, सिर्फ तभी आप जीवन के सारे आयामों को खोजने का साहस करेंगे। वरना अप्रिय विचार, भावनाएं, और शरीर आपको हर समय व्यस्त रखेंगे। अगर आप शरीर, मन और भावनाओं को सुखद और प्रेममय बना लेते हैं, तो आपमें कष्ट का कोई डर नहीं रहेगा। जब कष्ट का डर नहीं होता, सिर्फ तभी आप इस जीवन को पूरे जोश से जी पाएंगे।
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आध्यात्मिकता युवाओं को क्या दे सकती है?
सद्गुरु: युवा का मतलब है भरपूर ऊर्जा। ऊर्जा के संदर्भ में, जीवन के किसी दूसरे चरण में, कोई व्यक्ति वह सब नहीं कर सकता जो वह युवा होने पर कर सकता है। लेकिन बिना स्थिरता और दिशा के बेलगाम ऊर्जा खतरनाक और विनाशकारी होती है। जब कोई जवान होता है, तब वह जितना स्थिर हो, उतने ही अच्छे से वह अपने शरीर और बुद्धि को जीवन गढऩे के लिए इस्तेमाल कर सकता है। सिर्फ स्थिर लोग ही अपने गुणों और प्रतिभा को पूर्ण रूप से इस्तेमाल कर सकते हैं। तो, सबसे महत्वपूर्ण चीज जो युवाओं के साथ होने की जरूरत है, वह यह कि वे ध्यानशील बनें। तब, युवाओं की ऊर्जा उनके अपने और हर किसी की खुशहाली के लिए बेहतर तरीके से इस्तेमाल में लाई जा सकती है। युवा मानवता का वह हिस्सा है जो अभी भी निर्माणाधीन है। किसी दूसरे की अपेक्षा उनमें अधिक जीवन है। आध्यात्मिकता जीवन है, विशुद्ध जीवन। यह आपको जागृत करने से संबंध रखती है। योग आंतरिकता को संभालने का विज्ञान है। आप एक ऐसी आंतरिक संभावना पैदा करते हैं, जहां आनंदमय, उल्लासपूर्ण और शांत होना आपकी अपनी प्रकृति होती है - आपके आस-पास जो होता है उसकी वजह से नहीं। एक बार जब आप इस तरह होते हैं, तब आपका जीवन खुशी की खोज में नहीं जाता। आपका जीवन आपकी खुशी की अभिव्यक्ति होता है।

 


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