मुखबिरों का न मिलना चिंता का विषय

2018-10-24T06:00:50+05:30

---आई कनेक्ट

सरकार की ओर से अवैध रूप से भ्रूण लिंग जांच के लिए किया गया यह फैसला काबिले तारिफ हैं, लेकिन मुखबिरों का न मिलना चिंता का विषय है। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की खबर पर सोशल मिडिया पर लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी है।

सरकार की यह योजना तभी सफल होगी जब इसके लिए कोई ठोस कदम उठाया जाए। इस योजना की जानकारी लोगों तक पहुंचे बगैर सफलता की उम्मीद नहीं की जा सकती।

सुनील कुमार

हमें इसकी जानकारी है, लेकिन कोर्ट कचहरी का चक्कर लगाने से परहेज है। यही वजह है कि ज्यादातर लोग जानकारी होने के बाद भी मुखबिरी करने से बचते हैं।

मोनू यादव

सरकार के इस प्रोग्राम में कोई भी महिला सहयोग नहीं करना चाहती। जब उन्हें ये पता चलता है कि आरोपी को पकड़वाने से लेकर कोर्ट तक जाना पड़ेगा तो वह दूर हो जाती हैं।

मनीष जायसवाल

दो साल तक विभाग के पास एक भी मुखबिर का न आना सवाल खड़ा करता है। ऐसा होना संभव नहीं है कि मुखबिर की कमी है। अधिकारी प्रयास करें तो बहुत कुछ हो सकता है।

सुमीत अस्थाना

inextlive from Varanasi News Desk


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