लापता पत्रकार जमाल खाशोग्गी के मामले में सऊदी अरब के राजा ने तुर्किश राष्ट्रपति से की बात

2018-10-15T11:45:52+05:30

लापता पत्रकार जमाल खाशोग्गी के मामले में सऊदी अरब के राजा सलमान बिन अब्दुलाजीज अल सऊद ने तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तय्यिप एर्दोगन से बात की है। पत्रकार इस्तांबुल में गायब थे।

रियाद (आईएएनएस)। सऊदी अरब के राजा सलमान बिन अब्दुलाजीज अल सऊद ने इस्तांबुल में गायब हुए सऊदी पत्रकार जमाल खाशोग्गी के मामले में तुर्की राष्ट्रपति रेसेप तय्यिप एर्दोगन से बात की है। सऊदी प्रेस एजेंसी और तुर्की राज्य संचालित समाचार एजेंसी अनाडोलू ने रविवार को बताया कि दोनों देश खाशोग्गी के मामले पर चर्चा करने के लिए 'कार्यकारी समूह' स्थापित करने पर विचार कर रहे हैं।  हालांकि, इस समूह के तैयार होने की कोई आधिकारिक तारीख की घोषणा नहीं की गई है लेकिन सऊदी अरब पर इस समूह को जल्द से जल्द तैयार किये जाने को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जा रहा है।  

सऊदी अरब को करना पड़ेगा दंड का सामना

गौरतलब है कि 59 वर्षीय अनुभवी पत्रकार, जमाल खाशोग्गी 2 अक्टूबर को इस्तांबुल में सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास में प्रवेश करने के बाद गायब हो गए थे। वे वहां अपने तलाक के दस्तावेजो को लेने के लिए गए थे। तुर्की सरकार ने कहा था कि पुलिस का मानना ​​है कि जमाल को दूतावास के अंदर ही मार दिया गया है। हालांकि, रियाद ने पुलिस के इस दावों आधारहीन बताकर खारिज कर दिया था। इस मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा था कि अगर पत्रकार के मौत की पुष्टि हो जाती है और सऊदी अरब का हाथ इसमें होता है तो उसे दंड का सामना करना पड़ेगा।
सीसीटीवी फुटेज की जांच
इसके साथ ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने भी रविवार को कहा कि वे इस मामले में 'विश्वसनीय जांच' की मांग कर रहे हैं। हालांकि, कई अरब देशों ने सऊदी अरब को अपना समर्थन दिया। ओमान, बहरीन, जॉर्डन, फिलिस्तीन, लेबनान, संयुक्त अरब अमीरात और मिस्र ने रविवार को कहा कि वे इस मामले में सऊदी अरब के साथ हैं। बता दें कि फिलहाल तुर्की के जांचकर्ता उन सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रहे हैं, जिस समय पत्रकार ने इस्तांबुल में सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास में प्रवेश किया था। जमाल खाशोग्गी सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बड़े आलोचक थे और वे अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट में बतौर कॉंट्रिब्यूटर काम करते थे। बता दें कि जमाल, एक पूर्व सरकारी भी सलाहकार हैं और इन्होंने राजकुमार मोहम्मद की कुछ नीतियों और यमन में हुए युद्ध में रियाद के हस्तक्षेप की आलोचना की थी। वह अपने गिरफ्तारी से बचने के लिए पिछले साल सितंबर से अमेरिका में रह रहे थे।

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