सेवाभाव में छिपा है अवसाद और नकारात्मकता से मुक्त जीवन का मंत्र

2019-02-08T10:18:07+05:30

सेवा भारतीय अध्यात्म का एक महत्वपूर्ण अंग है। इस तीव्र इच्छा को पूरा करने की ऊर्जा युवा में है। जब सेवा जीवन का एकमात्र उद्देश्य होता है तब उससे भय समाप्त हो जाता है मन में एकाग्रता आती है कर्म उद्देश्यपूर्ण हो जाते हैं और दीर्घकालिक सुख मिलता है।

जीवन की छोटी समझ और अपने जीवन की दिशा के प्रति असमंजस के कारण हमारी युवा पीढ़ी अत्यंत कठोर कदम उठाने पर मजबूर हो रही है। युवा जीवन में बहुत उतार-चढ़ाव आता है और वे उसका तत्काल समाधान चाहते हैं, तत्काल संतुष्टि चाहते हैं। उनके लिए, सबकुछ अभी ही हो जाना चाहिए, इसी पल में! आध्यात्मिकता वह है, जो उत्साह को प्रज्ज्वलित करती है, बनाए रखती है, और बढ़ाती है।

हमारे युवाओं को यह अहसास करने की जरूरत है कि वे अपनी जन्मजात मानवीयता को छोड़े बिना रचनात्मक और उत्पादक हो सकते हैं। उन्हें यह भी अहसास करने की आवश्यकता है कि उनमें बहुत क्षमता है और वे जो कुछ भी हासिल करना चाहते हैं, उसको पाने की शक्ति उनमें है। वास्तव में सिर्फ भौतिक वस्तुएं या सुविधाएं किसी को आराम नहीं दे सकती हैं। हर कोई शांति, स्थिरता, चैन और सच्चे प्रेम के लिए तरस रहा है। आध्यात्मिकता हमारे युवाओं को यह प्रदान कर सकती है।

सेवा भारतीय अध्यात्म का एक महत्वपूर्ण अंग है। इस तीव्र इच्छा को पूरा करने की ऊर्जा युवा में है। जब सेवा जीवन का एकमात्र उद्देश्य होता है, तब उससे भय समाप्त हो जाता है, मन में एकाग्रता आती है, कर्म उद्देश्यपूर्ण हो जाते हैं, और दीर्घकालिक सुख मिलता है। हमारा युवा आध्यात्मिकता के सेवा के पहलू को इस्तेमाल करके अपने भय और अवसाद को समाप्त कर सकता है। सेवा से बहुत मस्ती मिलती है। यह अवसाद के लिए सबसे प्रभावी इलाज है।

जिस दिन तुम्हें निराशा लगे, खराब लगे या अवसाद लगे, अपने कमरे से बाहर निकलो और लोगों से पूछो, 'मैं आपके लिए क्या कर सकता हूं?’ तुम जो सेवा करोगे वह तुम्हारे अंदर एक क्रांति लाएगा। जब तुम अपने को दूसरों की मदद करने में व्यस्त रखोगे, तब तुम्हें अहसास होगा कि परमात्मा तुम्हारा बहुत अच्छी तरह से ख्याल रख रहा है और तुम्हारी निराशा प्रेम और कृतज्ञता में परिवर्तित हो जाएगी। इसके विपरीत, जब तुम ऐसे प्रश्न पूछते हो कि 'मेरे साथ ही ऐसा क्यों?’ या 'मुझे क्या मिला?’ तब तुम अवसाद में आ जाते हो।

खुली सोच की कमी आज हमारे युवाओं के बीच एक बड़ी समस्या है। उनको बहुत चिंता है कि लोग उनके बारे में क्या सोचेंगे। यह गंभीर रूप से उनके निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित करती है। छोटे-छोटे निर्णय जैसे कौन से कपड़े पहनने हैं, कौन सा मोबाइल खरीदना है या गंभीर निर्णय जैसे कौन सा पेशा चुनना है, इनका फैसला इस अदेखे आधार पर किया जाता है न कि क्या तर्कसंगत है और क्या सही विकल्प होगा। श्वास प्रक्रियाएं, ध्यान और साधना के द्वारा युवाओं को इस अंतर्बाधित मन को खोलने में मदद मिल सकती है। मन का स्वभाव नकारात्मक से जुड़े रहने का है। इससे मुक्त होने के लिए, युवाओं को स्वयं की जिम्मेदारी लेनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका मन पूर्वाग्रहों से न भरा हुआ हो। अपनी नकारात्मक भावनाओं के साथ न ही लड़ना है और न ही उनसे दोस्ती करनी है। युक्ति, श्वास और सही परिप्रेक्ष्य द्वारा नकारात्मकता हटाई जा सकती है।

अपने अतीत से लें सीख

युवाओं के जीवन में असफलता का डर नहीं होना चाहिए। बस स्वीकार कर लें: 'ठीक है, मैं असफल रहा हूं। तो क्या हुआ? मैं अब भी यह करना चाहता हूं। जीवन असफलता और सफलता सबका मिश्रण है- वे एक-दूसरे के पूरक हैं। तुम्हें अपने आपसे पूछना चाहिए, 'मैंने अतीत से क्या सीखा? 'भविष्य के प्रति मेरा क्या दृष्टिकोण है?’ यह तुम्हें आगे बढ़ते रहने देगा।

श्री श्री रविशंकर

अकेलेपन को कैसे दूर करें? क्या है स्वयं में रहने का आनन्द? जानें श्री श्री रविशंकर से

क्रोध क्या है? इस पर काबू कैसे पाएं? जानते हैं श्री श्री रविशंकर से


This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy  and  Cookie Policy.