सीएमओ को ढूंढे नहीं मिल रहे मुखबिर

2018-11-10T06:00:19+05:30

1.5-लाख रुपए तीन किश्त में शासन से दिया जाएगा ईनाम

30-हजार रुपए सेंटर के बारे में जानकारी देने वाले को दिया जाता है

20-हजार रुपए डेमो प्रेग्नेंट वीमेन को पहली किस्त में दिया जाता है

170-अल्ट्रासाउंड सेंटर्स है डस्ट्रिक्ट में

3-किस्तों में दी जानी है पुरस्कार राशि

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-कोर्ट में गवाही देने से बचने के लिए नहीं आ रहे आगे

-भू्रण जांच करने वाले अल्ट्रासाउंड सेंटर्स की सूचना देने वाले को दिया जाना है ईनाम

-योजना के तहत दो वर्ष में विभाग को नहीं मिला अब तक कोई मुखबिर

-स्टिंग ऑपेरशन के बाद कोर्ट में जाना नहीं चाहते सूचना देने वाले मुखबिर

क्चन्क्त्रश्वढ्ढरुरुङ्घ :

भ्रूण लिंग जांच करने वाले अल्ट्रासाउंड सेंटर्स पर शिकंजा कसने के लिए स्वास्थ्य विभाग की पीएनडीटी विंग की तरफ से दो साल पहले शुरू की गई मुखबिर योजना सफर करती नजर आ रही है। पीएनडीटी टीम को मुखबिर खोजने में यह योजना काम नहीं आ रही है। जबकि इसके लिए शासन की तरफ से मुखबिरों को मोटी रकम भी पुरस्कार के रूप में दी जा रही है। पुरस्कार राशि की जानकारी नहीं होने के कारण मुखबिर आगे नहीं आ रहे हैं।

प्रचार प्रसार की कमी

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना के तहत भ्रूण हत्या रोकने के लिए सरकार तो एक्टिव है। डिस्ट्रिक्ट में सीएमओ ने इसकी जिम्मदारी एसीएमओ डॉ। रंजन गौतम को दे रखी है। हेल्थ डिपार्टमेंट इस दिशा में तेजी से काम करने का निर्देश भी आया था, लेकिन डिस्ट्रिक्ट लेवल पर योजना का प्रचार-प्रसार ही नहीं किया गया। ऐसे में आम लोगों को इस योजना की कोई जानकारी ही नहीं हुई, जिससे मुखबिर योजना धरातल पर ही नहीं उतर पाई।

तीन किस्तों में होना है पेमेंट

योजना के तहत पहले मुखबिर की इंफॉर्मेशन पर डेमो कस्टमर बनकर लिंग परीक्षण को सत्यापित किया जाता है। सूचना में परीक्षण करने वाले डॉ। व महिला का नाम सही पाए जाने पर पहली किस्त के रूप में प्रोत्साहन राशि का 30 हजार रुपए पेमेंट होने का प्रावधान है। इसके बाद जांच होने के बाद दूसरी किस्त और कोर्ट में गवाही देने के बाद मुखबिर को पुरस्कार राशि की तीसरी किस्त दी जाएगी।

यह है पूरी योजना

पीसीएनडीटी एक्ट की शुरूआत 2010 में हुई थी। इसके तहत हॉस्पिटल व सोनोग्राफी सेंटर पर गोपनीय तरीके से ऑपरेशन चलाना है। इसके तहत विभाग मुखबिर के जरिए डेमो कस्टमर बनाकर सेंटर पर छापेमारी करेगा। इसमें लोगों का रुझान न होने के चलते ईनाम की राशि बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपए कर दी गई।

रद हो सकता है लाइसेंस

पीएनडीटी एक्ट के तहत लिंग परीक्षण करवाने व जांच करने वाले दोनों के खिलाफ ही सख्त सजा का प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर जुर्माना व पांच साल तक ही सजा का भी प्रावधान है। इसके साथ ही सेंटर का भी लाइसेंस रद हो सकता है।

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डिस्ट्रिक्ट में मुखबिर योजना के लिए अभी तक कोई मुखबिर नहीं आया है। इसके लिए अब अल्ट्रासाउंड सेंटर्स का चेकिंग अभियान चलाया जाएगा, जिसके पेपर्स में गड़बड़ी मिलेगी उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अल्ट्रासाउंड सेंटर्स ओनर को साफ तौर पर लिखना होगा कि उसके यहां भू्रण लिंग की जांच नहीं होती है।

रंजन गौतम, एसीएमओ नोडल अधिकारी

inextlive from Bareilly News Desk


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