शनिश्चरी अमावस्या 2019 शनि के दुष्प्रभाव से बचने के ये हैं आसान उपाय जानें पूजा विधि

2019-01-04T02:35:37+05:30

5 जनवरी 2019 को शनिश्चरी अमावस्या है इसे शनिवारी अमावस्या भी कहा जाता है। धनु राशि में शनि के होने से राशियों पर इसका क्या अच्छा और बुरा दोनों प्रभाव पड़ता है।

5 जनवरी 2019 को शनिश्चरी अमावस्या है, इसे शनिवारी अमावस्या भी कहा जाता है। धनु राशि में शनि के होने से राशियों पर इसका क्या अच्छा और बुरा दोनों प्रभाव पड़ता है। अगर आपकी राशि पर शनि की साढेसाती या शनि की ढैया है तो आप शनि से मिलने वाली पीड़ा को कम करने या उसके निवारण के लिए ज्योतिषीय उपाय कर सकते हैं।

उपाय

जिन राशि वालों को साढ़ेसाती या ढैया का प्रकोप हो, उनको शनि दोष कृत पीड़ा निवारण के लिए काला वस्त्र, उड़द, काला पष्प, लोहा आदि का दान करते रहना चाहिए। विशेष विषम परिस्थितियों में सविधि ग्रह शांति कराएं।

पूजा—अर्चना


पूजा का समयः प्रात: 08ः32 बजे से 09ः40 बजे तक, शुभ के चौघड़िया मुहूर्त में अपराह्न 12ः24 बजे से सायं 04ः17 बजे तक, चर, लाभ, अमृत के चौघड़िया मुहूर्त में एवं सायं काल 05ः35 बजे से रात्रि 07ः17 बजे तक लाभ के चौघड़िया मुहूर्त में।

1. शनि अमावस्या के दिन प्रात: या सायं काल सूर्यास्त के बाद स्नान आदि के बाद ’’हरड़’’ का तेल शरीर पर लगाएं।

2. पश्चिम दिशा की ओर एक चौकी रखकर उस पर काला वस्त्र बिछाएं, श्याम रंग के नीले, लाजवंती पुष्प बिछाएं तथा पीपल के पत्ते पर शनि यन्त्र स्थापित करें।

3. सरसों के तेल का दीपक, धूप जलाएं, नौवेद्य चढ़ाने के लिए काले उड़द का हलवा, काले तिल से बने लड्डू, अक्षत, गंगाजल, बेल पत्र, काले रंग के फूल आदि रखें।

4. चौकी के चारों ओर तिल के तेल से भरी कटोरियां रखें, इसमें काले तिल के दाने, एक सिक्का, एक पंचमुखी रूद्राक्ष डालें।  

5. शनि के मन्त्रों का जाप, साधना आदि करने के बाद 07 अथवा 11 शनिवार को इन कटोरियों में अपने चेहरे की छाया देखने के बाद शनिदेव जी का स्मरण के साथ शनि का दान लेने वालों को दे दें। 

इस प्रकार पूजा करने से दुर्घटना, गंभीर रोग, अकाल मृत्यु, शास्त्राघात से शनिदेव मुक्त रखते हैं।

— ज्योतिषाचार्य पं राजीव शर्मा

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