चीन में नरसंहार की 30वीं बरसी! थियानमेन चौक पर सुरक्षा कड़ी सरकार के दबाव में हटवाईं खबरें

2019-06-04T13:08:47+05:30

आज यानी कि 4 जून को तियानमेन चौक नरसंहार की 30वीं बरसी है। इस मौके पर चीन में प्रशासन ने चौक पर भारी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है।

बीजिंग (एएफपी)। आज यानी कि 4 जून को तियानमेन चौक नरसंहार की 30वीं बरसी है। चीन की सरकार ने इस मौके पर बीजिंग में सुरक्षा बढ़ा दी है। तियानमेन चौक पर भारी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। सेना भी वहां मौजूद है ताकि प्रदर्शनकारियों को किसी भी तरह के काम करने से रोक सके। सरकार के दबाव के चलते आज नरसंहार से जुड़ीं कई खबरों को दबा दिया गया है। विदेशी पत्रकारों को चौके पर जाने की अनुमति नहीं है और पुलिस लोगों को फोटो खींचने से मना कर रही है। ऐसा माना जा रहा है कि चीन की सरकार इस मामले को लेकर किसी भी विवाद में नहीं पड़ना चाहती है।  

छात्रों पर चढ़ाये गए टैंक
बता दें कि आज से ठीक तीन साल पहले 4 जून, 1989 को कम्युनिस्ट पार्टी के उदारवादी नेता हू याओबैंग की हत्‍या या मौत के विरोध में हजारों छात्र बीजिंग के तियानमेन चौक (Tiananmen Square) पर प्रदर्शन कर रहे थे। इस दिन चीन की सरकार ने चौक पर जमा छात्रों पर सैन्य कार्रवाई की। तीन और चार जून की रात को लोकतंत्र के समर्थकों पर चीन की कम्‍यूनिष्‍ट सरकार ने फायरिंग कराई और उन पर टैंक भी दौड़ाए। चीन की सरकार बताती है कि इस नरसंहार में 200 से 300 लोग मारे गए थे, वहीं चीनी लोग कहते है कि करीब 3000 लोगों की हत्याएं हुईं थीं। जबकि, यूरेपीय मीडिया ने 10 हजार लोगों के नरसंहार की बात कही थी। आज तक सही आकड़ें के बारे में पता नहीं चल पाया है। इस घटना के बाद से चीन की सरकार के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी आलोचना हुई। इसके मामले के बाद अब तक चीनी सरकार सावधानी बरतती है। वह तियानमेन चौक पर नरसंहार से जुड़े किसी भी प्रकार के मेमोरियल नहीं होने देती।

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चीनी सरकार इस नरसंहार को नहीं मानती गलत

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भले ही इस नरसंहार की आलोचना होती है लेकिन चीन की सरकार इस दिन निर्दोश लोगों पर की गई सैन्‍य कार्रवाई को आज तक गलत नहीं मानती है। उनका कहना है कि स्थिति को काबू करने के लिए यह निर्णय सही था। चीन के रक्षा मंत्री जनरल वेई फेंगहे साल 1989 में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को तत्‍कालीन सरकार की सही नीति करार चुके हैं। उन्होंने इस घटना को राजनीतिक अस्थिरता बताया था। उन्‍होंने कहा था कि तत्‍कालीन सरकार ने इस सियासी संकट को रोकने के लिए जो कदम उठाए थे वो सही थे।



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